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- Pandit Vijayshankar Mehta Column: Spirituality Is Connecting Happiness With Peace
37 मिनट पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
भाग्य का सबसे हठीला ढंग यही है कि वह समय पर बदल ही जाता है। अच्छे-अच्छे लोगों के जीवन में दुर्भाग्य जब प्रवेश करता है तो समझ नहीं पाते यह क्या हो गया? इस यू-टर्न से वो परेशान हो जाते हैं। और ऐसे ही जब भाग्य प्रवेश करता है तो बावले हो जाते हैं।
संयम नहीं रख पाते। सुख-दु:ख, सौभाग्य-दुर्भाग्य, मनुष्य जीवन के साथ तयशुदा शर्त के रूप में आते हैं। यदि आपने मनुष्य का शरीर लिया है तो इन चारों की तैयारी भी रखिए। यह दौर ऐसा है कि लोग सुविधाओं के पीछे बावले हैं।
आप सुविधाओं को सुख में बदल तो सकते हैं, पर शांति में बदलना कम लोगों को आता है। सुख को शांति से जोड़ने की कला ही अध्यात्म सिखाता है। अगर शांति प्राप्त करने का ढंग, योजना, तरीका, उपाय, कला आ जाए, तो क्या भाग्य और क्या दुर्भाग्य। फिर जीवन आराम से चल जाएगा।
अब जो समय आने वाला है, उसमें अशांत रहना एक तरह से आवश्यक जैसा हो जाएगा। इसलिए शांति ढूंढना उससे भी ज्यादा जरूरी है। आप जो भी काम करें, उसमें शांति का आरक्षण अवश्य रखिए।
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: सुख को शांति से जोड़ने की कला ही अध्यात्म है



