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किसी पर कलंक लगाना आजकल व्यापार-सा हो गया है। जब किसी के चरित्र पर लांछन लगाया जाता है, तो उसका सत्य ढूंढना बड़ा कठिन होता है। क्योंकि सत्य जिस न्याय की अपेक्षा करता है, वो न्याय भी अपने गलियारों में किसी और से न्याय मांग रहा होता है। दुनिया में जितने काम आसान हैं, उनमें आसान से भी आसान है किसी का चरित्र-हनन कर देना। आप किसी के चरित्र पर एक छींटा उड़ा दें, आपका कुछ नहीं जाएगा, पर सामने वाले की जिंदगी धोते-धोते बीत जाएगी। दो लोगों पर कलंक लगा और उन्होंने उसका निवारण भी बहुत अच्छे-से किया। श्रीकृष्ण पर स्यमंतक मणि के कारण चोर और हत्यारा होने का कलंक लगा। भरत पर सत्ता के षड्यंत्र का कलंक लगा। इन्होंने बड़े धैर्य और विवेक से उस कलंक को धोया। आज जिन भी लोगों पर चरित्र-हनन का छींटा उड़ाया जाता है। अगर उनका चरित्र मजबूत है तो वे विजयी होंगे, क्योंकि ईश्वरीय शक्ति उनके साथ है। इसीलिए समाज में यह दृश्य देखने में आता है कि ऊंची इमारत को हिलाना मुश्किल हो तो कुछ लोग कांच ही फोड़ देते हैं।
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अगर चरित्र मजबूत है तो ईश्वरीय शक्ति भी साथ है


