[ad_1]
हम कोई अच्छा काम करें और फिर उसी काम को बार-बार और अच्छे से करते जाएं, इसके पीछे दो बातें काम करती हैं। एक तो उसमें हमें लाभ दिख रहा हो या हमारी लगन गहरी हो। आजकल कोई भी आपके काम को पसंद करे, तो उसके पीछे सामने वाले की रुचि के अलावा एक बात और देखें। आप अपने काम को उसकी आस्था से जोड़ दें। इन दिनों बाजार में आस्था पर बड़े प्रयोग हो रहे हैं। मार्केटिंग कंपनियां इस बात का शोध कर लेती हैं कि किसी की रुचि से अधिक उसकी आस्था किस बात में है। और जैसे ही काम आस्था से जुड़ा, लोगों को पसंद आएगा। हमारे ऋषि-मुनियों ने अन्न को बहुत अच्छे-से आस्था से जोड़ा था। और इसीलिए हम भारतीयों के जीवन में भोजन धार्मिक अनुष्ठान था। लंगर और भंडारे उसका जीता-जागता प्रमाण है। किसी को भोजन कराना दया से अधिक आस्था का मामला था। तो जैसे अन्न आस्था से जुड़ा है, ऐसे ही हम अपने हर कार्य को सामने वाले की आस्था से जोड़कर करें तो उसकी शुद्धि हमारे काम में भी आएगी और परिणाम सबके लिए हितकारी होगा।
[ad_2]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: सामने वाले की आस्था से जोड़कर अपने कार्य करें


