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- Pt. Vijayshankar Mehta’s Column Be Patient, But Patience Should Not Be Considered A Weakness
20 मिनट पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
राम ने सद्गुणों को सदैव सम्मान भी दिया है और प्रयोग में भी लिया है। आतंकवाद को जन्म रावण ने दिया था। फिर इसे फैलाया था कंस और दुर्योधन ने। श्रीराम और श्रीकृष्ण ने ये प्रयोग किया कि ऐसे आतंकवाद के सामने धैर्य से काम लेना होगा, लेकिन धैर्य को कमजोरी न समझा जाए।
रावण से जो युद्ध श्रीराम ने लड़ा था, उसमें श्रीराम का धैर्य देखने बनता है। और महाभारत के युद्ध में कृष्ण की सूझबूझ सामने आती है। श्रीकृष्ण नीतिगत निर्दयता प्रकट करते हैं और श्रीराम ने नीतिगत सदाशयता बताई थी। चाहे रावण हो, कंस हो या दुर्योधन, आध्यात्मिक दृष्टि से ये दुर्गुण के रूप में हमारे भीतर रहते हैं और हमें प्रतिपल इनसे युद्ध करना पड़ता है।
जो ईश्वर पर भरोसा रखते हैं, उनकी विजय सुनिश्चित है। इसीलिए श्रीराम के लिए लिखा गया है- जल सीकर महिरज गनि जाहीं। रघुपति चरित न बरनि सिराहीं॥ जल की बूंदें और पृथ्वी के रजकण चाहे गिने जा सकते हों, पर श्रीरघुनाथ जी के चरित्र-वर्णन से नहीं चूकते।
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: धैर्य से काम लें लेकिन धैर्य को कमजोरी न समझा जाए

