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- Pt. Vijayshankar Mehta’s Column To Live Relationships Well, Rely On Your Soul
पं. विजयशंकर मेहता
हम मनुष्यों के पास एक बहुत बड़ी पूंजी होती है और वो है हमारे रिश्ते। रिश्तों के पीछे भी मनोविज्ञान काम करता है। अधिकांश पुरुष रिश्तों को देह पर टिकाते हैं, कुछ कम होते हैं जो देह के आगे मस्तिष्क पर ले जाते हैं, लेकिन पुरुष रिश्तों को दिल तक कम ले जाते हैं।

महिलाओं के मामले में उलटा है। वे रिश्तों को ज्यादातर दिल से जीती हैं, दिमाग कम लगाती हैं और देह पर नहीं टिकती हैं। इसीलिए एक चौंकाने वाली बात सामने आती है कि 25% बच्चे एक उम्र के बाद पिता से अलग होना चाहते हैं। वहीं मां से अलग होने वालों का प्रतिशत 6 ही है। इसलिए आप पुरुष हों या स्त्री, रिश्तों को निभाते समय देह, दिमाग और दिल तीनों का संतुलन के साथ उपयोग करें।
रिश्तों में मनमुटाव आना स्वाभाविक है, पर तुरंत कोई निर्णय न लें। रिश्तों के साथ जमकर जीएं। मन इसमें बाधा पहुंचाता है, इसलिए रिश्तों को जीने के लिए आत्मा पर टिकें। एक बहुत छोटा-सा फॉर्मूला है रिश्ते निभाने का- या तो माफी मांग लें, या माफ कर दें।
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: रिश्तों को अच्छे से जीने के लिए अपनी आत्मा पर टिकें