पंजाब CM-नेताओं पर FIR रद्द को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: चंडीगढ़ प्रशासन की SLP दायर करने की तैयारी,महिला कांस्टेबल की शिकायत – Chandigarh News Chandigarh News Updates

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चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत आम आदमी पार्टी के कई नेताओं के खिलाफ दर्ज FIR और उससे जुड़ी कार्यवाही को रद्द किए जाने के हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला लिया है। प्रशासन इस मामले में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर करने की तैयारी कर रहा है। हाईकोर्ट ने 6 साल बाद रद्द FIR करीब 6 साल पुराने इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 29 नवंबर 2025 को FIR, चार्जशीट और सभी संबंधित कार्यवाहियों को रद्द कर दिया था। इसके बाद यूटी प्रशासन ने ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान ही साफ कर दिया था कि वह इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा। सरकारी वकील ने अदालत से दो हफ्ते का समय मांगा और कहा कि राज्य इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा। इन नेताओं के खिलाफ दर्ज मामला पुलिस के साथ हाथापाई करने के मामले में आम आदमी पार्टी के 10 नेताओं के खिलाफ चंडीगढ़ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में केस चलेगा। यह केस पंजाब सीएम भगवंत मान जो उस समय सांसद थे, 7 विधायक और 2 अन्य नेताओं दर्ज है। भगवंत मान के अलावा, विधायक हरपाल सिंह चीमा, मास्टर बलदेव सिंह, बलजिंदर कौर, मीत हेयर, अमन अरोड़ा, सरबजीत कौर माणुके, मंजीत सिंह और दो अन्य नेता नरिंदर सिंह शेरगिल व जयसिंह रोढी शामिल हैं। केस का ट्रायल अभी भी चंडीगढ़ की अदालत में लंबित है। महिला कांस्टेबल की शिकायत पर दर्ज केस यह मामला 10 जनवरी 2020 को चंडीगढ़ पुलिस की महिला कांस्टेबल मनप्रीत कौर की शिकायत पर सेक्टर-3 थाने में दर्ज किया गया था। शिकायत में कहा गया था कि इन नेताओं के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के आधिकारिक आवास की ओर बढ़ रहे थे। जब पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो कार्यकर्ताओं ने धक्का-मुक्की शुरू कर दी और बैरिकेड्स तोड़ने का प्रयास किया। शिकायत के अनुसार, भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया, लेकिन इसके बाद कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस घटना में महिला कांस्टेबल मनप्रीत कौर समेत SDOP कृष्ण, इंस्पेक्टर मलकीत सिंह और एसएसपी विनीत कुमार के घायल होने का दावा किया गया था। सभी का अस्पताल में मेडिकल भी कराया गया था। जानिए हाईकोर्ट ने क्यों रद्द की FIR हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि घटना के दौरान पथराव करने वाले किसी भी व्यक्ति का नाम स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया। इसके अलावा पुलिसकर्मियों को आई चोटें भी सामान्य प्रकृति की थीं, जो धक्का-मुक्की के दौरान लग सकती हैं। इस मामले में जिन धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था, उनमें दो साल या उससे अधिक सजा का प्रावधान है। कानून के मुताबिक, अगर किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी संसद या विधानसभा सदस्यता तुरंत खत्म हो सकती है।

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