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Delhi-Mumbai Expressway News: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के अगले 4 महीनों में पूरी तरह ऑपरेशनल होने की संभावना है. वहीं प्रॉपर्टी के लिहाज से देखें तो यह भविष्य का सबसे बड़ा प्रॉपर्टी हॉटस्पॉट बनने वाला है. लगातार आ रहीं रियल एस्टेट रिपोर्ट्स, प्रॉपर्टी एनालिस्टों के अनुमान, बड़े डेवलपर्स की एंट्री और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की दूरदर्शी सोच और इन्फ्रास्टक्चर की रणनीति यही बता रही हैं कि 1350 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को लेकर निवेशकों और खरीदारों का रुझान ही तेजी से नहीं बढ़ रहा है, बल्कि यहां कीमतें भी कुछ साल में दोगुनी होकर बेहतर रिटर्न दे रही हैं.
मैजिकब्रिक्स का अनुमान बताता है कि इस एक्सप्रेसवे के आसपास 3 तरह का प्रॉपर्टी टाइप विकसित हो रहा है. जिनमें 50 फीसदी रेजिडेंशियल प्लॉट्स , 25 फीसदी एग्रीकल्चर भूमि और 25 फीसदी फार्म हाउस बनाए या बेचे जा रहे हैं. यहां बड़े डेवलपर्स के अलावा निजी रूप से भी प्लॉटिंग या जमीनों की बिक्री हो रही है. जबकि कीमतों की बात करें तो दिल्ली-एनसीआर के इलाके से दूर पूरे एक्सप्रेसवे पर प्लॉटों की कीमतें लगभग 20 लाख रुपये तक हैं.
दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे जुलाई में ऑपरेशनल होने वाला है.
मैजिकब्रिक्स की लिस्टिंग और अनुमान देखें तो दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर गुरुग्राम-सोहना में प्लॉटों की कीमत लाखों से करोड़ों में पहुंच गई है. एक्सप्रेसवे के नजदीक 90 से 150 वर्ग गज के रेजिडेंशियल प्लॉट की कीमत अनुमानित 75 लाख रुपये से पौने 3 करोड़ रुपये तक है. जबकि ढाई सौ वर्ग गज से बड़े प्लॉटों की कीमतें पौने 5 से 12 करोड़ तक पहुंच चुकी है.
प्रॉपर्टी लेनदेन के फाउंडर और रियल एस्टेट एनालिस्ट भूपेंद्र सिवाग कहते हैं, ‘केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस एक्सप्रेसवे को पूरी तरह ऑपरेशनल करने के लिए 31 जुलाई 2026 का टाइम दिया है. जब एक बार यह चालू हो जाएगा तो यहां कीमतें तेजी से भागेंगी, लेकिन चूंकि अब जुलाई को आने में ज्यादा समय नहीं है ऐसे में लोग यहां उससे पहले ही जमीन या प्लॉट खरीदना चाहते हैं. इसकी वजह से यहां डिमांड देखी जा रही है और वास्तव में इस कॉरिडोर पर जमीन खरीदने का यह बेस्ट समय भी है, क्योंकि इसके बाद यहां कीमतों में बढ़ोत्तरी ही होनी है.’
इन 4 सेक्शनों में बंटा है
यह पूरा एक्सप्रेसवे चार सेक्शनों में बंटा है.पहला सेक्शन-डीएनडी फरीदाबार केएमपी, दूसरा-सोहना केएमपी वडोदरा, तीसरा-वड़ोदरा-विरार और चौथा-विरार-जेएनपीटी है.
6 राज्यों के इन जिलों में बढ़ी विकास की रफ्तार
- दिल्ली: महारानी बाग फ्लाईओवर, अलीपुर गांव
- हरियाणा: पलवल, सोहना और नूंह
- राजस्थान: अलवर, राजगढ़, बांदीकुई, दौसा, सवाई माधोपुर, बूंदी और कोटा
- मध्य प्रदेश: मंदसौर, भानपुरा, सीतामाऊ, रतलाम, झाबुआ
- गुजरात: दाहोद, गोधरा जिला, वड़ोदरा, विरार, भरूच, सूरत और बददोली
- महाराष्ट्र: विरार, थाणे, बदलापुर, रायगढ़
सिवाग आगे कहते हैं कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे बहुत ज्यादा लंबा है और कई राज्यों में फैला है. ऐसे में इसके अलग-अलग हिस्सों में ग्रोथ का लेवल अलग-अलग है. जो हिस्सा मेट्रो शहरों या दिल्ली-एनसीआर के ज्यादा करीब है, उसमें ग्रोथ और प्रोग्रेस बाकी जगह के मुकाबले काफी तेज है. यहां रेजिडेंशियल, कॉमर्शियल या एग्रीकल्चर लेंड की कीमतें भी अन्य जगहों के मुकाबले ज्यादा हैं.
वहीं प्रॉपइक्विटी का रुझान बताता है कि पिछले दो साल से सोहना इलाके में इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी के कारण दीर्घकाल में लैंड व होम प्राइस दोनों ऊपर जा रहे हैं.हालांकि जैसे-जैसे यह एक्सप्रेसवे आगे हरियाणा और राजस्थान की ओर बढ़ता जाता है और एनसीआर से दूर होता जाता है इसकी प्राइसिंग में बदलाव आता है और रेट कम होते जाते हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
जे एस्टेट्स के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल गोदारा कहते हैं कि दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे के किनारे जमीन या प्रॉपर्टी खरीदना अब एक सही निर्णय और बेहतरीन समय माना जा रहा है. एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी बेहतर हो गई है और इसके मुख्य हिस्से अब पूरी तरह से काम कर रहे हैं. इसके आसपास के छोटे बाजार यानी माइक्रो मार्केट्स अब विकास के नए दौर में प्रवेश करने वाले हैं. बेहतर पहुंच, यात्रा का समय कम होना और लॉजिस्टिक्स की सुविधा में सुधार जैसे कारण इस क्षेत्र में बने प्रोजेक्ट्स को लंबे समय तक सफल और स्थिर बना रहे हैं. आने वाला समय इस एक्सप्रेसवे के आसपास की ग्रोथ का है.
वहीं जेएमएस ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर पुष्पेंद्र सिंह कहते हैं कि दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे और सोहना रोड की कनेक्टिविटी ने दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है. ऐसे मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स केवल सड़कें नहीं, बल्कि आर्थिक गलियारे हैं, जो क्षेत्रीय विकास की दिशा तय करते हैं. इतिहास भी यही दर्शाता है कि जब कहीं विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर पहुंचा, वहां प्रॉपर्टी की कीमतों में अभूतपूर्व उछाल देखा गया. वे कहते हैं कि निवेश का सबसे उपयुक्त समय वह होता है जब कनेक्टिविटी स्पष्ट हो, लेकिन कीमतें अभी अपनी पूरी संभावित ऊंचाई तक नहीं पहुंची हों.
अगर देखा जाए तो प्रॉपर्टी की कीमतें भी हरियाणा के सोहना से लेकर राजस्थान के अलवर और राजगढ़ हिस्से तक ज्यादा तेजी से बढ़ रही हैं. इसके बाद के इलाकों में भी ग्रोथ है लेकिन एनसीआर के आसपास के इलाकों से कुछ कम है. हालांकि जो लोग एनसीआर से दूर इन्वेस्ट करना चाहते हैं लेकिन एनसीआर से जुड़े भी रहना चाहते हैं तो उनके लिए इस एक्सप्रेसवे के किनारे ढेरों विकल्प हैं.
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