तोमर वंश के राजा अनंगपाल ने बसाया अनंगपुर गांव, हड़प्पा जैसी जल प्रबंधन व्यवस्था Haryana News & Updates

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फरीदाबाद के अरावली की पहाड़ियों में बसा अनंगपुर गांव आज भी हजारों साल पुरानी सभ्यता की गवाही देता है. अनंगपुर सिर्फ एक गांव नहीं बल्कि प्रारंभिक मध्यकाल का एक बेहद महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है. हरियाणा के फरीदाबाद जिले के अरावली क्षेत्र में स्थित इस गांव को तोमर वंश के राजा अनंगपाल प्रथम ने 8वीं शताब्दी में बसाया था. माना जाता है कि यह उनकी पहली राजधानी थी जिसके बाद इसे दिल्ली के लालकोट क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया. लालकोट किले का निर्माण भी अनंगपाल प्रथम ने ही करवाया था जिसे दिल्ली की शुरुआती किलेबंदी माना जाता है.

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फरीदाबाद: फरीदाबाद के अरावली की पहाड़ियों में बसा अनंगपुर गांव आज भी अपने अंदर हजारों साल पुरानी कहानियां समेटे हुए है. जैसे ही आप इस गांव में कदम रखते हैं आपको ऐसा लगता है मानो समय पीछे चला गया हो. कहीं प्राचीन शिव मंदिर की घंटियां सुनाई देती हैं तो कहीं पत्थरों से बना वह ऐतिहासिक बांध आज भी अपनी मजबूती की कहानी खुद बयां करता है. करीब 1300 साल पुराने इस गांव की हर गली हर मोड़ पर इतिहास सांस लेता नजर आता है. दिल्ली से महज कुछ किलोमीटर दूर होने के बावजूद यहां की मिट्टी में आज भी पुरातन सभ्यताओं की खुशबू महसूस होती है.

तोमर वंश के राजा अनंगपाल ने बसाया था ये गांव

लोकल18 से बातचीत में इतिहास की प्रोफेसर कमलेश ने बताया अनंगपुर सिर्फ एक गांव नहीं बल्कि प्रारंभिक मध्यकाल का एक बेहद महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है. हरियाणा के फरीदाबाद जिले के अरावली क्षेत्र में स्थित इस गांव को तोमर वंश के राजा अनंगपाल प्रथम ने 8वीं शताब्दी में बसाया था. माना जाता है कि यह उनकी पहली राजधानी थी जिसके बाद इसे दिल्ली के लालकोट क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया. लालकोट किले का निर्माण भी अनंगपाल प्रथम ने ही करवाया था जिसे दिल्ली की शुरुआती किलेबंदी माना जाता है. इतिहासकारों के मुताबिक तोमर वंश को लेकर अलग-अलग मत हैं लेकिन अधिकतर इतिहासकार इन्हें तोमर ही मानते हैं.

कुछ विद्वान इन्हें सोमवंशी क्षत्रिय और पांडवों का वंशज भी मानते हैं. वहीं कुछ इतिहासकारों का मानना है कि तोमर शासकों ने सबसे पहले इसी क्षेत्र में अपना राज्य स्थापित किया था. हालांकि पेहोवा शिलालेख में जौला को स्वतंत्र शासक नहीं माना गया है जिससे इतिहास में कुछ मतभेद भी देखने को मिलते हैं.

हड़प्पा जैसी जल प्रबंधन व्यवस्था

प्रोफेसर कमलेश ने बताया अनंगपुर का इतिहास सिर्फ मध्यकाल तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसके प्रमाण प्रागैतिहासिक काल और सिंधु घाटी सभ्यता तक भी जाते हैं. अरावली की पहाड़ियों में मिले मिट्टी के बर्तन, पत्थर के औजार और शैल चित्र इस बात का सबूत हैं कि यह इलाका हजारों सालों से मानव बसावट का केंद्र रहा है. यहां हड़प्पा सभ्यता जैसी नगर योजना जल प्रबंधन और किलेबंदी की झलक भी देखने को मिलती है

प्रोफ़ेसर कमलेश ने बताया अनंगपुर की पहचान का सबसे बड़ा हिस्सा इसका ऐतिहासिक बांध और किला है. बताया जाता है कि 11वीं शताब्दी में तोमर वंश के राजाओं ने यह बांध बनवाया था. यह एक ग्रेविटी बांध है जिसे बिना सीमेंट के बड़े-बड़े पत्थरों को जोड़कर तैयार किया गया था. इसकी खासियत यह है कि यह अपने वजन से ही पानी को नियंत्रित करता है.

सूरजकुंड का निर्माण

इसी क्षेत्र के पास स्थित सूरजकुंड का निर्माण भी तोमर वंश के राजा सूरजपाल तोमर ने करवाया था. यह एक अर्धवृत्ताकार कुंड है जो सूर्य के आकार जैसा दिखाई देता है और इसका उपयोग वर्षा जल संचयन के लिए किया जाता था. बाद में फिरोजशाह तुगलक ने इसकी मरम्मत करवाई और यहां एक गढ़ी भी बनवाई. आज यह जगह हरियाणा पर्यटन का बड़ा केंद्र है और 1987 से यहां अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले का आयोजन भी होता है. आज के समय में अनंगपुर और सूरजकुंड दोनों ही इतिहास और संस्कृति के जीवंत उदाहरण हैं. ये जगहें हमें पुराने समय की जल प्रबंधन व्यवस्था, वास्तुकला, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक जीवन की झलक दिखाती हैं.

वहीं गांव के निवासी ऋषि पाल ने बताया अनंगपुर गांव में आज करीब 8 से 10 हजार की आबादी रहती है. यहां स्कूल, कॉलेज और अस्पताल जैसी सुविधाएं मौजूद हैं. गांव में प्राचीन शिव मंदिर, माता रानी और हनुमान जी के मंदिर भी हैं जिनमें कुछ मंदिर तो गांव बसने से पहले के बताए जाते हैं. यहां एक बड़ा क्रिकेट स्टेडियम भी है जो करीब 3 से 4 एकड़ में फैला हुआ है. दिल्ली यहां से सिर्फ 5 किलोमीटर दूर है. यहां पर मड हाउस यानी मिट्टी का घर है आज भी इस गांव की अलग पहचान बनाए हुए. अनंगपुर सिर्फ एक गांव नहीं बल्कि इतिहास, संस्कृति और परंपरा का ऐसा संगम है जो आज भी फरीदाबाद की पहचान को और मजबूत बनाता है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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