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- Dr. Anil Joshi’s Column What Kind Of Air, What Kind Of Water Will We Leave For Our Children?
2 घंटे पहले
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डॉ. अनिल जोशी पद्मश्री से सम्मानित पर्यावरणविद्
दुनिया में हवा को लेकर हम कितने गंभीर हैं, यह तो अभी वर्तमान में जारी एक रिपोर्ट में साफ दिखाई देता है। अक्टूबर 2025 में दुनिया के सभी देशों के प्रदूषित शहरों की एक सूची जारी की गई और इस सूची में 40 शहर अपने ही देश में पाए गए। इसके दो बड़े कारण हैं। एक, शहरों में आवाजाही और गाड़ियों की रफ्तार का बढ़ना और दो, यहां लगातार हो रहे ढांचागत विकास के कार्य, जो वायु प्रदूषण में बड़ा योगदान कर रहे हैं।
बड़ी बात यह है कि जिस प्राण-वायु को हमने प्राण का नाम दिया, उसके प्रति हमारी यह उपेक्षा आने वाले समय के लिए एक बहुत बड़ा संकट बनने जा रही है। कितनी अजीब बात है कि मनुष्य ने अपनी ही जमीन अपने पैरों तले से खिसका दी है, क्योंकि जंगल और जमीन दोनों किसी न किसी रूप में संकट में जा चुके हैं। लेकिन जो बड़ा विषय है, वह इस रूप में है कि प्राण-वायु- जो हर क्षण हमारे लिए अनिवार्य है- को लेकर हालात इतने गंभीर हो जाएंगे, इस पर पहले विचार नहीं किया गया।
आज देश की तस्वीर आसमान से धुंधली ही दिखाई देगी, क्योंकि वायु का भीषण प्रदूषण है। यह आने वाले समय में विकास के नाम पर एक बड़ा धुंधला धब्बा भी बनेगा। शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण के पीछे सबसे बड़े कारणों में गाड़ियों की बढ़ती संख्या और बढ़ता जाम हैं। ये शहरों का दम घोट रहे हैं।
300 से ऊपर एक्यूआई होना सीधा बड़ा खतरा है। इसका मतलब है कि हम खतरे की सीमा से आगे जा चुके हैं। हमारे देश के तो कई शहर इस खतरे को छू चुके हैं। पार्टिकुलेट मैटर पीएम1 बहुत ही छोटा कण होता है। यूरोपियन रेस्पिरेटरी सोसाइटी के अनुसार यह अत्यंत घातक है और किसी भी देश के एक्यूआई की गंभीरता तय करता है।
अपने देश में भी ये इंडेक्स लगातार मापा जाता है, लेकिन जिस तरह के हालात हैं, उनमें हम इस तरह के इंडेक्स बनाकर क्या करें, जब हम उन पर कोई गंभीर निर्णय ही नहीं ले पाते हों? वायु प्रदूषण से होने वाले कष्टों को अगर हम समझ लें तो शायद कुछ हमारी समझ में आए।
वायु प्रदूषण में नाइट्रोजन डायऑक्साइड, सल्फर डायऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, अमोनिया जैसे घातक तत्व शामिल होते हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं और गंभीर रोगों का कारण बनते हैं। सरल-सी बात है, जब हर क्षण हम सांस लेते हैं, तो यह मान लीजिए कि यह विषैली हवा फेफड़ों में सिस्टेमिक इंफ्लेमेशन और कार्सिनोजेनिसिटी पैदा कर सकती है।
पहले से ही लोग अगर किसी न किसी रोग में हैं, तो उनके लिए यह और भी गंभीर परिस्थितियां पैदा करेगा। कई बीमारियां जैसे स्ट्रोक, डायबिटीज, क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज, लंग कैंसर- इन सबका संबंध वायु प्रदूषण से जोड़ा जा रहा है। आज भी दुनिया में करीब 40 से 50 लाख लोग असमय मौत के शिकार बनते हैं और इसे इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।
जिस तरह धूम्रपान कैंसर की वजह बनता है, अब 40% फेफड़ों का कैंसर प्रदूषण के कारण हो रहा है। मतलब आप बीड़ी-सिगरेट का सेवन करें या न करें- कोई फर्क नहीं पड़ता- अगर आप ऐसे शहर में हैं, जहां एक्यूआई 300 से ऊपर है, तो आप खतरे की सीमा पर हैं।
इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने पीएम1 को कैंसर का प्रमुख कारण माना है और हमारी तरफ से इसके नियंत्रण के लिए कोई बेहतर प्रयास दिखाई नहीं दे रहे हैं। द लांसेट प्लेनेटरी हेल्थ स्टडी के अनुसार पीएम 2.5 में जरा-सा भी बदलाव 60 वर्ष से अधिक लोगों की मृत्यु की आशंका को 1.5% बढ़ा देता है।
यह आंकड़ा बहुत गंभीर है। क्योंकि अपने देश में बुजुर्ग पहले ही कई बीमारियों की चपेट में रहते हैं। विडम्बना यह है कि यदि प्रदूषित वायु में आप अधिक व्यायाम करेंगे, तो प्रदूषण के और बड़े शिकार बनेंगे!
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
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