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आज से दस दिन बाद (20 अप्रैल) उस व्यक्ति की 137वीं जयंती है, जिसे 1938 में टाइम पत्रिका द्वारा पर्सन ऑफ द ईयर चुना गया था। लेकिन अलोइस हिटलर और क्लारा पोल्ज्ल का वह बेटा इतिहास के सबसे स्याह किरदारों में से एक था। बहरहाल, इस लेख के आरम्भ में एक डिस्क्लेमर कि इसमें व्यक्तियों या घटनाओं से किसी भी प्रकार की समानता मात्र संयोग है। स्तम्भकार किसी भी व्यक्ति, समूह, संगठन, धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय की मानहानि, गलत प्रस्तुति या नकारात्मक चित्रण का कोई इरादा नहीं रखता। पाठकों से विवेक (और समझदारी) से पढ़ने का अनुरोध है। दृश्य 1 – 1938 : नाजी जर्मनी के क्रिस्ताल्लनाष्ट दंगों में भीड़ को संगठित किया गया और उन्हें यहूदियों की संपत्तियों पर हमला करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। 48 घंटों के भीतर लगभग 1400 सभागृहों और प्रार्थना स्थलों को नष्ट कर दिया गया। 2023 : मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद 36 घंटों के भीतर लगभग 249 गिरजाघरों को जला दिया गया। दृश्य 2 – 1935 : यहूदियों और जर्मनों के बीच संबंधों और विवाहों को प्रतिबंधित और अवैध घोषित कर दिया गया। 2026 : बारह राज्यों ने किसी भी प्रकार के धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाए। हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और हरियाणा में पारित कानून विशेष रूप से विवाह के उद्देश्य से किए गए धर्मांतरण को अपराध घोषित करते हैं और ऐसे किसी भी विवाह को अमान्य करार देते हैं। ये कानून यह भी अनिवार्य करते हैं कि किसी व्यक्ति को अपना धर्म बदलने से पहले सरकार की अनुमति प्राप्त करनी होगी। दृश्य 3 – 1935 : रायख सिटीजनशिप लॉ के जरिए नागरिकता को ‘जर्मन और संबंधित रक्त’ तक सीमित कर दिया गया। इसे ग्रैंड-पैरेंट्स के धर्म और पहचान के दस्तावेजी प्रमाण के आधार पर सिद्ध करना आवश्यक था। इन दस्तावेजों का उपयोग यहूदी वंशावली का पता लगाने (और अंततः ऐसे लोगों को बाहर करने) के लिए किया जाता था। 2019 : सीएए ने धार्मिक पहचान के आधार पर नागरिकता का प्रावधान किया। पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आए प्रवासियों को केवल तभी त्वरित भारतीय नागरिकता प्रदान की गई, जब वे हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई थे। दृश्य 4 – 1933 : रायख प्रचार मंत्रालय की स्थापना की गई। संपादकों और पत्रकारों से अपेक्षा की गई कि वे मंत्रालय द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें। दिशानिर्देश तय किए गए कि क्या रिपोर्ट किया जा सकता है और क्या नहीं, तथा उसे किस प्रकार प्रस्तुत किया जाएगा। 2014 : 15 पत्रकारों पर यूएपीए के तहत आरोप लगाए गए और 36 को हिरासत में लिया गया। हाथरस में दलित युवती के साथ दुष्कर्म की रिपोर्टिंग करने पर सिद्दीक कप्पन को दो वर्ष जेल में रखा गया। दृश्य 5 – 1933 : नाजी पार्टी ने यहूदियों के व्यवसायों के बहिष्कार की घोषणा की। यहूदियों के व्यवसायों की सूचियां तैयार की गई। उन्हें चिह्नित करने के लिए उनके प्रतिष्ठानों की दीवारों पर चित्र बनाए गए, वहीं गैर-यहूदी व्यवसायी अपने प्रतिष्ठानों पर जर्मन-ईसाई होने के संकेत-चिह्न लगाते थे। 2024 : यूपी के राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि अगर कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित भोजनालय और रेस्तरां मुसलमानों द्वारा संचालित हैं, तो उन्हें हिंदू नामों का उपयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने पुलिस के उस निर्देश का भी समर्थन किया, जिसमें यात्रा मार्ग पर स्थित भोजनालयों को संचालित करने वाले लोगों के नाम सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया। दृश्य 6 – 1933 : नाजी पार्टी ने एक चौक पर हजारों पुस्तकों को जलाया। इनमें यहूदियों द्वारा लिखी मनोविज्ञान, मार्क्सवाद, लोकतंत्र, उदारवाद से संबंधित किताबें शामिल थीं। 2023 : एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में संशोधन या ‘युक्तियुक्तकरण’ किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 182 पुस्तकों में लगभग 1334 बदलाव किए गए। गुजरात दंगों, मुगल काल, जाति व्यवस्था तथा सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों से संबंधित संदर्भों को हटा दिया गया। दृश्य 7 – 1940 : गोयबल्स के मार्गदर्शन में ‘द इटर्नल ज्यू’ फिल्म बनाई गई। यह फिल्म यहूदियों की तुलना चूहों से करती है, जहां एक दृश्य में शहर में चूहों के झुंड के दृश्य के बाद शहरी क्षेत्रों में यहूदियों की उपस्थिति दिखाई जाती है। 2025 : बिहार चुनाव से पहले जारी एक कार्टून में टोपी पहने चूहों को दर्शाया गया। एक केंद्रीय मंत्री को चूहों को जाल में फंसाते और फिर उन्हें बांग्लादेश में छोड़े जाते हुए दिखाया गया। हम वाकई एक अजीबोगरीब दौर में जी रहे हैं! 2023 में एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में संशोधन या ‘युक्तियुक्तकरण’ किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 182 पुस्तकों में लगभग 1334 बदलाव किए गए। इतिहास के अनेक संदर्भों को हटा दिया गया।
(ये लेखक के अपने विचार हैं। इस लेख की सहायक-शोधकर्ता वर्णिका मिश्रा हैं)
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डेरेक ओ ब्रायन का कॉलम: इतिहास की ये घटनाएं मौजूदा दौर पर क्या टिप्पणी करती हैं?


