टाइप 1 डायबिटीज है तो पढ़ लें यह रिसर्च, मेमोरी लॉस होने का बड़ा खतरा Health Updates

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Can Type 1 Diabetes Cause Memory Loss: जैसे-जैसे टाइप 1 डायबिटीज के मरीज अब पहले से ज्यादा उम्र तक जी रहे हैं, वैसे-वैसे इसके लंबे असर भी सामने आने लगे हैं. एक बड़ी नई रिसर्च में पाया गया है कि टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में डिमेंशिया यानी याददाश्त कमजोर होना का खतरा सामान्य लोगों के मुकाबले लगभग तीन गुना ज्यादा हो सकता है. इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि यह बीमारी समय के साथ दिमाग पर कैसे असर डालती है. 

क्या निकला रिसर्च में?

न्यूरोलॉजी जर्नल में पब्लिश इस स्टडी में करीब 2.8 लाख लोगों का डेटा देखा गया. इनमें से 5,442 लोगों को टाइप 1 डायबिटीज थी. इस ग्रुप में से 144 लोगों को बाद में डिमेंशिया हुआ, यानी करीब 2.6 प्रतिशत लोगों को. वहीं जिन लोगों को डायबिटीज नहीं थी, उनमें यह आंकड़ा सिर्फ 0.6 प्रतिशत था. उम्र और पढ़ाई जैसे फैक्टर को ध्यान में रखने के बाद भी टाइप 1 डायबिटीज वालों में खतरा लगभग तीन गुना ज्यादा पाया गया. टाइप 2 डायबिटीज में भी ऐसा ही ट्रेंड दिखा, लेकिन वहां खतरा करीब दो गुना था. हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि यह डेटा हेल्थ रजिस्ट्री से लिया गया था, इसलिए कुछ मामलों में गलत या अधूरी जानकारी भी हो सकती है.

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क्यों होता है ऐसा खतरा?

अब सवाल यह है कि टाइप 1 डायबिटीज में ऐसा क्यों होता है? इसकी एक बड़ी वजह यह है कि यह बीमारी अक्सर कम उम्र में ही शुरू हो जाती है. यानी व्यक्ति लंबे समय तक इस बीमारी के साथ जीता है, जिससे दूसरी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. दूसरी अहम वजह है ब्लड शुगर का बार-बार ऊपर-नीचे होना.  टाइप 1 डायबिटीज में शुगर लेवल बहुत तेजी से गिरता और बढ़ता है. खासकर लो ब्लड शुगर ब्रेन के लिए खतरनाक होता है, क्योंकि इससे ब्रेन सेल्स पर दबाव पड़ता है. इतना ही नहीं, जब लो शुगर के बाद अचानक हाई शुगर हो जाती है, तो यह दिमाग के उस हिस्से को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है, जो याददाश्त और सीखने से जुड़ा होता है. 

इंसुलिन की भी अहम भूमिका

इंसुलिन भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है. शरीर में एक एंजाइम होता है, जो इंसुलिन और एक खास प्रोटीन दोनों को तोड़ता है.  यही प्रोटीन अल्जाइमर से जुड़ा होता है. जब शरीर में इंसुलिन ज्यादा होता है, तो यह एंजाइम पहले इंसुलिन को तोड़ने में लग जाता है और एमाइलॉयड बीटा दिमाग में जमा होने लगता है. यह जमा हुआ प्रोटीन दिमाग में प्लाक बनाता है, जिससे ब्रेन सेल्स के बीच कम्युनिकेशन खराब होता है और धीरे-धीरे याददाश्त कमजोर होने लगती है. टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों में अल्जाइमर और वेस्कुलर डिमेंशिया दोनों का खतरा बढ़ जाता है. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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