टाइटन की पहल: सीईओ नारायण बोले-हम भरोसा करने के लिए कहते नहीं, बल्कि इसे साबित करते हैं Politics & News

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सोना महंगा होने से ग्राहक भारी के बजाय हल्की और स्टाइलिश ज्वेलरी को तवज्जो दे रहे हैं। इस ट्रेंड को भांपते हुए देश की सबसे बड़ी ज्वेलरी विक्रेता टाइटन ने डायमंड ज्वेलरी पर फोकस बढ़ाया है। ज्वेलरी बिक्री में हीरों का हिस्सा 12% है, जो ग्रोथ की बड़ी संभावनाओं को दिखाता है। हीरों की खरीदारी में भरोसा और सही कीमत ग्राहकों की बड़ी चिंता रही है। कंपनी सभी स्टोर्स में हीरों की शुद्धता वैज्ञानिक तरीके से जांचने के लिए ‘डायमंड एक्सपर्टाइज सेंटर’ (डीएक्ससी) शुरू कर रही है। टाइटन कंपनी, ज्वेलरी डिवीजन के सीईओ अरुण नारायण ने एन रघुरामन के साथ खास बातचीत में कहा कि इससे ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा। बातचीत के मुख्य अंश… सवाल-हीरों के लिए सर्टिफिकेट प्रणाली पहले से मौजूद है। फिर डीएक्ससी की जरूरत क्यों? जवाब-सर्टिफिकेट एक बात है और अपनी आंखों के सामने वैज्ञानिक तरीके से जांच करवाना अलग अनुभव है। पटना में हमारी एक ग्राहक थीं, जो पुराने हीरे के गहने बेचना चाहती थीं क्योंकि उन्हें लगता था कि वे नकली हैं। जब उन्होंने हमारी लैब में जांच करवाई, तो पता चला कि उनके सभी हीरे असली थे। वे शोरूम से संतुष्ट होकर गईं। अप्रत्यक्ष रूप से हमें भी एक संतुष्ट ग्राहक और मिला। सवाल-ज्वेलरी में हीरों का हिस्सा 12% है। इसे कैसे बढ़ाएंगे? जवाब-सोलमेट कपल रिंग्स पेश की है। करोड़ों वर्ष पुराने हीरे को दो टुकड़ों में काटकर अंगूठियों की जोड़ी बनाई जाती है। बड़े हीरे वाली दुल्हन की उंगली पर चमकती है, जबकि उसी हीरे का छोटा सा हिस्सा दूल्हे की उंगली पर जगमगाता है। उम्मीद है यह युवा पीढ़ी के बीच लोकप्रिय होगी, जो नई शुरुआत को यादगार बनाना चाहते हैं। सवाल-आपका ब्रांड टियर 2, 3 शहरों में क्यों नहीं दिखता, जहां बैंकों ने कृषि आय को आकर्षित करने के लिए अपनी शाखाएं खोली हैं? जवाब-आप कोई उदाहरण दे सकते हैं? सवाल-एमपी के हरदा जैसे शहर को लीजिए। दक्षिण के सहकारी बैंकों तक की शाखाएं हैं? जवाब-मैं आपसे सहमत हूं। भारत में ऐसे कई शहर हैं जहां बैंकों ने अपनी पैठ बनाई है। हम अपेक्षाकृत नए हैं, फिर भी इन शहरों को योजना में शामिल किया है। हम जल्द ही वहां भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। सवाल-लैब में बने हीरे (एलजीडी) उत्पाद के रूप में कहां खड़े हैं? जवाब-भारतीय उपभोक्ता एलजीडी को प्राकृतिक हीरे के एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में देखते हैं। जबकि अमेरिका में स्थिति अलग है। यही वजह है कि हम हर जगह डीएक्ससी ला रहे हैं, ताकि ग्राहक हीरे की सही कीमत अदा करें। सवाल-हीरों पर अचानक इतना बड़ा दांव लगाने और सभी शोरूम में ‘डीएक्ससी’ लॉन्च करने की वजह? जवाब-सीधे शब्दों में कहें तो हम बाजार की मांग को पूरा कर रहे हैं। ठीक उसी तरह जैसे हमने कोविड के बाद गोल्ड कैरेटमीटर की स्थापना की। जब लोग हीरे का हार खरीदते हैं, तो वे मानसिक शांति भी चाहते हैं कि स्टोर हीरों की गुणवत्ता को प्रमाणित करे। एक हार में कई पत्थर होते हैं और जरूरी नहीं कि सभी एक ही मानक के हों। ग्राहकों की मदद के लिए हमने खुद ये मशीनें बनाना शुरू किया है। अभी 50 स्टोर्स में यह सुविधा है, जल्द ही 200 और इस साल के अंत तक सभी स्टोर्स में यह सुविधा उपलब्ध होगी।

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टाइटन की पहल: सीईओ नारायण बोले-हम भरोसा करने के लिए कहते नहीं, बल्कि इसे साबित करते हैं