जो कभी देते थे ताने आज वही बजा रहे हैं तालियां, अंबाला की अमरजीत कौर ने किसानी से बदली अपने परिवार की किस्मत Haryana News & Updates

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अंबाला: हरियाणा के अंबाला जिले के अधोई गांव की अमरजीत कौर ने हालातों से हार मानने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बना लिया. पिता की गंभीर बीमारी के बाद उन्होंने पढ़ाई के साथ खेत की जिम्मेदारी संभाली और ट्रैक्टर चलाकर परिवार की आजीविका को थामे रखा. 18 वर्षों से वे बहुफसली खेती कर न केवल घर संभाल रही हैं बल्कि यह भी साबित कर रही हैं कि खेती और जिम्मेदारी दोनों में बेटियां किसी से कम नहीं हैं.दरअसल, किसान अमरजीत कौर ने साल 2007 में अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए खेती करना शुरू किया था, लेकिन आज वह कई बेटियों की लंबी उड़ान का प्रेरणा स्त्रोत बन रही है.

पिता पर था कर्ज

वहीं इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अमरजीत कौर ने बताया कि साल 2007 में जब वह अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई करना शुरू हुई थी, तब उस दौरान उनके पिता को एक बीमारी हो गई थी. उस समय उनके पिता ने बड़ी बहन का विवाह किया था, जिसके कारण काफी कर्जा उनके ऊपर चढ़ गया था. उन्होंने बताया कि ऐसे में परिवार की आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण उस दौरान उन्होंने अपने पिता की खेती को संभालते हुए परंपरागत खेती करना शुरू किया था.

उन्होंने कहा कि वैसे तो उनका एक छोटा भाई भी था, लेकिन भाई की इच्छा थी कि खूब पढ़ाई करके वह एक सरकारी नौकरी करें, इसलिए उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ साथ कृषि को भी अपनाया था.

खेती को लेकर लोगों ने कसे तंज

उन्होंने बताया कि उनके पिता को शुरू से ही अपनी जमीन से काफी ज्यादा प्यार था, इसलिए रिश्तेदारों के कहने के बाद भी उन्होंने अपनी जमीन नहीं बेची और उसपर ही खेती करते हुए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की. उन्होंने कहा कि जब उनके पिता पंजाब से अंबाला आए थे तब उनके पास केवल 2.5 एकड़ जमीन थी, लेकिन मेहनत के दम पर उन्होंने 38 एकड़ जमीन खरीदी थीं. उन्होंने बताया कि शुरू में लोगों के द्वारा उनपर काफी ज्यादा तंज कसें जाते थे, लेकिन उन बातों की परवाह किए बिना वह खेती करना शुरू हो गई थी.

18 सालों से कर रही हैं खेती

उन्होंने कहा कि खेती करने के लिए मैंने खुद ट्रैक्टर चलाना सीखा था, जिसके बाद धीरे-धीरे खेत में जुताई, दवा डालना ओर उसका रखरखाव रखना शुरू किया. उन्होंने बताया कि खेती करते हुए उन्हें लगभग 18 वर्ष हो गई है ओर आज पिता के मौत के बाद भी वह खेती कर रही है और उनके द्वारा कई कृषि यंत्र भी इसी खेती के दम पर खरीदे गए हैं. उन्होंने कहा कि आज के समय में वह मल्टी क्रॉप फार्मिंग कर रही है, जिसमें गेहूं,धान, गन्ना ओर दालें, सूरजमुखी जैसी प्रमुख फसलें शामिल है.

जमीन हमारी मां होती है

उन्होंने बताया कि खेती करते हुए अपने छोटे भाई की पढ़ाई भी पूरी करवाई थी और आज वह सरकारी नौकरी चंडीगढ़ में कर रहा है, इसके साथ ही छोटे भाई की शादी भी उन्होंने खूब धूमधाम से करवाई थी. वहीं अमरजीत कौर ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि आजकल युवा जमीन बेचकर विदेश चले जाते हैं. ऐसे में मेरी उनसे अपील है की जमीन ना बेच, क्योंकि यह जमीन हमारी मां होती है. इसलिए इस जमीन पर ही खेती करके अच्छा पैसा कमाया जा सकता है और इसके साथ ही हम अपनी एक अलग पहचान बना सकते हैं.

वहीं अमरजीत कौर के हौसले ने बता दिया की बेटियां बेटों से कम नहीं होती है. अगर वह चाह ले तो जीवन में किसी भी काम को आसानी से कर सकती है और उनके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं होता है.

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