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कीव/ मास्को4 मिनट पहले
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की आज लंदन में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से मुलाकात करेंगे। कीव इंडिपेंडेंट के मुताबिक इस बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फेडरिक मर्त्ज भी शामिल होंगे।
इस बैठक की मेजबानी ब्रिटिश PM स्टार्मर कर रहे हैं। यह मीटिंग बंद कमरे में होगी। ये चारों नेता यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी और अमेरिका के नेतृत्व वाली शांति प्लान पर चर्चा करेंगे।
यूरोपीय नेताओं का कहना है कि इस प्लान में यूक्रेन को जमीन छोड़ने को मजबूर किया जा सकता है। यूरोपीय देशों को डर है कि इस प्लान से रूस को ज्यादा फायदा है और भविष्य में रूस फिर हमला कर सकता है।

ट्रम्प, जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं ने 18 अगस्त को अमेरिका में बैठक की थी।
लंदन में काउंटर-प्लान बना सकते हैं यूरोपीय नेता
चारों नेता अमेरिकी प्लान में बड़े बदलाव करवाने की रणनीति बनाएंगे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सैन्य गारंटी और भविष्य में रूस के हमले रोकने के ठोस उपायों पर जोर दिया जाएगा।
ब्रिटेन के मंत्री पैट मैकफेडन ने बैठक को लेकर कहा था कि हमें कागज की शांति नहीं, जमीन पर शांति चाहिए। यूरोप का अपना काउंटर-प्लान आने की पूरी संभावना है।
उन्होंने आगे कहा- युद्ध का तीसरा साल चल रहा है और आज का दिन तय करेगा कि 2026 में यूक्रेन का नक्शा कैसा होगा।
यूक्रेन जंग रोकने ट्रम्प का 28 पॉइंट प्लान
अमेरिका ने 21 नवंबर को 28 प्वाइंट का पहला शांति प्लान पेश किया था। प्लान के मुताबिक यूक्रेन को अपना लगभग 20% हिस्सा रूस को देना होगा। इसमें पूर्वी यूक्रेन का डोनबास का इलाका शामिल है। यूक्रेन मात्र 6 लाख जवानों वाली सेना ही रख सकेगा।
नाटो में यूक्रेन की एंट्री नहीं होगी। नाटो सेनाएं यूक्रेन में नहीं रहेंगी। प्लान में कहा गया है कि रूस द्वारा शांति प्रस्तावों को मानने पर उस पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटा दिया जाएगा। साथ ही यूरोप में जब्त की गई लगभग 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति भी डीफ्रीज होगी।
ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्त्ज ने शुक्रवार को कहा कि उनका देश यूक्रेन के साथ हैं।

यूरोप बोला- अमेरिका का शांति प्लान रूस के लिए फायदेमंद
अमेरिका के शांति प्लान में यूक्रेनी सुरक्षा गारंटियों का जिक्र है, लेकिन साथ ही यूक्रेन से जमीन छोड़ने, सेना की संख्या कम करने और नाटो को यूक्रेन में सैनिक भेजने से रोकने की भी मांग की गई है।
यूरोप ने इसे रूस के लिए फायदेमंद बताते हुए खारिज कर दिया और 23 नवंबर को जेनेवा में अपना 19 प्वाइंट काउंटर-प्लान बनाया। यह योजना अब 20 सूत्री हो गई है।
ट्रम्प ने इसपर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि जेलेंस्की ने अभी तक अमेरिका के प्लान को पूरी तरह नहीं पढ़ा है।
ट्रम्प ने कहा – “रूस तो मान रहा है, लेकिन जेलेंस्की नहीं।” इसके बाद ट्रम्प ने 7 दिसंबर को कहा कि “जेलेंस्की के लोग तो प्लान को पसंद कर रहे हैं, रूस भी मान रहा है, लेकिन जेलेंस्की तैयार नहीं लग रहे।
यूक्रेन-अमेरिका वार्ता बिना ठोस नतीजा खत्म
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खास दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर 2 दिसंबर को रूस गए थे, वहां पुतिन से 5 घंटे बात की।
इसके बाद यूक्रेनी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच 4-5 दिसंबर को फ्लोरिडा के मियामी में बातचीत हुई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूत और सलाहकार स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर भी इसमें शामिल हैं।
जेलेंस्की ने कहा कि विटकॉफ और कुशनर से उन्होंने फोन पर बातचीत की। जेलेंस्की ने बातचीत को सकारात्मक बताया।
दोनों पक्षों ने सुरक्षा गारंटी के ढांचे पर सहमति जताई, लेकिन कोई ठोस समझौता अभी नहीं हुआ। जेलेंस्की ने कहा, “असली शांति तभी होगी, जब रूस गंभीरता दिखाएगा।”

जानिए आखिर यूरोप क्यों चिंतित है…
अमेरिका चाहता है कि यूक्रेन पूर्वी इलाकों (दोनेत्स्क-लुहांस्क) से अपनी सेना हटा ले और जापोरिज्जिया न्यूक्लियर प्लांट रूस को सौंप दे।
यूरोप कह रहा है “ऐसा हुआ तो रूस 5-10 साल बाद फिर हमला कर देगा।” यूरोप को डर है कि यह प्लान रूस को फायदा पहुंचाते हुए यूक्रेन को कमजोर कर देगा, जिसका असर पूरे महाद्वीप की सुरक्षा पर पड़ेगा।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति बोले- रूस शांति नहीं चाहता
मैक्रों ने रूसी हमलों की कड़ी निंदा की और कहा, ‘रूस शांति नहीं चाहता, वह लगातार उकसावे वाली कार्रवाई कर रहा है। हमें रूस पर और दबाव डालना होगा, ताकि वह शांति के लिए मजबूर हो।’ मैक्रों ने जेलेंस्की से फोन पर बात कर एकजुटता जताई।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा कि यूक्रेन अपना भविष्य खुद तय करेगा और शांति सेना यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी देने में अहम भूमिका निभाएगी। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पहले ही कह दिया है कि यूक्रेन में तैनात कोई भी विदेशी सैनिक हमले का शिकार हो सकते हैं।
मैक्रों बोले थे- अमेरिका यूक्रेन को मजबूर कर सकता है
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका, यूक्रेन को धोखा दे सकता है। जर्मन अखबार डेर श्पीगल के मुताबिक 1 दिसंबर को यूरोपीय नेताओं की एक सीक्रेट वीडियो कॉल लीक हो गई थी।
इसमें जर्मनी के चांसलर फेडरिक मर्त्ज, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब, नाटो के महासचिव मार्क रूटे, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की शामिल थे।
इस दौरान मैक्रों ने शक जताया था कि अमेरिका बिना मजबूत सुरक्षा गारंटी दिए यूक्रेन को क्षेत्र छोड़ने के लिए मजबूर कर सकता है। इस कॉल की रिकॉर्डिंग अखबार के पास पहुंची थी।
नेताओं ने साफ कहा कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दो खास लोगों अमेरिकी राजदूत स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर पर जरा भी भरोसा नहीं है।
जर्मनी के चांसलर मर्ज ने जेलेंस्की से कहा, ‘आने वाले दिनों में बहुत सावधान रहिए, आपके साथ और हमारे साथ खेल खेला जा रहा है।’ फिनलैंड के राष्ट्रपति स्टब और नाटो चीफ रूटे ने भी यही बात दोहराई कि जेलेंस्की को इन दोनों अमेरिकियों के साथ अकेला नहीं छोड़ा जा सकता।
यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय ने इस पूरी खबर को झूठी और गलत जानकारी बताया।
अमेरिकी प्लान यूरोप को साइडलाइन कर रहा है
ट्रम्प प्रशासन के 28-पॉइंट का शुरुआती प्लान वार्ताओं में यूरोप को बाहर रखा गया, जो यूरोपीय नेताओं को साइडलाइन महसूस करा रहा है।
गार्जियन के अनुसार, यूरोप और नाटो के पास न तो हथियारों की कमी है और न ही धन की, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने से रोका जा रहा है।
यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि यूरोप को वार्ताओं में वापस लौटना होगा, क्योंकि कई मुद्दे ईयू के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने जोर दिया कि “कोई भी शांति योजना से पहले हत्याओं को रोका जाना चाहिए, न कि भविष्य के संघर्ष के बीज बोने चाहिए।”
दूसरी ओर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने यूरोप को शांति में बाधा बताया था। पुतिन ने 2 दिसंबर को यूरोपीय देशों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर यूरोप ने रूस के खिलाफ युद्ध शुरू किया, तो रूस पूरी तरह से जवाब देने के लिए तैयार है। यह यूरोपीय देशों की चिंताओं को और बढ़ा रहा है।

ट्रम्प और जेलेंस्की ने 17 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में बंद कमरे में मुलाकात की थी।
पुतिन बोले- यूरोप के साथ युद्ध हुआ तो हालात अलग होंगे
पुतिन ने कहा कि रूस यूरोप से युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर यूरोप युद्ध शुरू करता है तो मामला इतना जल्दी खत्म होगा कि बातचीत करने वाला कोई नहीं बचेगा।
पुतिन ने दावा किया कि यूक्रेन में रूस पूरी तरह युद्ध नहीं लड़ रहा है, बल्कि सर्जिकल ऑपरेशन जैसी सीमित कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर यूरोप के साथ सीधा युद्ध हुआ तो हालात अलग होंगे और रूस पूरी ताकत से जवाब देगा।
दावा- 2029 तक नाटो पर हमला कर सकता है रूस
जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वेडफुल ने 25 नवंबर को दावा किया रूस अगले चार साल में किसी NATO देश पर हमला कर सकता है।
वेडफुल ने बताया कि जर्मन खुफिया एजेंसियों के मुताबिक रूस 2029 तक NATO के खिलाफ युद्ध की तैयारी कर रहा है। उनका कहना है कि रूस की महत्वाकांक्षा सिर्फ यूक्रेन तक सीमित नहीं है। उसने पिछले कुछ सालों में अपनी सैन्य ताकत और हथियार उत्पादन काफी बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि रूस ने अपनी अर्थव्यवस्था और समाज को काफी हद तक युद्ध के हिसाब से ढाल दिया है। साथ ही, रूस जरूरत से ज्यादा सैनिकों की भर्ती कर रहा है। लगभग हर महीने एक नई डिविजन तैयार की जा रही है।
ब्रिटेन-फ्रांस “कोएलिशन ऑफ द विलिंग” नाम की नई सेना बना रहे हैं जो युद्ध खत्म होने के बाद यूक्रेन में तैनात रहेगी ताकि रूस दोबारा न आए। जर्मनी अभी सैनिक भेजने को तैयार नहीं है।

वेडफुल ने चेतावनी दी है कि रूस की ये नई सैन्य यूनिट्स् यूरोपीय संघ और NATO को निशाना बना सकती हैं।
2022 से जारी रूस-यूक्रेन जंग
रूस-यूक्रेन जंग फरवरी, 2022 में शुरू हुआ था। दोनों देशों के बीच जंग की बड़ी वजह रूस का यूक्रेनी जमीन पर कब्जा है।
रूस ने यूक्रेन के लगभग 20% क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है। युद्ध के कारण हजारों नागरिक और सैनिक मारे गए हैं और लाखों यूक्रेनियन विस्थापित हुए हैं। जून 2023 तक, करीब 80 लाख यूक्रेनी लोग देश छोड़कर भाग चुके हैं।
ट्रम्प ने युद्ध को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के नेताओं के साथ बैठक की थी। हाल ही में, उन्होंने पुतिन के साथ अलास्का में बैठक की, जो 80 वर्षों में किसी रूसी नेता की पहली अलास्का यात्रा थी।
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जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं की आज लंदन में बैठक: यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी पर चर्चा; यूरोपीय लीडर्स बोले- अमेरिकी पीस-प्लान रूस को फायदा पहुंचा रहा


