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जानें कौन हैं जेफरी गोल्डबर्ग? जिन्हें गलती से मिला हूतियों पर हमले का अमेरिकी प्लान – India TV Hindi Today World News

जानें कौन हैं जेफरी गोल्डबर्ग? जिन्हें गलती से मिला हूतियों पर हमले का अमेरिकी प्लान – India TV Hindi Today World News

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Image Source : FILE
‘द अटलांटिक’ के एडिटर-इन-चीफ जेफरी गोल्डबर्ग।

वॉशिंगटन: अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और अन्य वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों द्वारा पिछले महीने यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हमलों की जानकारी लीक होने को लेकर एक बड़ी गलती का खुलासा हुआ है। अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने माना है कि हूती विद्रोहियों के खिलाफ हवाई हमलों के समन्वय के लिए इस्तेमाल किए गए एक ग्रुप चैट में गलती से ‘द अटलांटिक’ के एडिटर-इन-चीफ जेफरी गोल्डबर्ग को उनकी जानकारी के बिना शामिल कर लिया गया था। हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने जानकारियों के लीक होने से इनकार किया है।

‘Signal’ पर बने ग्रुप में शामिल थे गोल्डबर्ग

गोल्डबर्ग ने ‘द अटलांटिक’ पत्रिका के लिए एक लेख में लिखा कि ‘अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी लीडर्स ने मुझे यमन में होने वाले सैन्य हमलों को लेकर बनाए गए एक ग्रुप चैट में शामिल किया। मुझे नहीं पता था कि यह सच हो सकता है। इसके बाद बम गिरने लगे।’ गोल्डबर्ग को ‘Signal’ पर बनाए गए ग्रुप में शामिल किया गया था, जो एक ओपन-सोर्स मैसेजिंग ऐप है। सोमवार को प्रकाशित अटलांटिक की स्टोरी ‘The Trump Administration Accidentally Texted Me Its War Plans’ के मुताबिक, उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के NSA माइकल वाल्ट्ज के रूप में अपनी पहचान बताने वाले किसी शख्स के द्वारा जोड़ा गया था।

‘मुझे 2 घंटे पहले ही हमले के बारे में पता था’

गोल्डबर्ग के मुताबिक, ग्रुप में हो रही बातचीत में ‘यमन पर आगामी हमलों के संचालन संबंधी विवरण शामिल थे, जिसमें लक्ष्यों, अमेरिका द्वारा तैनात किए जाने वाले हथियारों और हमले के अनुक्रम के बारे में जानकारी शामिल थी।’ इसमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अलावा अन्य लोगों के संदेश भी शामिल थे। गोल्डबर्ग ने दावा किया कि ग्रुप चैट में प्राप्त संदेशों के चलते सरकारी अधिकारियों द्वारा उन्हें सार्वजनिक किए जाने से 2 घंटे पहले ही उन्हें यमन पर किए जाने वाले हमलों और बम विस्फोटों के बारे में पता चल गया था।

गोल्डबर्ग ने कहा, ‘यदि उनमें निहित जानकारी को अमेरिका के किसी विरोधी ने पढ़ा होता, तो शायद इसका इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य और खुफिया कर्मियों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता था, खासकर मध्य पूर्व में, जो सेंट्रल कमांड के जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में है।’ इस महीने की शुरुआत में, अमेरिकी सेना ने यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक आक्रामक अभियान शुरू किया, जो एक आतंकवादी संगठन है। बता दें कि हूतियों ने पिछले एक साल से भी ज्यादा समय से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को अवरुद्ध कर रखा है।

नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने तोड़ी चुप्पी

इस बीच अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारियों ने मामले की जांच राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को सौंप दी है। NSC के प्रवक्ता ब्रायन ह्यूजेस ने एक बयान में स्वीकार किया कि ‘रिपोर्ट की गई मैसेज थ्रेड प्रामाणिक प्रतीत होती है।’ उन्होंने कहा कि वे जांच कर रहे हैं कि गलती से एक फोन नंबर कैसे जुड़ गया। ह्यूजेस ने कहा कि बातचीत में ‘वरिष्ठ अधिकारियों के बीच गहन और विचारशील पॉलिसी कोऑर्डिनेशन पर बात हुई है।’ हालांकि, उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि हूती विद्रोहियों के खिलाफ जारी ऑपरेशन की निरंतर सफलता के बीच अमेरिका के सैनिकों या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कोई जोखिम न हो।

अमेरिका के किन नियमों की हुई अनदेखी?

हो सकता है कि गोल्डबर्ग को गलती से या जानबूझकर ग्रुप चैट में शामिल किया गया, लेकिन माना जा रहा है कि अधिकारियों ने संवेदनशील डेटा, गुप्त सैन्य जानकारी और सरकारी रिकॉर्ड रखरखाव को साझा करने के नियमों का उल्लंघन किया है। गोल्डबर्ग के मुताबिक, वरिष्ठ नेताओं ने ट्रंप के मध्य पूर्व दृष्टिकोण के बारे में चिंता व्यक्त की और क्षेत्र में यूरोपीय सहयोगियों की निष्क्रियता पर अफसोस जाहिर किया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि हेगसेथ ने ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल और एक पत्रकार को अनजाने में शामिल करने के बावजूद ग्रुप में लोगों को प्राइवेसी को लेकर आश्वस्त किया।

कौन हैं जेफरी गोल्डबर्ग?

जेफरी गोल्डबर्ग एक जाने माने पत्रकार हैं। ‘द अटलांटिक’ के लिए काम करने से पहले भी गोल्डबर्ग का करियर उतना ही शानदार रहा है। उन्होंने मध्य पूर्व और फिर वॉशिंगटन में संवाददाता के रूप में ‘द न्यू यॉर्कर’ के लिए काम किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने ‘द न्यू यॉर्क टाइम्स’ मैगज़ीन के लिए 15 कवर स्टोरी पब्लिश की। मीडिया में उनका करियर ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ के लिए एक पुलिस रिपोर्टर के रूप में शुरू हुआ था।

एक लेखक के रूप में गोल्डबर्ग की पुस्तक ‘प्रिज़नर्स: ए स्टोरी ऑफ़ फ्रेंडशिप एंड टेरर’ अंतरराष्ट्रीय संघर्षों, कूटनीतिक प्रयासों और सुरक्षा चुनौतियों में उनकी गहरी रुचि को दर्शाती है। बर्लिन में अमेरिकन अकादमी में फेलो होने के साथ-साथ उन्होंने कई सम्मान हासिल किए हैं, जिनमें ओवरसीज़ प्रेस क्लब अवार्ड, डैनियल पर्ल अवार्ड और रिपोर्टिंग के लिए नेशनल मैगज़ीन अवार्ड शामिल हैं।

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