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10 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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ट्रेन से यात्रा करना काफी किफायती और सुविधाजनक होता है। लेकिन लंबा सफर अक्सर सेहत के लिए चुनौती बन जाता है। घंटों की यात्रा और रूटीन का डिस्टर्ब होना शरीर पर असर डालता है।
कई बार नींद पूरी नहीं हो पाती है। हाइजीन की कमी और भीड़भाड़ भी परेशानी बढ़ाती है। इन वजहों से यात्रा के दौरान बीमार पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। यात्रा में थोड़ी-सी लापरवाही भी बड़ी समस्या बन सकती है।
फूड पॉइजनिंग, बुखार या सिरदर्द जैसी दिक्कतें सफर काे खराब कर देती हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि अगर अचानक ट्रेन में तबीयत बिगड़ जाए तो तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए। इस स्थिति में भारतीय रेलवे कैसे मदद करता है।
चलिए, आज जरूरत की खबर में हम ट्रेन में सुरक्षित यात्रा के आसान टिप्स बताएंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- स्वस्थ और सुरक्षित यात्रा के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
- अगर ट्रेन में बीमार हो जाएं तो तुरंत क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट-
नवल अग्रवाल, जनसंपर्क अधिकारी, भोपाल रेल मंडल
डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर
सवाल- अगर ट्रेन में सफर करते समय अचानक तबीयत खराब हो जाए तो क्या करना चाहिए?
जवाब- ट्रेन में अचानक तबीयत खराब होने पर घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाएं। जैसेकि-
- अगर पास में दवा हो तो तुरंत लें।
- दवा न हो तो TTE, गार्ड या ऑन-बोर्ड स्टाफ को तुरंत बताएं।
- वे ट्रेन या स्टेशन की फर्स्ट-एड-किट से दवा की व्यवस्था करते हैं।
- इस दौरान पानी या ORS पीते रहें, ताकि डिहाइड्रेशन न हो।
- जरूरत पड़ने पर 139 पर कॉल कर मेडिकल इमरजेंसी की सूचना दें।
- जरूरत के मुताबिक, ट्रेन या नजदीकी स्टेशन पर डॉक्टर की व्यवस्था की जाती है।
- गंभीर हालत में TTE ट्रेन को इमरजेंसी स्टॉप दे सकते हैं।
समय पर सही कदम उठाने से स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- मेडिकल इमरजेंसी नंबर 139 पर कॉल करने से क्या मदद मिलती है?
जवाब- इस नंबर पर कॉल करने से रेलवे के इमरजेंसी हेल्प सेंटर से संपर्क हो जाता है। सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारी मामले की गंभीरता को समझते हैं। स्थिति के मुताबिक, नजदीकी स्टेशन पर डॉक्टर, मेडिकल टीम या एंबुलेंस की व्यवस्था की जाती है।
जरूरत पड़ने पर ट्रेन स्टाफ को अलर्ट किया जाता है। ट्रेन के स्टेशन पहुंचने से पहले ही मेडिकल सहायता तैयार रखी जाती है। इससे समय पर इलाज संभव हो पाता है और यात्री की हालत बिगड़ने से रोकी जा सकती है।
सवाल- ट्रेन में डॉक्टर की मदद कैसे और कहां मिल सकती है?
जवाब- इसके लिए सबसे पहले आप TTE, ट्रेन गार्ड या ऑन-बोर्ड स्टाफ को अपनी समस्या बताएं। वे पैसेंजर लिस्ट देखकर पता करते हैं कि ट्रेन में कोई डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल यात्रा कर रहा है या नहीं। जरूरत पड़ने पर उनकी सहायता ली जाती है।
इसके अलावा इमरजेंसी नंबर 139 पर कॉल करने से रेलवे अगले स्टेशन पर डॉक्टर या मेडिकल टीम की व्यवस्था करता है। कई बड़े स्टेशनों पर रेलवे अस्पताल या अधिकृत डॉक्टर पहले से मौजूद रहते हैं, जो ट्रेन के पहुंचते ही मरीज को प्राथमिक इलाज देते हैं। गंभीर स्थिति में यात्री को नजदीकी अस्पताल भी रेफर किया जा सकता है।

सवाल- ट्रेन या स्टेशन पर मेडिकल बॉक्स कहां उपलब्ध होता है और इसे कैसे एक्सेस करें?
जवाब- भारतीय रेलवे द्वारा लंबी दूरी की ट्रेन और स्टेशन पर मेडिकल बॉक्स उपलब्ध कराया जाता है। यह बॉक्स आमतौर पर ट्रेन के गार्ड, TTE या ट्रेन सुपरिटेंडेंट के पास होता है। जरूरत पड़ने पर यात्री सीधे इनसे संपर्क करके मेडिकल बॉक्स एक्सेस कर सकते हैं।
इसके अलावा प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर स्टेशन मास्टर के पास भी मेडिकल बॉक्स होता है। ट्रेन में किसी यात्री की तबीयत खराब होने पर ऑन-बोर्ड स्टाफ मेडिकल बॉक्स से जरूरी दवाइयां, फर्स्ट एड या ऑक्सीजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। साथ ही, आगे की मेडिकल व्यवस्था भी करता है।
सवाल- क्या ट्रेन में सीरियस मरीज के लिए इमरजेंसी स्टॉप की सुविधा मिल सकती है?
जवाब- हां, ट्रेन में किसी यात्री की हालत गंभीर होने पर इमरजेंसी स्टॉप की सुविधा मिल सकती है। मेडिकल इमरजेंसी की जानकारी मिलते ही रेलवे अधिकारी स्थिति का आकलन करते हैं। जरूरत पड़ने पर ट्रेन को नजदीकी स्टेशन या उपयुक्त स्थान पर रोका जा सकता है।
सवाल- ट्रेन में यात्रा के दौरान बीमार न पड़ें, इसके लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
जवाब- इसके लिए थोड़ी सतर्कता और सही हाइजीन हैबिट्स अपनाना बहुत जरूरी है। साफ-सफाई और सही खानपान का ध्यान रखने से सफर सुरक्षित और आरामदायक रहता है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- ट्रेन यात्रा के लिए कौन-से जरूरी सामान साथ रखने चाहिए?
जवाब- ट्रेन यात्रा को सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए कुछ जरूरी सामान साथ रखना बहुत मददगार होता है। ये सामान न सिर्फ सफर को आसान बनाते हैं, बल्कि अचानक बीमार पड़ने या असुविधा की स्थिति में भी काम आते हैं।

सवाल- ट्रेन यात्रा के दौरान क्या खाने से फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ता है?
जवाब- अक्सर लोग ट्रेन यात्रा में फास्ट फूड या स्टेशन पर मिलने वाले ऑयली/स्पाइसी फूड खाते हैं। इससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर खुले में रखा और बासी खाना भी संक्रमण का कारण बन सकता है। इसलिए सफर में ऐसे फूड्स से बचना चाहिए, जो जल्दी खराब हो जाते हैं या जिनकी हाइजीन पर भरोसा न हो।
सवाल- ट्रेन यात्रा में फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं?
जवाब- इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि-
- सफर के दौरान हल्का, ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन ही करें।
- खुले में रखा या बासी खाना न खाएं।
- कच्चे/अधपके अंडे और मांस न खाएं।
- अनपाश्चराइज्ड दूध और उससे बने प्रोडक्ट न लें।
- खुले में रखे कटे फल खाने से बचें।
- केवल सीलबंद बोतल का पानी पिएं।
- खाने से पहले हाथ धोएं या सैनिटाइजर यूज करें।
- ट्रेन में खाना मंगाते समय अधिकृत और भरोसेमंद फूड सर्विस चुनें।
- पुराना, बासी खाना न खाएं।
सवाल- ट्रेन ट्रैवल के दौरान फर्स्ट-एड बॉक्स में कौन-कौन सी दवाएं होनी चाहिए?
जवाब- ट्रेन ट्रैवल के दौरान अपने साथ फर्स्ट-एड किट जरूर रखें। इससे छोटी-मोटी क्राइसिस को आसानी से संभाला जा सकता है। इसमें कुछ चीजें जरूर शामिल करें। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- ट्रेन यात्रा के दौरान बुजुर्गों, बच्चों या बीमार यात्रियों का खास ध्यान कैसे रखें?
जवाब- ट्रेन यात्रा के दौरान बुजुर्गों, बच्चों और बीमार यात्रियों को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है। थोड़ी-सी सतर्कता और सही व्यवस्था से उनका सफर सुरक्षित और आरामदायक बनाया जा सकता है। जैसेकि-
- समय पर दवाइयां देना न भूलें।
- पर्याप्त पानी और ORS पिलाते रहें।
- हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन दें।
- पर्याप्त आराम और नींद का ध्यान रखें।
- मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं।
- जरूरत पड़ने पर ट्रेन स्टाफ या इमरजेंसी नंबर 139 पर तुरंत संपर्क करें।
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