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8 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के मुताबिक, भारत में करीब 10.4 करोड़ लोग ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) से पीड़ित हैं। यह आंकड़ा साल 2023 का है। निश्चित ही यह संख्या अब और भी बढ़ चुकी होगी।
स्लीप एपनिया को अक्सर लोग सिर्फ खर्राटों की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि हकीकत ये है कि यह बीमारी धीरे-धीरे हार्ट, ब्रेन और मेटाबॉलिज्म समेत ओवरऑल हेल्थ को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।
स्लीप एपनिया के लिए अभी तक कोई डेडिकेटेड दवा नहीं है। आमतौर पर इसका इलाज लाइफस्टाइल में बदलाव और कुछ खास मशीनों के जरिए किया जाता है। ऐसे में अगर इसका इलाज दवा से संभव हो जाए तो यह मेडिकल साइंस में एक बड़ी क्रांति होगी। अमेरिका में पिछले कुछ सालों से इस पर रिसर्च चल रही थी। वहां के डॉक्टरों ने एक ओरल पिल बनाई है, जो थर्ड फेज क्लिनिकल ट्रायल के बाद अप्रूवल के इंतजार में है।
इस दवा को फिलहाल अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की मंजूरी का इंतजार है। अगर इसे अप्रूवल मिल जाता है तो यह पहली ऐसी दवा होगी, जो स्लीप एपनिया के इलाज के लिए होगी।
तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम इस ओरल पिल के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- अब तक स्लीप एपनिया का इलाज किन तरीकों से किया जाता रहा है?
- स्लीप एपनिया के इलाज में यह दवा कैसे कारगर होगी?
एक्सपर्ट: डॉ. संदीप कटियार, कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर
सवाल- स्लीप एपनिया क्या है?
जवाब- यह एक गंभीर स्लीप डिसऑर्डर है, जिसमें सोते समय सांस बीच-बीच में रुक जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि नींद के दौरान गले की मांसपेशियां कम एक्टिव होती हैं। कई बार कुछ देर के लिए सांस नली बंद भी हो जाती है। इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और नींद बार-बार टूटती है। अक्सर व्यक्ति को इसका एहसास नहीं होता है।
लंबे समय तक इसे इग्नोर करने पर हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक, डायबिटीज और ब्रेन से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। यह सिर्फ खर्राटों की समस्या नहीं, बल्कि एक बड़ा हेल्थ रिस्क है। इसके बारे में हम पहले भी कई स्टोरी में बात कर चुके हैं। विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें।
सवाल- स्लीप एपनिया की जिस दवा को मंजूरी का इंतजार है, वह कैसे काम करेगी?
जवाब- यह एक ओरल पिल है, जिसे रात में सोने से पहले लिया जाएगा। इसे खासतौर पर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के इलाज के लिए बनाया गया है। यह दवा गले की मांसपेशियों को एक्टिव बनाए रखती है, ताकि नींद के दौरान सांस की नली ढीली पड़कर बंद न हो।
यह दवा शरीर के अंदर उस प्रक्रिया को मजबूत करती है, जो एयर-वे को खुला रखती है। एक तरह से ये दवा अंदरूनी सिस्टम को सपोर्ट करती है। इससे सांस लेने की प्रक्रिया सामान्य बनी रहती है।

सवाल- यह दवा स्लीप एपनिया के इलाज में किस तरह कारगर होगी?
जवाब- यह दवा नींद के दौरान गले की मांसपेशियों को एक्टिव रखकर सांस नली को बंद होने से बचाएगी। इससे सांस रुकने की समस्या कम होगी। साथ ही ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होगी और स्लीप एपनिया की गंभीरता भी घटेगी। इस दवा से स्लीप एपनिया के कारण होने वाले कॉम्प्लिकेशंस का रिस्क कम हो जाएगा।
सवाल– मेडिकल साइंस और डॉक्टरों का इस दवा के बारे में क्या कहना है?
जवाब- मेडिकल साइंस और डॉक्टर्स इस दवा को स्लीप एपनिया के इलाज के लिए एक नई उम्मीद मान रहे हैं। यह पिल उन मरीजों के लिए खासकर फायदेमंद हो सकती है, जो CPAP मशीन पर निर्भर हैं। CPAP (कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर) मशीन मास्क के जरिए हवा देकर सांस नली को खुला रखने में मदद करती है। हालांकि फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की मंजूरी और इसका असर देखने के बाद ही इस दवा पर फैसला किया जा सकेगा।
सवाल- अभी तक स्लीप एपनिया का इलाज कैसे किया जाता रहा है?
जवाब- अभी तक स्लीप एपनिया का इलाज मुख्य रूप से डिवाइस और लाइफस्टाइल बदलाव पर आधारित रहा है। CPAP मशीन इसमें प्रमुख है। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें–

सवाल- नई दवा स्लीप एपनिया को ठीक करने में कितने प्रतिशत कारगर है?
जवाब- इस दवा ने फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में स्लीप एपनिया की गंभीरता में लगभग 47% तक कमी दिखाई है। यानी ट्रायल के नतीजों के मुताबिक, यह दवा स्लीप एपनिया को कंट्रोल करने में लगभग आधे तक असरदार साबित हुई है, जो मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
सवाल- क्या यह पहली दवा है, जो खासतौर पर स्लीप एपनिया के लिए बनी है?
जवाब- हां, अगर इसे FDA से मंजूरी मिल जाती है तो यह पहली ऐसी दवा होगी, जो खासतौर पर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के इलाज में इस्तेमाल की जाएगी।

सवाल- क्या इस दवा के कोई साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं?
जवाब- क्लिनिकल ट्रायल में इस दवा के साइड इफेक्ट ज्यादा गंभीर नहीं पाए गए हैं। कुछ मरीजों में मुंह सूखने और नींद आने में थोड़ी दिक्कत जैसी हल्की समस्याएं देखी गईं। फिलहाल कोई बड़ा या खतरनाक साइड इफेक्ट सामने नहीं आया है। हालांकि FDA की मंजूरी और लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
सवाल- पारंपरिक रूप से स्लीप एपनिया कंडीशन में CPAP मशीन का इस्तेमाल किया जाता रहा है। क्या यह दवा मशीन का विकल्प बन सकती है?
जवाब- फिलहाल डॉक्टर इसे CPAP मशीन का विकल्प मानने की बजाय इलाज का एक नया तरीका मान रहे हैं। CPAP आज भी एक असरदार इलाज है, लेकिन अक्सर मरीज इसे रेगुलर इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। इसलिए यह दवा एक बेहतर और आसान विकल्प बन सकती है। भविष्य में यह दवा कई मरीजों के लिए मशीन पर निर्भरता कम कर सकती है। लेकिन पूरी तरह उसकी जगह लेगी या नहीं, यह आगे के मेडिकल डेटा पर निर्भर करेगा।
सवाल- ये दवा भारत में कब तक मिल सकती है?
जवाब- भारत में दवा तब तक उपलब्ध नहीं होगी, जब तक इसे अमेरिका या अन्य प्रमुख देशों में मंजूरी नहीं मिलती है। इसके भारत में मिलने का कोई निश्चित समय नहीं है। फिलहाल यह दवा अमेरिका में FDA अप्रूवल के लिए आवेदन के चरण में है। अगर इसे मंजूरी मिलती है तो यह 2027 की शुरुआत तक मार्केट में आ सकती है।
सवाल- अगर स्लीप एपनिया का समय पर इलाज न कराया जाए तो इससे कौन से हेल्थ रिस्क हो सकते हैं?
जवाब- स्लीप एपनिया कई अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

कुल मिलाकर, अभी हमें स्लीप एपनिया की इस दवा के लिए कुछ महीनों का इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि दवा कारगर साबित होने पर स्लीप एपनिया के मरीजों को इससे बड़ी राहत मिलेगी।
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