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8 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा
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एक मशहूर कहावत है- ‘ईट द रेनबो।’ इसका मतलब है, अपनी थाली में अलग-अलग रंगों वाले नेचुरल फूड शामिल करिए। ये सिर्फ कहावत नहीं बल्कि साइंटिफिक एडवाइज भी है। दरअसल, रेड स्ट्रॉबेरी, बैंगनी प्लम, हरी पत्तेदार सब्जियां और नीली ब्लूबेरी जैसे रंगीन फूड्स में पावरफुल एंटीऑक्सिडेंट ‘पॉलीफेनॉल्स’ होते हैं।
‘लंदन के किंग्स कॉलेज’ की हालिया स्टडी के मुताबिक, लंबे समय तक पॉलीफेनॉल रिच डाइट लेने से हार्ट हेल्दी रहता है। ये स्टडी पीयर रिव्यू मेडिकल जर्नल ‘BMC मेडिसिन’ में पब्लिश हुई है।
इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि-
- एंटीऑक्सिडेंट-रिच फूड हार्ट हेल्थ के लिए क्यों जरूरी हैं?
- क्या ऐसे फूड एजिंग की रफ्तार को धीमा कर सकते हैं?
- रोजाना कितनी मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट लेना पर्याप्त है?
एक्सपर्ट: डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ
सवाल- एंटीऑक्सिडेंट फूड क्या होते हैं?
जवाब- एंटीऑक्सिडेंट फूड को समझने के लिए पहले हमें दो बातें समझनी होंगी–
- एंटीऑक्सिडेंट
- फ्री रेडिकल्स
फ्री रेडिकल्स क्या है?
- फ्री रेडिकल्स यानी ऐसे अनस्टेबल मॉलिक्यूल, जो शरीर की कोशिकाओं को डैमेज करते हैं।
- आसान भाषा में इसे ऐसे समझें कि हमारे शरीर की सारी कोशिकाएं ऑक्सीजन की मदद से ऊर्जा बनाती हैं।
- इस प्रोसेस में कुछ इलेक्ट्रॉन छूटकर बाहर चले जाते हैं और शरीर को डैमेज करते हैं।
- ये जो छूटे हुए आवारा इलेक्ट्रॉन हैं, इन्हें ही फ्री रेडिकल्स कहते हैं।
- और ये शरीर को जो नुकसान पहुंचाते हैं, उसे ही ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस कहते हैं।
एंटीऑक्सिडेंट क्या है?
- ऊपर हमने समझा कि फ्री रेडिकल्स हमारे दुश्मन हैं। अब जो दोस्त हमें इन दुश्मनों से बचाता है, वो एंटीऑक्सिडेंट है।
- बेसिकली एंटीऑक्सिडेंट्स ऐसे कंपाउंड होते हैं, जो इन फ्री रेडिकल्स को मारते हैं और शरीर को ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस से बचाते हैं।
- ये कुछ हद तक तो शरीर में बनते हैं, लेकिन बड़ी मात्रा में फूड से ही प्राप्त होते हैं।
- जिन फूड्स में ये भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, उन्हें एंटीऑक्सिडेंट फूड कहते हैं।
- एंटीऑक्सिडेंट रिच फूड में विटामिन A, C, E, बीटा-कैरोटीन, लाइकोपीन, ल्यूटिन, सेलेनियम और पॉलीफेनॉल जैसे तत्व होते हैं।
सवाल- एंटीऑक्सिडेंट फूड शरीर में जाकर क्या काम करते हैं? यह हेल्थ के लिए क्यों जरूरी हैं?
जवाब- एंटीऑक्सिडेंट फूड सेल्स को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। ये लंबे समय तक सेहत की सुरक्षा करने वाली ढाल की तरह काम करते हैं।
पॉइंटर्स से समझते हैं कि ये शरीर में क्या काम करते हैं-
- ये इंफ्लेमेशन को कंट्रोल करते हैं।
- ब्लड वेसल्स को हेल्दी रखते हैं।
- ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं।
- सेल्स को डैमेज होने से बचाते हैं।
जब शरीर में एंटीऑक्सिडेंट का स्तर बैलेंस्ड रहता है, तो इम्यून सिस्टम भी ज्यादा प्रभावी ढंग से काम करता है।
सवाल- कौन–कौन से फूड एंटीऑक्सिडेंट रिच होते हैं?
जवाब- आइए ग्राफिक से जानते हैं कि किन फूड्स में एंटीऑक्सिडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

सवाल- एंटीऑक्सिडेंट फूड हार्ट हेल्थ के लिए क्यों जरूरी है?
जवाब- हार्ट डिजीज की शुरुआत अक्सर आर्टरीज में इंफ्लेमेशन और अंदरूनी डैमेज से होती है। जब शरीर में मौजूद LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल) ऑक्सिडाइज्ड हो जाता है, तो वह आर्टरीज की वॉल्स पर जमा होने लगता है। समय के साथ यही जमाव प्लाक बनाता है, जिससे ब्लड फ्लो प्रभावित होता है।
इसके कारण हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ जाता है। एंटीऑक्सिडेंट फूड इस पूरे प्रोसेस को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। इससे ब्लड फ्लो बेहतर रहता है और दिल पर दबाव कम पड़ता है।

सवाल- क्या एंटीऑक्सिडेंट रिच फूड इम्यूनिटी बढ़ाते हैं?
जवाब- हां, विटामिन C, E और बीटा-कैरोटीन जैसे तत्व संक्रमण से लड़ने वाली इम्यून सेल्स को मजबूत बनाते हैं।

सवाल- क्या एंटीऑक्सिडेंट्स रिच फूड एजिंग स्पीड को कम करते हैं?
जवाब- हां, एजिंग की मुख्य वजह ऑक्सिडेटिव डैमेज होती है। जब सेल्स बार-बार फ्री रेडिकल्स के संपर्क में आती हैं, तो उनके डीएनए, प्रोटीन और लिपिड्स (बॉडी फैट, जो एनर्जी स्टोर करने और शरीर के सही कामकाज में मदद करते हैं।) डैमेज होते हैं। इससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज होती है। एंटीऑक्सिडेंट रिच फूड इस डैमेज को कम करके सेल्स की उम्र बढ़ाने में मदद करते हैं। इससे एजिंग स्पीड कम होती है।
सवाल- एंटीऑक्सिडेंट्स सप्लीमेंट्स की जरूरत कब पड़ती है?
जवाब- अगर आप बैलेंस्ड डाइट लेते हैं तो आमतौर पर सप्लीमेंट की जरूरत नहीं पड़ती है। फिर भी कुछ लोगों को डॉक्टर सप्लीमेंट की सलाह दे सकते हैं। जैसे-
- जो प्रदूषित इलाके में रहते हैं।
- जो स्मोकिंग करते हैं।
- जिन्हें क्रॉनिक स्ट्रेस है।
- जिन्हें बार-बार इंफेक्शन होता है।
- जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है।
- जिन्हें क्रॉनिक डिजीज है।
- जिनकी कोई दवा चल रही है।
- जो बुजुर्ग हैं।
सवाल- रोजाना कितनी मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट फूड लेना पर्याप्त है?
जवाब- एंटीऑक्सिडेंट की कोई तय मात्रा निर्धारित नहीं है। इन्हें संतुलित डाइट से लेना बेहतर माना जाता है। पर्याप्त एंटीऑक्सिडेंट्स के लिए रोज कम-से-कम 4–5 सर्विंग फल और सब्जियां लेना पर्याप्त है।
सवाल- क्या ज्यादा एंटीऑक्सिडेंट लेने से हेल्थ को कोई नुकसान भी हो सकता है?
जवाब- एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर के लिए फायदेमंद जरूर हैं, लेकिन हर चीज की तरह इनकी भी एक सीमा है। खासकर जब इन्हें हाई-डोज सप्लीमेंट्स के रूप में लिया जाता है, तो यह उल्टा असर डाल सकते हैं। शरीर में फ्री रेडिकल्स पूरी तरह ‘दुश्मन’ नहीं होते, उनका एक नेचुरल बैलेंस भी जरूरी होता है। इसलिए–
- जरूरत से ज्यादा एंटीऑक्सिडेंट इस संतुलन को बिगाड़ सकते हैं। इससे मेटाबॉलिक प्रोसेस प्रभावित हो सकता है।
- इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया असंतुलित हो सकती है।
- कुछ मामलों में टॉक्सिसिटी का जोखिम भी बढ़ सकता है।
सवाल- एंटीऑक्सिडेंट फूड को अपनी डाइट में कैसे शामिल करें?
जवाब- इसके लिए किसी खास या महंगे डाइट प्लान की जरूरत नहीं होती। कोशिश करें कि आपकी थाली में अलग-अलग रंग के फल और सब्जियां शामिल हों और प्रोसेस्ड स्नैक्स की जगह नेचुरल ऑप्शन चुनें।

कुल मिलाकर, एंटीऑक्सिडेंट रिच फूड कोई ट्रेंड नहीं, बल्कि साइंस-बेस्ड हेल्थ स्ट्रैटेजी है। हार्ट हेल्थ बेहतर रखनी हो, इम्यूनिटी मजबूत करनी हो या उम्र बढ़ने की रफ्तार को संतुलित रखना हो, तो रंगीन और नेचुरल डाइट अहम भूमिका निभाती है।
यह डाइट न सिर्फ शरीर को जरूरी पोषण देती है, बल्कि लंबे समय तक सेहतमंद रहने में भी मदद करती है।
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