जरूरत की खबर- आपकी कमर का साइज क्या है: तोंद रहे कम तो घटता हार्ट अटैक का रिस्क, बेली फैट घटाने के 6 बेसिक रूल Health Updates

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बीते महीने बोस्टन में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) की एक कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें ताइवान की ‘नेशनल यांग मिंग चियाओ तुंग यूनिवर्सिटी’ ने रिसर्च पेश की। इसके मुताबिक, बेली फैट (तोंद) के कारण हार्ट डिजीज, खासकर हार्ट फेल्योर का रिस्क बढ़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, मोटापा एपिडेमिक बन गया है। एपिडेमिक यानी ऐसी बीमारी, जो दुनिया में बहुत तेजी से फैल रही है। मोटापे के कारण जानलेवा बीमारियों से पूरी दुनिया में हर साल 28 लाख एडल्ट्स की मौत होती है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में बेली फैट की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. अमर सिंघल, डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- हालिया रिसर्च में बेली फैट और हार्ट फेल्योर के बीच क्या कनेक्शन पता चला? जवाब- नई रिसर्च के मुताबिक, बेली फैट से हार्ट फेल्योर का खतरा बढ़ सकता है। बेली फैट के कारण हार्ट फेल्योर की सबसे बड़ी वजह इंफ्लेमेशन है- सवाल- BMI और बेली फैट में क्या फर्क है? जवाब- BMI (बॉडी मास इंडेक्स) और बेली फैट दोनों सेहत के लिए जरूरी पैरामीटर्स हैं, लेकिन इन दोनों से अलग-अलग चीजें पता चलती हैं। BMI यह मोटापे का पता लगाने के लिए जरूरी पैरामीटर है। इसमें लंबाई और वजन का रेशियो निकालकर तय किया जाता है कि व्यक्ति मोटा है या नहीं। हालांकि, BMI से यह नहीं पता चलता है कि शरीर में फैट कहां जमा है। इससे यह भी पता कर सकते हैं कि- बेली फैट बेली फैट का मतलब पेट के आसपास जमा चर्बी है। इसे वेस्ट साइज मापकर पता किया जा सकता है। कमर का साइज स्वस्थ व्यक्ति की लंबाई के आधे से कम होना चाहिए। उदाहरण के लिए अगर किसी की लंबाई 170 सेंटीमीटर है तो फिट व्यक्ति की कमर का साइज 85 सेंटीमीटर से कम होना चाहिए। सवाल- अमूमन लोग BMI को हेल्दी बॉडी का पैरामीटर मानते हैं। क्या ये साइंटिफिकली सही है? जवाब- BMI को लंबे समय से मोटापे का पता लगाने के लिए जरूरी टूल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। यह इसलिए पॉपुलर हो गया क्योंकि आसान और सस्ता है। इससे रिस्क ट्रेंड समझने में मदद मिलती है, लेकिन यह उतना साइंटिफिक नहीं है। इसलिए इसकी लिमिट्स हैं- फैट और मसल का फर्क नहीं कर पाता फैट कहां जमा है, पता नहीं चलता सवाल- नई रिसर्च, साइंस स्टडीज बेली फैट को BMI से ज्यादा खतरनाक क्यों बता रही हैं? जवाब- डॉ. अमर सिंघल के मुताबिक, BMI से सिर्फ लंबाई के रेशियो में वजन का पता चलता है। इससे यह नहीं पता चलता है कि शरीर में फैट कहां जमा है। नई रिसर्च, स्टडीज में बेली फैट को क्यों ज्यादा खतरनाक माना है, ग्राफिक से समझिए- सवाल- क्या बेली फैट और विसरल फैट अलग होता है? जवाब- नहीं, ये अलग नहीं होते, बल्कि आपस में जुड़े हुए हैं, समझिए कैसे- बेली फैट क्या होता है? पेट के आसपास की चर्बी को बेली फैट कहते हैं। यह दो तरह का होता है- विसरल फैट क्या है? सवाल- पेट पर जमा चर्बी हार्ट को कैसे नुकसान पहुंचाती है? जवाब- बेली फैट अंदर-ही-अंदर हार्ट को कई तरह से नुकसान पहुंचाता है। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- विसरल फैट बढ़ने का रिस्क किन्हें ज्यादा है? जवाब- विसरल फैट का रिस्क हर किसी को होता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- बेली फैट कम करने के लिए लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए? जवाब- बेली फैट कम करने की कोई एक ट्रिक नहीं है। यह पूरी लाइफस्टाइल पर डिपेंड करता है। कुछ अच्छी आदतें अपनाकर इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- बेली फैट कम करने के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं? जवाब- बेली फैट कम करने में डाइट का रोल सबसे अहम है। कोई क्या खाता-पीता है, इससे तय होता है कि शरीर में मसल्स बढ़ेगा या फैट। इसलिए समझिए क्या खाना चाहिए और क्या नहीं- क्या खाएं? 1. प्रोटीन 2. फाइबर 3. हेल्दी फैट 4. प्रोबायोटिक फूड डेयरी प्रोडक्ट- दही और छाछ। 5. पानी क्या न खाएं? 1.मीठा 2. रिफाइंड कार्ब 3. प्रोसेस्ड और जंक फूड ………………
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