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लुधियाना के बहुचर्चित दुष्कर्म एवं हत्या मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दोषी की फांसी की सजा को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर की परिभाषा की सीमा पर खड़ा है।
जांच में कुछ कमियां और संदेह की गुंजाइश मौजूद है। ऐसे में जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने दोषी को कम से कम 50 वर्ष की वास्तविक कैद भुगतने का आदेश दिया है जिसमें किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी। साथ ही पाक्सो अधिनियम के तहत 25 वर्ष की सजा भी सुनाई गई है। अदालत ने पीड़ित परिवार को 75 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।
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चार साल की बच्ची का दुष्कर्म-हत्या: बिना रियायत 50 साल की जेल, रेयरेस्ट ऑफ रेयर की परिभाषा की सीमा पर मामला

