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चंडीगढ़ में सिनेमा हॉल में दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए जरूरी सुविधाओं की भारी कमी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन ने सिनेमा प्रबंधन और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ औपचारिक सार्वजनिक शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि अधिकांश सिनेमा हॉल अब भी दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम (आर पीडब्ल्यूडी एक्ट), 2016 का पालन नहीं कर रहे हैं। एसोसिएशन के प्रेसिडेंट आरके गर्ग की ओर से दी गई शिकायत के मुताबिक हाल ही में चंडीगढ़ के एक सिनेमा हॉल में ऐसी स्थिति सामने आई, जिसने पूरे सिस्टम की असंवेदनशीलता को उजागर कर दिया। सिनेमा हॉल में न तो रैम्प या लिफ्ट की व्यवस्था थी, न ही व्हीलचेयर के लिए सुरक्षित सिटिंग और न ही दिव्यांगों के अनुकूल शौचालय मौजूद थे। सभी सीटों तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां चढ़ना अनिवार्य था, जो बुजुर्गों और कम चलने-फिरने में सक्षम लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। बड़ी मुशिक्ल से सीट तक पहुंचते है शिकायत में बताया गया कि एक बुजुर्ग और कमजोर महिला को अपनी सीट तक पहुंचने के लिए पूरी सीढ़ियां चढ़ने पर मजबूर होना पड़ा। फिल्म के दौरान उन्होंने केवल इस डर से शौचालय का उपयोग नहीं किया कि वापस चढ़ पाना उनके लिए संभव नहीं होगा। शो खत्म होने के बाद भी उन्हें थकी हुई हालत में सीढ़ियों से उतरना पड़ता है। उन्होंने कहा यह कोई छोटी असुविधा नहीं, बल्कि असुरक्षित और भेदभावपूर्ण ढांचे का सीधा नतीजा है। यह समस्या किसी एक सिनेमा हॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि यूनियन टेरिटरी चंडीगढ़ के अधिकांश थिएटरों में यही हाल है। आर पीडब्ल्यूडी एक्ट, 2016 के तहत सिनेमा हॉलों में बाधा रहित प्रवेश, व्हीलचेयर के लिए सुरक्षित सीटें और सुलभ शौचालय अनिवार्य हैं। इसके बावजूद सिनेमा संचालक इन नियमों को नजरअंदाज कर व्यवसाय कर रहे हैं। प्रशासनिक निगरानी पर उठाए सवाल शिकायत में प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल उठाए गए हैं। एसोसिएशन ने पूछा है कि जब बुनियादी सुरक्षा और पहुंच संबंधी मानकों का पालन नहीं हो रहा, तो सिनेमा लाइसेंस किस आधार पर जारी या नवीनीकृत किए जा रहे हैं। यदि नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं, तो यह प्रशासन की चुप्पी और लापरवाही को दर्शाता है। इस तरह की व्यवस्था यह संदेश देती है कि सार्वजनिक मनोरंजन स्थल केवल सक्षम लोगों के लिए हैं, जबकि वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों को बाहर रखा जा रहा है। यह न केवल असंवैधानिक है, बल्कि सामाजिक रूप से भी पीछे ले जाने वाला कदम है। एसोसिएशन की कार्रवाई की मांग सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की है कि यूनियन टेरिटरी के सभी सिनेमा हॉलों का तुरंत एक्सेसिबिलिटी ऑडिट कराया जाए, नियमों का उल्लंघन करने वाले सिनेमा हॉलों पर सख्त कार्रवाई की जाए और सिनेमा लाइसेंस को आर पीडब्ल्यूडी एक्ट के अनुपालन से अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए। साथ ही शिकायत के नतीजों को सार्वजनिक डोमेन में लाने की भी मांग की गई है।
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चंडीगढ़ सिनेमा हॉल में दिव्यांगों को नहीं मिल रहा अधिकार: RPWD एक्ट की अनदेखी का आरोप, प्रशासनिक निगरानी पर उठाए सवाल – Chandigarh News



