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चंडीगढ़ में शिक्षा व्यवस्था का एक चिंताजनक चेहरा सामने आया है। चंडीगढ़ में कुल 115 सरकारी स्कूल हैं, जिनमें से 44 सीनियर सेकेंडरी स्तर तक अपग्रेड किए जा चुके हैं। लेकिन हकीकत यह है कि कई स्कूल बिना प्रिंसिपल और विषय विशेषज्ञ लेक्चररों के चल रहे हैं।
विभाग ने स्कूलों को 12वीं तक तो कर दिया मगर आवश्यक पद न तो सृजित हुए और न ही सभी विषयों के शिक्षक नियुक्त किए गए। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
जीएमएसएसएस सेक्टर-39, जीएसएसएस कैंबवाला, जीएमएसएसएस-56, जीएमएसएसएस-45सी, जीएमएसएसएस-28, जीएमएसएसएस मलोया और मौलीजागरां के सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल की पोस्ट ही नहीं है। इन स्कूलों को अपग्रेड कर 12वीं तक बना दिया गया लेकिन न तो प्रिंसिपल हैं और न ही 11वीं, 12वीं कक्षा को पढ़ाने के लिए पूरे लेक्चरर। हालांकि, कुछ दिन पहले प्रमोशन कर 9 प्रिंसिपल लगाए हैं लेकिन इनमें प्रिंसिपल की पोस्ट ही नहीं है। इसके अलावा खुड्डा लाहौरा स्कूल समेत कई स्कूलों में लेक्चरर पूरे नहीं हैं।
मुख्य विषयों के शिक्षक नहीं
सेक्टर-39 के स्कूल में इतिहास और हिंदी के लेक्चरर नहीं हैं। केवल अंग्रेजी का एक लेक्चरर है। बाकी विषयों की कक्षाएं नियमित रूप से नहीं लग पा रहीं। इसी तरह कैंबवाला के स्कूल में करीब 1500 विद्यार्थी पढ़ते हैं और स्कूल डबल शिफ्ट में चल रहा है। यहां लगभग 80 कर्मचारी तैनात हैं लेकिन फिजिकल एजुकेशन, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री के लेक्चरर नहीं हैं। 11वीं-12वीं की कक्षाएं जेबीटी शिक्षक संभाल रहे हैं। दो साल पहले नियुक्त हुए नए शिक्षकों से प्रबंधन संबंधी कार्य भी लिया जा रहा है जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वर्ष 2021 में यहां से प्रिंसिपल का पद रायपुर कलां स्थानांतरित कर दिया गया था। तब से यह स्कूल स्थायी प्रिंसिपल के बिना चल रहा है। स्थानीय पार्षद ने विभागीय अधिकारियों के समक्ष समस्या उठाई लेकिन जवाब मिला कि परीक्षाओं के बाद समाधान किया जाएगा।
12 साल से लंबित 186 पद
चंडीगढ़ शिक्षा विभाग ने वर्ष 2013 में 186 पद सृजित करने के लिए केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा था। 12 वर्ष बाद भी ये पद स्वीकृत नहीं हो सके। प्रस्ताव के अनुसार अंग्रेजी के 38, हिंदी के 30, पंजाबी के 3, संस्कृत का 1, कॉमर्स के 9, हिस्ट्री के 12, सोशियोलॉजी के 4, इकोनॉमिक्स के 2, पॉलिटिकल साइंस के 13, फिजिकल एजुकेशन के 55, साइकोलॉजी का 1, होम साइंस के 2 और फिलॉसफी का 1 पद आवश्यक बताया गया था।
22 साल बाद निकली पीजीटी भर्ती
पिछले वर्ष 22 साल बाद 98 पीजीटी पदों पर भर्ती निकाली गई, जिसमें लगभग 80 लेक्चरर ने जॉइन किया। इसके अलावा 218 जेबीटी और 104 टीजीटी पदों पर भी भर्ती हुई। हालांकि आरटीई मानकों के अनुसार छात्र-शिक्षक अनुपात संतोषजनक बताया जा रहा है, लेकिन 11वीं-12वीं के विद्यार्थियों को विषय विशेषज्ञ नहीं मिल पा रहे। जेबीटी शिक्षकों से पढ़ाई कराने के कारण विद्यार्थियों को विषय स्पष्ट नहीं हो पाते और उन्हें निजी ट्यूशन का सहारा लेना पड़ रहा है।
यूनियन ने उठाए नियमों पर सवाल
चंडीगढ़ टीचर यूनियन और जेएसी के सदस्यों का कहना है कि पहले यहां पंजाब सिविल सर्विस नियम लागू थे, जिनमें कार्यवाहक प्रिंसिपल लगाने का प्रावधान था। एक अप्रैल 2022 से केंद्र सेवा नियम लागू हो गए लेकिन उनके अनुसार भी व्यवस्थाएं पूरी तरह लागू नहीं की गईं। उनका कहना है कि केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालयों में नियमित और कार्यवाहक दोनों प्रिंसिपल पद होते हैं, जबकि यहां पद ही स्वीकृत नहीं हैं।
अभिभावकों में नाराजगी
लेक्चरर कक्षाएं लें या प्रिंसिपल का काम देखें
कैंबवाला में 11वीं 12वीं के बच्चों को पढ़ाने के लिए टीचर ही नहीं हैं। यहां रेगुलर प्रिंसिपल नहीं है। प्रिंसिपल का काम लेक्चरर संभाल रहे हैं जिस कारण बच्चों की कक्षाएं नहीं लग पा रही है। सरकारी स्कूलों पर से भरोसा उठ रहा है। -दलीप कुमार सोनू, अभिभावक
ट्यूशन का अभिभावकों पर पड़ रहा भार
जेबीटी के पढ़ाने के कारण विद्यार्थियों को टॉपिक क्लियर नहीं हो पाते। इसके कारण बच्चों को ट्यूशन रखनी पड़ रही है। इसका अभिभावकों पर आर्थिक भार पड़ रहा है। ऐसे ही हालात रहे तो रिजल्ट प्रभावित होने के साथ स्कूलों से विश्वसनीयता भी कम होगी। -विनोद कुमार, अभिभावक
प्रिंसिपलों का प्रमोशन कर उनका प्रशिक्षण कार्य जारी है। धीरे-धीरे शिक्षकों की कमी को पूरा किया जा रहा है। -निर्मल शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी
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चंडीगढ़ में शिक्षा व्यवस्था बेहाल: बिना प्रिंसिपल चल रहे कई सरकारी स्कूल, मुख्य विषयों के शिक्षक नहीं


