[ad_1]
चंडीगढ़ की स्पेशल कोर्ट ने एनडीपीएस के एक मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी राजेश कुमार उर्फ काला उर्फ बाबा को बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि पुलिस अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास हैं और केस प्रॉपर्टी को लेकर भी संदेह पैदा हुआ, जिसका लाभ आरोपी को मिला। यह मामला थाना सेक्टर-11 में 9 जनवरी 2020 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा था। पुलिस के अनुसार 9 जनवरी 2020 की शाम करीब 7:15 बजे सेक्टर-25/38 लाइट प्वाइंट के पास आरोपी को 10.70 ग्राम हेरोइन और 2-2 एमएल की 14 बुप्रेनॉर्फिन इंजेक्शन के साथ पकड़ा गया था। आरोपी पर एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 22 के तहत मामला दर्ज किया गया था। केस प्रॉपर्टी पर उठे सवाल ट्रायल के दौरान अदालत में बड़ा खुलासा हुआ। एक अहम गवाह और जांच अधिकारी ने बचाव पक्ष की पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि केस प्रॉपर्टी को खोला गया था। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इस बात का जिक्र न तो उन्होंने अपने पहले दिए गए बयान में किया था और न ही चार्जशीट में इसका उल्लेख है। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि अपने धारा 161 सीआरपीसी के तहत दर्ज बयान में भी उन्होंने यह नहीं कहा था कि केस प्रॉपर्टी उनके पास पूरी तरह सुरक्षित और बिना किसी छेड़छाड़ के रही। इस स्वीकारोक्ति के बाद मामले में केस प्रॉपर्टी की सुरक्षा और जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए। अदालत ने माना कि जब केस प्रॉपर्टी की सील और उसकी सुरक्षा को लेकर स्पष्ट और एक जैसे बयान नहीं हैं, तो संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। स्थानीय गवाहों के बयान रिकॉर्ड में शामिल नहीं बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत को बताया कि घटना वाले दिन दोपहर करीब 2 बजे आरोपी को इलाके से उठाया गया था। इस संबंध में कॉलोनी के कई स्थानीय निवासियों के बयान भी लिए गए थे, लेकिन उन्हें चार्जशीट का हिस्सा नहीं बनाया गया। रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद की गई जांच में कई स्थानीय लोगों के बयान दर्ज हुए, परंतु उन्हें न तो अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया गया और न ही अदालत की अनुमति लेकर बाहर रखा गया। पुलिस बयानों में आपसी तालमेल नहीं अदालत ने पाया कि पुलिस अधिकारियों के बयानों में कई जगह आपसी मेल नहीं है। एक अधिकारी ने कहा कि केस प्रॉपर्टी खोली गई थी, जबकि इस बारे में पहले कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था। इससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए। बचाव पक्ष की ओर से वकील तरमिंदर सिंह, मधु वाणी और मनजिंदर सिंह ने दलील दी कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और जांच में गंभीर खामियां हैं। स्पेशल कोर्ट ने कहा कि सरकारी पक्ष आरोप पूरी तरह साबित नहीं कर सका। केस से जुड़ी चीजों की संभाल, गवाहों के बयान और जांच में कई कमियां मिलीं। इसलिए आरोपी को शक का फायदा देते हुए बरी कर दिया गया।
[ad_2]
चंडीगढ़ पुलिस के बयानों में विरोधाभास आरोपी बरी: NDPS केस में पकड़ा, केस प्रॉपर्टी पर उठे सवाल, स्थानीय गवाहों के बयान रिकॉर्ड में शामिल नहीं – Chandigarh News



