चंडीगढ़ निगम में 116 करोड़ घोटाले में विक्रम वाधवा गिरफ्तार: किन अफसरों की मिलीभगत होगा खुलासा, पैसा ब्याज पर चढ़ाया, होटलियर्स, ज्वैलर्स-बिल्डरों को दिया – Chandigarh News Chandigarh News Updates

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चंडीगढ़ नगर निगम में स्मार्ट सिटी फंड से जुड़े लगभग 116.84 करोड़ रुपये के घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने विक्रम वाधवा को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि उसकी तलाश हरियाणा पुलिस भी कर रही थी। वहां भी उसके खिलाफ 590 करोड़ के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में नाम है। हरियाणा पुलिस भी आरोपी वाधवा की तलाश कर रही थी, लेकिन उससे पहले चंडीगढ़ पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अब आरोपी से पूछताछ में खुलासा होगा कि चंडीगढ़ के कौन-कौन से अफसर आरोपी के साथ मिलीभगत में थे, जिनके कारण वह इतनी बड़ी करोड़ों की ठगी को अंजाम दे सका। पुलिस की जांच में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार निगम का सरकारी पैसा केवल फर्जी एफडी के जरिए ही नहीं हड़पा गया, बल्कि उसे ओपन मार्केट में बिल्डरों, होटलियर्स और ज्वैलर्स को मोटे ब्याज पर इस्तेमाल करने के लिए भी दिया गया। मामले में चंडीगढ़ आर्थिक अपराध शाखा द्वारा नगर निगम में आउटसोर्स पर रखे गए अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा और आईडीएफसी सेक्टर-32 के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। दस्तावेजों के अनुसार यह पूरा खेल 20 मार्च 2025 के आसपास शुरू हुआ और करीब दस महीनों तक पैसा ओपन मार्केट में चलता रहा। इस दौरान प्राइवेट खातों में लगातार बड़े पैमाने पर ट्रांजेक्शन होते रहे। सरकारी खाते से पैसा प्राइवेट खातों में जाता और कुछ समय बाद वही राशि दोबारा सरकारी खाते में ट्रांसफर कर दी जाती थी। बताया जा रहा है कि इस दौरान मिलने वाला ब्याज कथित तौर पर कुछ बिचौलियों और अधिकारियों के बीच बांट लिया जाता था। निगम अधिकारियों को भनक तक नहीं मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह बताई जा रही है कि नगर निगम के सरकारी खाते से बड़ी रकम बार-बार प्राइवेट खातों में ट्रांसफर होती रही, लेकिन निगम के कई अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। सूत्रों के अनुसार सैकड़ों बार इस तरह पैसों का लेन-देन किया गया। पहले सरकारी खाते से पैसा प्राइवेट खातों में भेजा जाता था और कुछ महीनों बाद वही रकम फिर से प्राइवेट खातों से वापस सरकारी खाते में ट्रांसफर कर दी जाती थी। यह प्रक्रिया एक-दो बार नहीं, बल्कि कई बार दोहराई गई। खुलासे से बचने के लिए बनाई गई एफडी जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में यह फैसला लिया गया था कि प्रोजेक्ट का पैसा नगर निगम के अन्य खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। इसके बाद यह राशि नगर निगम के खाते में भी ट्रांसफर कर दी गई। इसके बावजूद अकाउंट ब्रांच की ओर से 116.84 करोड़ की एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) बनवा दी गई, जबकि यह रकम पहले से ही निगम के सुरक्षित खातों में मौजूद थी। नियमों के अनुसार इस राशि की केवल एक एफडी बननी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय 11 एफडी बनाई गईं। हैरानी की बात यह है कि रिकॉर्ड में केवल एक ही एफडी की एंट्री दर्ज की गई, जिसे सही बताया जा रहा है। किसके संपर्क में था आरोपी चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लकी ने आरोप लगाया कि जिन लोगों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है, उनके मोबाइल फोन की एक साल की कॉल डिटेल निकाली जानी चाहिए। इसके अलावा उनके व्हाट्सएप मैसेज की भी पूरी जांच होनी चाहिए, ताकि पता चल सके कि आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में था। उनका कहना है कि इतना बड़ा घोटाला निचले स्तर का अधिकारी नहीं कर सकता, इसलिए इसमें जिन अधिकारियों की भूमिका है, उनके नाम भी सामने आने चाहिए। संबधित अधिकारियों के मांगे नाम मेयर सौरभ जोशी ने कहा जनता के पैसे से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, 116.84 करोड़ के फिक्स्ड डिपॉजिट मामले की तुरंत जांच के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम कमिशनर से पूरे मामले की विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मांगी गई है। मार्च–अप्रैल 2025 के दौरान सीएससीएल के बैंक खातों की निगरानी करने वाले अधिकारियों की पहचान कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ पुलिस / इकोनॉमिक ऑफेंस विंग इस मामले की जांच कर रही है और सभी संबंधित अधिकारियों को सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। सीएससीएल के सभी बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन का स्वतंत्र एजेंसी से फॉरेंसिक ऑडिट कराने की सिफारिश की गई है। किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही या संलिप्तता सामने आने पर कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम आयुक्त को पांच कार्य दिवस के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। जनता का विश्वास बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा।
कमिशनर बोले ब्याज समेत मिले पैसे नगर निगम कमिशनर अमित कुमार ने कहा निगम को ब्याज सहित 121 करोड़ रुपये वापस मिल चुके हैं। बैंकों में लेनदेन के पूरे रिकॉर्ड की जांच की गई है। इसके बाद कुछ खामियां भी सामने आईं। साथ ही अकाउंट ब्रांच के कर्मी की संदिग्ध भूमिका को देखते हुए पूरे मामले में पुलिस को शिकायत दी गई है और पुलिस जांच में सब सामने आ जाएगा। विकास वधावा का नाम भी चर्चा में सूत्रों से पता चला है कि आईडीएफसी बैंक से जुड़े घोटाले में पहले भी चर्चा में रहे विकास वधावा का नाम इस मामले में भी सामने आ रहा है। बताया जाता है कि उसका सेक्टर-17 स्थित स्मार्ट सिटी कार्यालय और नगर निगम कार्यालय में अक्सर आना-जाना था और वह अधिकारियों से मुलाकात करता रहता था। पुलिस के पास इस संबंध में कुछ जानकारी होने की बात कही जा रही है और उससे पूछताछ की संभावना भी जताई जा रही है। आउटसोर्स कर्मचारी के गायब होने पर खुलासा बताया जा रहा है कि बैंक की नीति के तहत आईडीएफसी बैंक ने नगर निगम को इस राशि की भरपाई कर दी है। इससे पहले हरियाणा में सामने आए घोटाले के बाद भी बैंक ने ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के लिए भुगतान किया था। हालांकि इस मामले में बैंक और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका को लेकर जांच जारी है। हरियाणा में आईडीएफसी बैंक घोटाले का मामला सामने आने के बाद स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में कार्यरत एक आउटसोर्स कर्मचारी अभिनव अचानक गायब हो गया। इसके बाद संदेह होने पर जांच शुरू की गई तो सामने आया कि 116.84 करोड़ रुपये की 11 एफडी फर्जी हैं। अब जांच में यह सवाल भी उठ रहा है कि नगर निगम के अकाउंट से जुड़ी जानकारी और पासवर्ड आउटसोर्स कर्मचारी तक कैसे पहुंचे। आईडीएफसी बैंक में करवाई गई 11 एफडी 28 मार्च 2025 को 1 साल के लिए 25 करोड़ रुपये की एफडी, मैच्योरिटी 27 मार्च 2026 28 मार्च 2025 को 1 साल के लिए 25 करोड़ रुपये की एफडी, मैच्योरिटी 27 मार्च 2026 28 मार्च 2025 को 1 साल के लिए 10 करोड़ रुपये की एफडी, मैच्योरिटी 27 मार्च 2026 28 मार्च 2025 को 1 साल के लिए 10 करोड़ रुपये की एफडी, मैच्योरिटी 27 मार्च 2026 28 मार्च 2025 को 1 साल के लिए 10 करोड़ रुपये की एफडी 28 मार्च 2025 को 1 साल के लिए 10 करोड़ रुपये की एफडी 28 मार्च 2025 को 6 करोड़ 61 लाख 11 हजार 278 रुपये की एफडी 2 अप्रैल 2025 को 1 साल के लिए 10 करोड़ रुपये की एफडी, मैच्योरिटी 1 अप्रैल 2026 2 अप्रैल 2025 को 1 साल के लिए 5 करोड़ रुपये की एफडी 6 अप्रैल 2025 को 1 साल के लिए 5 करोड़ रुपये की एफडी, मैच्योरिटी 5 अप्रैल 2026 6 अप्रैल 2025 को 22 लाख 90 हजार 386 रुपये 37 पैसे की एफडी

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