चंडीगढ़ की 2 लेडी टीचरों ने नया VIDEO जारी किया: बोलीं- साड़ी-सूट हमारी इज्जत नहीं बचा रहा; प्रिंसिपल-टीचर को वापस पंजाब-हरियाणा भेजें गवर्नर – Chandigarh News Chandigarh News Updates

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चंडीगढ़ की महिला शिक्षकों ने एक वीडियो वायरल कर चंडीगढ़ प्रशासन के एक्शन पर ही सवाल उठा दिए हैं।

चंडीगढ़ शिक्षा विभाग की दो महिला टीचरों ने एक प्रिंसिपल और टीजीटी टीचर पर जातिसूचक शब्द कहने के आरोप लगाए थे। मामला शिक्षा विभाग व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया तक भी पहुंचा था। अब प्रिंसिपल व टीचर का ट्रांसफर भी कर दिया गया है। वहीं, मामले की

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4 मिनट 35 सेकेंड के वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्हें इंसाफ नहीं मिला है। उन्होंने कहा, “प्रशासक साहब ने चंडीगढ़ के स्कूलों टीचरों की यूनिफॉर्म तो लगा दी है, पर यूनिफॉर्मिटी आप नहीं दे पाए सर।

आपकी साड़ी-सूट की जो यूनिफॉर्म है सर, यह हमारे मान-सम्मान, इज्जत को बचाने में नाकाम रही है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति से इस मामले में संज्ञान लेने की मांग की है। हालांकि अभी तक प्रशासन का इस मामले में कोई बयान नहीं आया है।

दोनों महिला शिक्षक वीडियो में अपनी बात रखते हुए।

अब सिलसिलेवार जानिए दोनों टीचरों ने वीडियो में क्या कहा..

  • हर दरवाजे पर गए, इंसाफ नहीं मिला: दोनों टीचर प्रतिभा और मेधावी कहती हैं कि वे चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में टीचर हैं। यदि आपने पहले हमारी वीडियो देखी होगी तो आपको हमारे संघर्ष के बारे में पता होगा। हम दोनों ही अपने-अपने स्कूलों में काफी समय से जातिगत उत्पीड़न, वर्क प्लेस उत्पीड़न, मानसिक व शारीरिक शोषण का शिकार हो रही हैं। जिसके खिलाफ हमने प्रिंसिपल राजबाला व रणबीर कुमार के खिलाफ हर जगह शिकायत दी है। यह दोनों ही लोग पंजाब और हरियाणा से डैपुटेशन पर चंडीगढ़ में आए हैं। इन दोनों की शिकायत लेकर हम हर छोटे से बड़े दरवाजे पर गए हैं। लेकिन हमें अभी तक न्याय नहीं मिला है।
  • गवर्नर साहब के कहने पर हम थाने भी गए: न्याय के नाम पर हमें केवल आश्वासन मिल रहा है। इसी तरह का आश्वासन हमें गवर्नर साहब से भी मिला। जब हम गवर्नर साहब से मिले तो उन्होंने हमसे 7 दिन का समय लेते हुए कहा कि हमें न्याय मिलेगा। उन्होंने हमें पुलिस का रास्ता दिखाया। गवर्नर सर के कहने पर हम पुलिस स्टेशन भी गए और अपनी शिकायत दर्ज करवाई।
  • एक सेक्टर से दूसरे सेक्टर में ट्रांसफर सजा नहीं: फिर सेक्टर-17 के पुलिस स्टेशन से एक वीडियो बनाकर हमने आपको पुलिस की कार्रवाई का तरीका भी दिखाया, जहां आरोपी के सामने ही हमारे गवाहों की सूची तैयार की जा रही थी, ताकि हमारे गवाहों को इन्फ्लुएंस किया जा सके। 10 दिन बीत जाने के बाद भी मेरी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। जबकि दोनों टीचरों का ट्रांसफर कर दिया गया है एक सेक्टर से दूसरे सेक्टर में। तो हम यह जानना चाहती हैं कि क्या यह ट्रांसफर उनकी सजा है?। ट्रांसफर सजा नहीं है।
  • इन टीचरों को रिपेट्रेट करें: इन टीचरों को वापस उनके स्टेट में क्यों नहीं भेजा जा रहा? गवर्नर साहब, मैं आपको बताना चाहती हूं, आपके पास रिपेट्रेशन का अधिकार है। आपने कुछ समय पहले एक टीचर को जो डेपुटेशन पर आई थी, उसे रिपेट्रेट किया था। तो इतने गंभीर आरोप होने के बाद दोनों टीचरों को रिपेट्रेट क्यों नहीं किया जा रहा है?
  • साड़ी-सूट के नियम, मान-सम्मान देने में नाकाम: आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे गवर्नर साहब जो हमारा एजुकेशन डिपार्टमेंट है, टीचरों के बारे में इतना क्रिएटिव, हमारा भला-उत्थान सोचते हैं। हमारे भले के लिए उन्होंने यूनिफॉर्म लगा दी। पर यूनिफॉर्मिटी आप नहीं दे पाए सर। आपकी साड़ी-सूट की जो यूनिफॉर्म है सर, यह हमारे मान-सम्मान, इज्जत को बचाने में नाकाम रही है। हमारे मान-सम्मान, इज्जत को बचाने में नाकाम रही है।
वीडियो बोलतीं टीचर मेधावी और प्रतिभा।

वीडियो बोलतीं टीचर मेधावी और प्रतिभा।

  • इंसाफ नहीं मिलेगा तो अपराध बढ़ेगा: जब तक आप इंसाफ नहीं करेंगे, तो इसी तरह के अपराध को बढ़ावा मिलेगा। आपका थका हुआ रवैया ही है, जो इन लोगों को बढ़ावा दे रहा है। अब आपके सामने दिख रहा होगा कि किस तरह के जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया जाता है और लोगों का उत्पीड़न किया जाता है।
  • चंडीगढ़ के लोग लावारिस, पीएम संज्ञान लें: ऐसे में हमारी भारत सरकार, प्रधानमंत्री व हमारी राष्ट्रपति मैम इन सबसे निवेदन है कि प्लीज चंडीगढ़ की तरफ देखिए, आप संज्ञान लीजिए, क्योंकि चंडीगढ़ के लोग इस समय लावारिस हैं। हमारा कोई वारिस, कोई देखभाल करने वाला नहीं है। कोई इंसाफ दिलाने वाला नहीं है। हमारी कोई शिकायत सुनने वाला नहीं है। इस समय शिक्षा विभाग व हायर एजुकेशन विभाग, कोई भी महकमा, कोई भी आम इंसान आज इंसान की स्थिति बहुत ही खराब है।
  • लोगों को खुद खड़ा होना होगा: हमारे प्रशासक साहब पंजाब से आए हैं। इसलिए वे पंजाब के लोगों का भला करने में लगे हैं। जो हमारे आला अधिकारी हैं- जैसे डीएसई सर हैं, सुरेन्दर सिंह बराड़ सर जो थे, वे पीसीए थे और अब आईएएस बने हैं। वे भी पंजाब के हैं, जो डेपुटेशन वाले लोग हैं। इनका खुलकर गलत कामों में समर्थन करते हुए दिखना चिंताजनक है। तो चंडीगढ़ के लोग इंसाफ के लिए कहां जाएं, किससे मांग करें? चंडीगढ़ के लोगों की हालत खराब है। चंडीगढ़ के लोगों को अब खुद ही खड़ा होना पड़ेगा जो कि हम दोनों कर रहे हैं।
ट्रांसफर ऑर्डर की कॉपी।

ट्रांसफर ऑर्डर की कॉपी।

  • हमारे सामने संघर्ष के सिवाए कोई रास्ता नहीं: अब प्रशासन ने हमारे सामने कोई और रास्ता नहीं छोड़ा है। सर, आप ही हमें यह रास्ता दिखा रहे हैं, अब इस रास्ते पर चलने के लिए हम तैयार हैं। जब तक हमें इंसाफ नहीं मिलेगा, उसके लिए जो भी रास्ता हो आंदोलन, प्रदर्शन, अनशन हम उस पर चलेंगे। हम लड़ाई लड़ेंगे। हम इंसाफ पाकर रहेंगे।
  • चंडीगढ़ को लूटकर चले जाते हैं: भारत सरकार को चंडीगढ़ के प्रशासन व अधिकारियों से सवाल जरूर पूछना चाहिए- ऐसा भेदभाव वाला रवैया क्यों? क्या ये लोग सिर्फ चंडीगढ़ में छुट्टियां मनाने आते हैं, अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए; दो-चार साल तक चंडीगढ़ में रहते हैं, माल-मलाई लूटकर अपने यहां घर बनाकर चले जाते हैं, चंडीगढ़ को सोने की चिड़िया समझकर लूटकर?
  • यूटी कैडर के अधिकारी ही तैनात होने चाहिए: भारत सरकार से अपील है कि चंडीगढ़ में यूटी कैडर के प्रशासक व अधिकारी होने चाहिए। चंडीगढ़ की जो वास्तविक स्थिति ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ जैसी है, यह स्थिति ठीक नहीं है। आने वाले समय में चंडीगढ़ के लोगों के लिए बहुत मुश्किल भरा होगा। इस तरह के आंदोलन होते रहेंगे जब तक हमें इंसाफ नहीं मिलता।

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