चंडीगढ़ की पेड पार्किंग का मुद्दा उठा लोकसभा में: सांसद तिवारी कहा-डिजिटल भुगतान, निगरानी से बढ़ी आय. पर फास्टैग नहीं हुआ लागू – Chandigarh News Chandigarh News Updates

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चंडीगढ़ में पेड पार्किंग व्यवस्था के आधुनिकीकरण का मामला लोकसभा में उठा। चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने नगर निगम की पार्किंग परियोजना में देरी, पारदर्शिता और तकनीकी खामियों को लेकर सवाल खड़े किए। इसके जवाब में गृह मंत्रालय की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री ने सदन में स्थिति स्पष्ट की। सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में पूछे गए सवाल के जरिए नगर निगम चंडीगढ़ द्वारा पेड पार्किंग स्थलों को तकनीक आधारित बनाने की योजना, उसके क्रियान्वयन में हुई देरी और इससे जुड़े राजस्व का ब्योरा मांगा। इस पर गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री ने बताया कि 27 जनवरी 2026 से चंडीगढ़ के सभी पेड पार्किंग स्थलों पर एकल पार्किंग पास व्यवस्था लागू कर दी गई है। डिजिटल भुगतान और निगरानी से बढ़ी आय केंद्रीय मंत्री ने सदन को बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन के अनुसार नगर निगम ने पार्किंग संचालन में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल भुगतान प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक रसीद, रियल टाइम मॉनिटरिंग और केंद्रीकृत व्यवस्था लागू की है। इससे पार्किंग शुल्क की वसूली पर बेहतर नियंत्रण हुआ है और राजस्व प्रबंधन में सुधार दर्ज किया गया है। लोकसभा में यह भी बताया गया कि जुलाई 2024 से अब तक पेड पार्किंग से कुल 22 करोड़ 43 लाख 90 हजार 681 रुपये की आय हुई है। संचालन खर्च घटाने के बाद नगर निगम को 10 करोड़ 21 लाख 71 हजार 97 रुपये की शुद्ध आय हुई है। मंत्री के अनुसार, नई व्यवस्था से नगर निगम को आर्थिक लाभ हुआ है। फास्टैग न लागू होने पर तिवारी ने जताई नाराजगी चंडीगढ़ तकनीकि अपग्रेडेशन पीछे क्यों: जवाब से असंतुष्ट सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि संसद में दी गई जानकारी बेहद हैरान करने वाली है। उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक की ओर तेजी से बढ़ रही है, ऐसे समय में चंडीगढ़ की सूचना प्रौद्योगिकी क्षमता का कमजोर होना गंभीर चिंता का विषय है। फास्टैग क्यों नहीं लागू नहीं: तिवारी ने कहा कि चार साल पहले परिकल्पित फास्टैग आधारित नकदरहित पार्किंग प्रणाली आज तक लागू नहीं हो सकी। इसके चलते नगर निगम को फिर से एकल पार्किंग पास व्यवस्था अपनानी पड़ी है, जिसमें आज भी वाहनों की नंबर प्लेट को हाथ से स्कैन कर पास की पुष्टि की जाती है। उन्होंने इसे न तो आधुनिक तकनीक का सही उपयोग बताया और न ही स्मार्ट सिटी की अवधारणा के अनुरूप माना। यह तकनीकि अक्षमता को दर्शाता है: तिवारी ने कहा कि फास्टैग प्रणाली वर्ष 2010 से राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफलतापूर्वक चल रही है और देश के कई सरकारी भवनों में भी लागू है। इसके बावजूद चंडीगढ़ जैसे नियोजित शहर में इसे लागू न कर पाना प्रशासनिक और तकनीकी अक्षमता को दर्शाता है। लोकसभा में इस मुद्दे पर हुई चर्चा के बाद चंडीगढ़ की पेड पार्किंग व्यवस्था, उसकी तकनीकी तैयारी और भविष्य की योजनाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

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चंडीगढ़ की पेड पार्किंग का मुद्दा उठा लोकसभा में: सांसद तिवारी कहा-डिजिटल भुगतान, निगरानी से बढ़ी आय. पर फास्टैग नहीं हुआ लागू – Chandigarh News