घरेलू वेज-नॉनवेज थाली नवंबर में 13% सस्ती हुई: नवंबर-24 के मुकाबले टमाटर 17%, आलू 29% सस्ते, प्याज की कीमत आधे कम हुई Business News & Hub

मुंबई4 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

वेज थाली की कीमत तय करने में आलू और टमाटर की हिस्सेदारी 24% होती है।

भारत में एक घरेलू वेजिटेरियन थाली की कीमत नवंबर में (सालाना आधार पर) 13.14% घटकर 28.4 रुपए पर आ गई है। पिछले साल नवंबर (2024) में वेज थाली की कीमत 32.7 रुपए थी।

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिपोर्ट ‘रोटी राइस रेट’ (RRR) में यह जानकारी सामने आई है।

क्रिसिल की RRR रिपोर्ट के मुताबिक, शाकाहारी थाली की कीमत अक्टूबर-2025 के मुकाबले नवंबर में 2% बढ़ी है। अक्टूबर में वेज थाली की कीमत 27.8 रुपए थी।

नॉन-वेज थाली भी 12.52% सस्ती हुई

वहीं, नॉन-वेज थाली की कीमत नवंबर में सालाना आधार पर 12.52% घटकर 53.8 रुपए पर आ गई है। पिछले साल यानी नवंबर 2024 में नॉनवेज थाली 63.5 रुपए की थी।

मंथली बेसिस पर यानी अक्टूबर के मुकाबले नॉन-वेज थाली की कीमत 1.10% घटी है। अक्टूबर में नॉन-वेज थाली की कीमत 54.4 रुपए थी।

टमाटर 17%, आलू 29% और प्याज 53% सस्ती हुईं

वेज थाली की कीमत तय करने में आलू और टमाटर की हिस्सेदारी 24% होती है। पिछले साल नवंबर के मुकाबले टमाटर 17%, आलू 29% (हाई बेस पर), प्याज 53%, और दालें 17% सस्ती हुई हैं। इसलिए कीमतें कम हुईं।

प्याज के दाम ज्यादा स्टॉक और दालों में बंगाल ग्राम, येलो पी और ब्लैक ग्राम के हाई इंपोर्ट से घटे। मांसाहारी थाली में ब्रॉयलर (फार्म चिकेन) का हिस्सा करीब 50% होता है और इसके दाम महीने में 12 गिरे, जिससे कुल खर्च कम हुआ।

ऐसे कैलकुलेट होती है थाली की एवरेज कॉस्ट

  • क्रिसिल ने नॉर्थ, साउथ, ईस्ट और वेस्ट इंडिया में मौजूदा फूड कीमतों के आधार पर घर में थाली तैयार करने की एवरेज कॉस्ट कैलकुलेट की है। मंथली चेंज से आम आदमी के खर्च पर असर पड़ता है।
  • क्रिसिल के डेटा से अनाज, दालें, ब्रॉयलर्स (चिकन), सब्जियां, मसाले, एडिबल ऑयल और कुकिंग गैस सहित उन सामग्रियों का भी पता चलता है, जो थाली की कीमत में बदलाव लाते हैं।
  • वेज थाली में रोटी, सब्जियां (प्याज, टमाटर और आलू), चावल, दाल, दही और सलाद शामिल होता है। वहीं नॉन-वेज थाली के लिए दाल की जगह चिकन को शामिल किया गया है।

नोट- ऊपर दिए गए आंकड़े घर पर तैयार की गई प्रति थाली की लागत को दर्शाते हैं। यह थाली की रिटेल प्राइस नहीं है, जिसमें ओवरहेड कॉस्ट, स्टाफ एक्सपेंसेस और प्रॉफिट मार्जिन शामिल होता है।

——————–

ये खबर भी पढ़ें…

1. US टैरिफ का दबाव, फिर भी GDP 8.2% से बढ़ी: 6 तिमाही में सबसे ज्यादा; आम आदमी ने ज्यादा खर्च किया, फैक्ट्रियों का प्रोडक्शन बढ़ा

भारत समेत दुनिया में US टैरिफ का दबाव है, प्राइवेट इन्वेस्टमेंट सुस्त है, फिर भी भारत की अर्थव्यवस्था जुलाई-सितंबर तिमाही में 8.2% की दर से बढ़ी है। यह पिछली 6 तिमाही में सबसे ज्यादा है। पिछले साल की समान तिमाही में GDP 5.6% थी। वहीं अप्रैल-जून में ये 7.8% थी।

पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…

2. IMF ने भारत-पाक को एक जैसा ग्रेड ‘C’ क्यों दिया: 8.2% GDP ग्रोथ पर विपक्ष ने सवाल उठाए; क्या सच में आंकड़ों में गड़बड़ है

कल्पना कीजिए आप स्कूल में हैं और आपका रिपोर्ट कार्ड आया है। मैथ्स में C मिला, लेकिन बाकी सब्जेक्ट्स में B… मतलब आप पास तो हो गए, लेकिन सुधार की गुंजाइश है। हमारे देश की इकोनॉमी के साथ ठीक ऐसा हुआ है। 26 नवंबर को IMF ने भारत के GDP डेटा को ‘C’ ग्रेड दिया।

पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…

खबरें और भी हैं…

Source: https://www.bhaskar.com/business/news/thali-cost-drops-13-percent-november-2025-veg-nonveg-cheaper-crisil-report-136617574.html