गेहूं, बाजरा या रागी? जानिए किस मौसम में कौन-सी रोटी खाना है सेहत के लिए बेहतर Health Updates

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हमारे देश में रोटी सिर्फ खाना नहीं, रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. सुबह का नाश्ता हो या रात का खाना, थाली में रोटी होना लगभग तय माना जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हम साल भर एक ही तरह की रोटी क्यों खाते हैं, क्या शरीर को हर मौसम में एक जैसा खाना चाहिए. पहले के जमाने में ऐसा नहीं था. हमारे दादा-दादी मौसम बदलते ही अनाज भी बदल देते थे. सर्दियों में मोटा अनाज, गर्मियों में हल्का भोजन और बरसात में आसानी से पचने वाली चीजें खाई जाती थीं. इसका सीधा कारण शरीर और पाचन शक्ति का मौसम के साथ बदलना था. 

आज सुविधा और आदत की वजह से गेहूं की रोटी पूरे साल खाई जाती है. लेकिन पोषण विशेषज्ञ और आयुर्वेद मानते हैं कि हर अनाज की अपनी तासीर होती है और वह किसी खास मौसम में शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है. अगर हम मौसम के अनुसार रोटी चुनें, तो पाचन बेहतर रहता है, पेट की दिक्कतें कम होती हैं और शरीर खुद को हल्का और एनर्जेटिक महसूस करता है. तो आइए जानते हैं कि गेहूं, बाजरा या रागी, किस मौसम में कौन-सी रोटी खाना सेहत के लिए बेहतर है. 
 
मौसम के साथ खाना क्यों बदलना चाहिए?
 
हमारा शरीर मौसम के हिसाब से काम करता है. सर्दियों में पाचन शक्ति तेज होती है, इसलिए भारी और देर से पचने वाला खाना भी आसानी से हजम हो जाता है. गर्मियों में पाचन धीमा पड़ जाता है और शरीर को ठंडक देने वाले, हल्के खाने वाली चीजें पसंद आती हैं.मानसून में पाचन सबसे ज्यादा कमजोर होता है, इसलिए साधा और हल्का खाना बेहतर रहता है. इसी वजह से पुराने समय में लोग हर मौसम में अलग-अलग अनाज की रोटी खाते थे. 
 
गेहूं की रोटी हर मौसम के लिए कैसी है?
 
गेहूं की रोटी आज सबसे ज्यादा खाई जाती है. यह आसानी से मिल जाती है, बनाना भी आसान है और ज्यादातर लोगों को सूट करती है. गेहूं की रोटी वसंत ऋतु और हल्की सर्दी में सबसे अच्छी मानी जाती है. इस समय पाचन न बहुत तेज होता है, न बहुत कमजोर. गेहूं शरीर को अच्छी एनर्जी देता है और पेट को भरा-भरा रखता है, लेकिन बहुत ज्यादा गर्मी या कड़ाके की ठंड में सिर्फ गेहूं की रोटी खाते रहना हर किसी के लिए सही नहीं होता है. गर्मियों में यह कुछ लोगों को भारी लग सकती है और सर्दियों में शरीर को ज्यादा गर्माहट देने के लिए यह पर्याप्त नहीं होती हैं
 
बाजरे की रोटी में कितनी ताकत होती है?

बाजरे की रोटी खासतौर पर सर्दियों के लिए मानी जाती है. बाजरा गर्म तासीर का अनाज है, यानी यह शरीर में गर्मी पैदा करता है. ठंड के मौसम में जब शरीर को ज्यादा एनर्जी और ताकत की जरूरत होती है, तब बाजरे की रोटी बहुत फायदेमंद होती है. यह गेहूं से भारी होती है और देर से पचती है, लेकिन सर्दियों में यही बात इसे खास बनाती है. बाजरे की रोटी अक्सर घी, मक्खन या गुड़ के साथ खाई जाती है ताकि इसकी सूखी प्रकृति संतुलित हो जाए और पाचन आसान रहे. 
 
रागी की रोटी कितनी हेल्दी है?

रागी की रोटी गर्मियों के लिए बेहतर मानी जाती है. यह शरीर को ठंडक देती है और पेट पर भारी नहीं पड़ती है. गर्मी के मौसम में जब भूख कम लगती है और पाचन कमजोर रहता है, तब रागी पेट को शांत रखने में मदद करती है. यही कारण है कि दक्षिण भारत में रागी को गर्मियों में ज्यादा खाया जाता है. हालांकि, सर्दियों में बहुत ज्यादा रागी खाने से कुछ लोगों को शरीर में जकड़न या ठंड महसूस हो सकती है, इसलिए ठंड के मौसम में इसका सीमित सेवन ही अच्छा रहता है.

ज्वार और मक्का की रोटी

ज्वार और मक्का की रोटियां पेट को देर तक भरा रखती हैं, लेकिन ये स्वभाव से सूखी होती हैं. इन्हें पचाने के लिए अच्छी पाचन शक्ति की जरूरत होती है. इसी वजह से ये रोटियां ज्यादातर उन लोगों को सूट करती हैं जो शारीरिक मेहनत ज्यादा करते हैं, जैसे किसान या मजदूर. अगर आप इन्हें खाते हैं, तो साथ में सब्जी, दाल या थोड़ा घी जरूर लें, ताकि पेट पर जोर न पड़े.

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