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ओम शांति रिट्रीट सेंटर में चल रहे चार दिवसीय योग तपस्या भट्टी का समापन हुआ। इस अवसर पर ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी आशा दीदी ने कहा कि श्रेष्ठ जीवन का आधार श्रेष्ठ संस्कार हैं। संस्कार वो पूंजी है जो जन्म-जन्मांतर आत्मा के साथ जाती है। संस्थान के स्पार्क विंग की अध्यक्षा राजयोगिनी अम्बिका दीदी ने कहा कि मन की स्थिरता के लिए अंतर्मुखता जरूरी है। मानव की चंचल वृत्तियों का कारण बाह्यमुखता है। आत्मा प्रकृति के प्रभाव में आने के कारण ही चेतना की गहराई का अनुभव नहीं कर पाती।
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गुरुग्राम: ओम शांति रिट्रीट सेंटर में चल रहे चार दिवसीय योग तपस्या भट्टी का हुआ समापन