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फरीदाबाद के तिगांव की राजकुमारी और उनका परिवार जाफरी गेंदा फूल की खेती से रोज़ी-रोटी चला रहे हैं, मंडी में 30-40 रुपये किलो दाम मिलता है, मेहनत और उम्मीद से खेती करते हैं.
फरीदाबाद. फूलों की खुशबू से भरे खेत. सुबह की हल्की ओस में चमकते पीले-नारंगी गेंदा और बीचों-बीच खड़ी एक महिला किसान राजकुमारी. चेहरे पर पूरा आत्मविश्वास, साफ कहती हैं गेंदा ऐसा फूल है सही वैरायटी लगा दो तो किसान खाली हाथ नहीं लौटता.
दरअसल, ये कहानी है फरीदाबाद के तिगांव की राजकुमारी और उनके परिवार की जिनकी रोज़ी-रोटी अब गेंदा फूल की जाफरी वैरायटी पर टिकी है. यही वो वैरायटी है जिस पर किसान सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं. मंडी में ठीक-ठाक दाम मिल जाता है नुकसान का डर भी कम रहता है.
राजकुमारी ने Local18 को बताया कि उन्होंने डेढ़ एकड़ में गेंदा लगाया है. बाहर से देखो तो खेती बड़ी आसान लगती है लेकिन असल में इसमें खासी मेहनत लगती है. सबसे पहले खेत की पांच बार जुताई करनी पड़ती है, फिर बीज बोते हैं और सिंचाई शुरू हो जाती है. करीब चार महीने में फसल तैयार हो जाती है इस दौरान दो-तीन बार दवाई छिड़कनी भी पड़ती है.
राजकुमारी बताती हैं कि एक एकड़ में लगभग बीस हजार रुपये का खर्च आ जाता है. कटाई-बुवाई के समय मजदूर भी रखने पड़ते हैं जिन्हें करीब पांच सौ रुपये रोज देने होते हैं. हालांकि, बीज भी राजकुमारी खुद तैयार करती हैं. एक एकड़ में करीब एक किलो बीज लगता है और पौधों के बीच दो-तीन फुट की दूरी रखनी पड़ती है. देखभाल सही हो तो एक एकड़ से तीन से चार क्विंटल तक फूल निकल आते हैं. ये फूल वो ओल्ड फरीदाबाद मंडी, गाज़ीपुर फूल मंडी और छतरपुर मंडी तक ले जाती हैं. अभी मंडी में रेट 30 से 40 रुपये किलो मिल रहा है.
दाम में खर्च और गुजारा हो जाता
राजकुमारी कहती हैं इस दाम में खर्च निकल आता है गुजारा हो जाता है. असली फायदा तो तब है जब रेट 100 रुपये किलो के आसपास पहुंचे. राजकुमारी का पूरा परिवार खेती करता है. दो बेटे हैं एक 15 साल का दूसरा 20 साल का दोनों खेत में हाथ बंटाते हैं. परिवार कासगंज का है लेकिन अब ये लोग जमीन पट्टे पर लेकर खेती करते हैं. एक एकड़ का पट्टा सालाना 40 हजार रुपये में मिलता है. 7 लोगों का परिवार सब इसी खेती पर टिका है. राजकुमारी की बातों से साफ झलकता है कि छोटे किसान के लिए खेती सिर्फ पेशा नहीं मजबूरी और उम्मीद दोनों है. जाफरी गेंदा अमीर भले न बनाए लेकिन घर का चूल्हा चलता रहता है. मुस्कुराते हुए आखिर में बस इतना कहती हैं, मेहनत करो तो गेंदा कभी धोखा नहीं देता… बस मौसम और मंडी साथ दे दे.
About the Author
Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें
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