उन्होंने आगे कहा, वेनेजुएला का क्रूड ऑयल असल में शिपिंग कॉस्ट के साथ रिलायंस को मिडिल ईस्ट की सप्लाई से थोड़ा ज्यादा महंगा पड़ेगा. दूसरे शब्दों में कहे, तो तेल की यह खरीद मुख्य रूप से ट्रंप प्रशासन को एक राजनीतिक संकेत देने के लिए है. बताया जा रहा है कि वेनेजुएला का लाखों बैरल तेल वहां के समुद्री टैंकरों और जहाजों में अटका हुआ है. इनमें से लगभग लगभग 30-50 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल को अमेरिका मार्केट प्राइस पर दूसरे देशों को बेचने की तैयारी में है. इससे मिला पैसा ट्रंप के कंट्रोल में रहेगा, जिसका इस्तेमाल वेनेजुएला और अमेरिका के विकास में किया जाएगा.
रूस से कम हो रही तेल की खरीद
बीते कुछ महीनों में अमेरिका के दबाव में आकर दुनिया के कई देश रूस से क्रूड ऑयल की खरीद कम कर रहे हैं. ऐसे में तेल की सप्लाई भी बनी रहे और दूसरे देशों से भी तेल खरीदने के रास्ते खुले व साथ ही पश्चिमी देशों के दबाव से भी बचा जा सके इसके लिए रिलायंस अमेरिका की मंजूरी के साथ वेनेजुएला से तेल खरीदना चाहता है. इसकी एक और वजह यह भी हो सकती है कि वेनेजुएला का क्रूड ऑयल ब्रेंट क्रूड से 5-8 डॉलर प्रति बैरल सस्ता होता है क्योंकि वेनेजुएला का क्रूड ऑयल और सल्फर मिला हुआ होता है. रिलांयस के पास जामनगर की अपनी रिफाइनरी में इसे प्रोसेस करने की कैपेसिटी भी है, तो सप्लाई के सोर्सेज बढ़ाने के लिए वेनेजुएला का क्रूड ऑयल उसके लिए एक बेहतर ऑप्शन है.
पहले भी रिलायंस खरीदता था तेल
कैसे होगा पेमेंट?
तेल की खरीद के बाद इसके भुगतान को लेकर ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि रिलायंस US बॉन्ड खरीदकर कच्चे तेल का पेमेंट नहीं करेगी, बल्कि खबरों के मुताबिक वे बिक्री से मिली रकम को ग्लोबल बैंकों में US-कंट्रोल्ड अकाउंट्स में जमा करेंगे।
चेलानी ने कहा, “रिलायंस सीधे US ट्रेजरी को पेमेंट नहीं करेगी. इसके बजाय, बिक्री से मिली रकम ‘विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त बैंकों’ में US-Controlled अकाउंट्स में जमा की जाएगी.”
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Source: https://www.abplive.com/business/reliance-industries-will-find-it-more-expensive-to-buy-crude-oil-from-venezuela-compared-to-middle-eastern-countries-3072709



