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क्या WhatsApp पर भेजे हुए मैसेज एकदम सुरक्षित नहीं हैं और उन्हें कोई और भी पढ़ सकता है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि WhatsApp के मालिकाना हक वाली कंपनी मेटा के खिलाफ एक मुकदमा दायर किया गया है. इसमें दावा किया गया है कि कंपनी ने व्हाट्सऐप चैट सर्विस की प्राइवेसी और सिक्योरिटी को लेकर झूठे दावे किए हैं. दूसरी तरफ मेटा ने इन दावों का खंडन किया है. आइए जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या है.
मेटा पर लगा गलत दावे करने का आरोप
शुक्रवार को अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में एक ग्रुप ने मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. इसमें दावा किया गया है कि मेटा और व्हाट्सऐप सभी यूजर्स के प्राइवेट कम्यूनिकेशन को स्टोर, एनालाइज और वर्चुअली एक्सेस कर सकती हैं. मुकदमे में दोनों कंपनियों के अधिकारियों पर व्हाट्सऐप के अरबों यूजर्स को मूर्ख बनाने का आरोप भी लगाया गया है. मुकदमा दायर करने वाले ग्रुप में ऑस्ट्रेलिया, भारत, ब्राजील, मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के याचिकाकर्ता शामिल हैं. इनका आरोप है कि मेटा यूजर कम्यूनिकेशन को स्टोर करती है और इसके कर्मचारी चैट्स को एक्सेस कर सकते हैं.
मेटा का इस पर क्या कहना है?
अपने खिलाफ लगे आरोपों का मेटा ने खंडन किया है. कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि लोगों के व्हाट्सऐप मैसेज एनक्रिप्टेड नहीं है, ऐसे सभी दावे झूठे हैं. व्हाट्सऐप एक दशक से एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड है. बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है, जब मेटा पर प्राइवेसी के उल्लंघन के आरोप लगे हैं. कंपनी लगातार ऐसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप से जुड़े ऐसे आरोपों से जूझती रही है. कई बार ऐसा भी हो चुका है, जब कंपनी पर नियमों के उल्लंघन को लेकर जुर्माना लगाया गया है और सीईओ मार्क जुकरबर्ग को भी सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी है.
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