क्या सच में सिही गांव जुड़ा है पांडवों से? जानिए क्या है इसकी असल सच्चाई Haryana News & Updates

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फरीदाबाद के सिही गांव को लेकर इतिहास और जनश्रुति में मतभेद है. कुछ लोग इसे महाभारत काल और पांडवों के पांच गांवों से जोड़ते हैं जबकि इतिहासकार इसके ठोस प्रमाण नहीं मानते. वहीं संत सूरदास की जन्मस्थली के रूप में इस गांव का सांस्कृतिक महत्व आज भी गहराई से जुड़ा हुआ है.

फरीदाबाद: फरीदाबाद का सिही गांव नाम सुनते ही एक ऐसा गांव सामने आता है जहां हर गली हर मंदिर और हर कहानी में इतिहास की झलक दिखाई देती है. यह वही गांव है जिसे लोग भक्ति काल के महान कवि संत सूरदास की जन्मस्थली मानते हैं, लेकिन इसी गांव को लेकर एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है कि क्या यह वही गांव है जिसका संबंध महाभारत काल और पांडवों के मांगे गए पांच गांवों से है या फिर यह सिर्फ एक जनश्रुति है?

सिही गांव को महाभारत काल से जोड़ना सही नहीं

इसी सवाल और कंफ्यूजन को दूर करने के लिए Local18 ने फरीदाबाद के डीएवी कॉलेज की हिस्ट्री प्रोफेसर कमलेश से बातचीत की. प्रोफेसर कमलेश ने साफ तौर पर बताया सिही गांव को सीधे महाभारत काल या पांडवों के पांच गांवों से जोड़ने का कोई पुख्ता ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है. हो सकता है कि लोक कथाओं, जनश्रुतियों या सांस्कृतिक परंपराओं में श्रीपत नाम आता हो लेकिन इसे सीधे महाभारत काल से जोड़ना सही नहीं है. अभी तक ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया है जो यह साबित कर सके कि सिही गांव वही पांच गांवों में से एक था.

सिही गांव सूरदास जी की जन्मस्थली

प्रोफेसर कमलेश ने बताया संत सूरदास जी की जन्मस्थली के रूप में सिही गांव के पास कुछ सीमित लेकिन महत्वपूर्ण प्रमाण जरूर हैं. खासतौर पर वल्लभ संप्रदाय के कवि हर राय जी की रचना भाव प्रकाश में इस क्षेत्र को सूरदास जी की जन्मभूमि बताया गया है. माना जाता है कि सूरदास जी का जन्म 1478 में वैशाख शुक्ल पंचमी के दिन हुआ था.

इतिहास इसे अभी तक प्रमाणित नहीं करता

प्रोफ़ेसर कमलेश ने बताया गांव की संस्कृति और परंपराओं में आज भी सूरदास जी की छाप साफ दिखाई देती है. यहां का प्राचीन नागेश्वर मंदिर आसपास बना पार्क और हर साल धूमधाम से मनाई जाने वाली सूरदास जयंती इस बात का सबूत हैं कि गांव के लोगों के दिलों में आज भी सूरदास जीवित हैं. यह इलाका इंद्रप्रस्थ और कुरुक्षेत्र के सांस्कृतिक क्षेत्र के करीब जरूर पड़ता है इसलिए लोग इसे महाभारत काल से जोड़कर देखते हैं लेकिन इतिहास इसे अभी तक प्रमाणित नहीं करता.

सिही गांव के निवासी और संत सूरदास मंदिर के पुजारी महेश भारद्वाज ने बताया मैं पिछले 38 सालों से यहां पूजा करा रहा हूं यह गांव पांडवों के समय का है और उन्हीं पांच गांवों में से एक है जो पांडवों ने मांगे थे. पहले इस गांव का नाम श्रीपत था जो समय के साथ बदलकर सिही हो गया. यहां का नागेश्वर मंदिर बहुत प्राचीन है और इस जगह को बेहद पवित्र माना जाता है.

सिही गांव की आबादी करीब 30 हजार के आसपास

फरीदाबाद के सिही गांव की आबादी करीब 30 हजार के आसपास है. यहां सरकारी लड़कियों का 12वीं तक का स्कूल भी है लेकिन इसके बावजूद गांव की स्थिति बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती. गांव में सफाई की काफी दिक्कत है और खासकर जो मंदिर जाने वाला रास्ता और चौक है वहां गंदगी फैली रहती है. लोगों ने कई बार नेताओं अधिकारियों से शिकायत भी की लेकिन अभी तक कोई खास सुधार नहीं हुआ है. गांव में एक आंगनबाड़ी केंद्र भी है. इलाज के लिए गांव से फरीदाबाद का बीके अस्पताल करीब 8 किलोमीटर दूर पड़ता है.

गांव में प्राचीन हनुमान मंदिर और संत सूरदास जी का मंदिर भी है जो गांव की पहचान को खास बनाते हैं. वहीं दूसरी तरफ फरीदाबाद का तिलपत गांव दिल्ली से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर यानी दिल्ली से सटा हुआ इलाका है. यह गांव आज के समय में काफी विकसित माना जाता है. यहां स्कूल से लेकर हर तरह की जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं. तिलपत गांव की एक खास बात यह भी है कि यहां हर साल होली बड़े ही अलग और खास तरीके से मनाई जाती है जो आसपास के इलाकों में भी चर्चा का विषय रहती है.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

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