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अंबाला सिटी। ग्राम पंचायत नहोनी बनाम लक्ष्मण सिंह केस में अदालत ने फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया को अपनाए बिना उसकी दुकान या संपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकता। इसी के साथ कोर्ट ने ग्राम पंचायत द्वारा दायर अपील का योग्यताहीन हुए खारिज कर दिया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. अशोक कुमार की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
नाहोनी गांव के निवासी लक्ष्मण सिंह ने ग्राम पंचायत के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा का सूट दाखिल किया था। लक्ष्मण सिंह का कहना था कि वह वर्ष 1988 से गांव की दुकान नंबर 3 में बतौर किराएदार काबिज है। नियमित रूप से 245 रुपये महीना किराया दे रहा है। उसका आरोप था कि वर्तमान सरपंच गांव की आपसी गुटबाजी के कारण उसे जबरन दुकान से निकालकर उसे नीलामी पर चढ़ाना चाहते हैं।
पंचायत की दलीलें
दूसरी ओर, ग्राम पंचायत ने दलील दी थी कि लक्ष्मण सिंह किराया देने में कोताही बरत रहा है। पंचायत का दावा था कि दुकान की हालत जर्जर हो चुकी है और वहां अवैध शराब बेचने की शिकायतें भी मिल रही हैं, जिससे पास के स्कूल के बच्चों और राहगीरों को परेशानी होती है। पंचायत ने यह भी तर्क दिया कि पंजाब विलेज कॉमन लैंड्स एक्ट के तहत सिविल कोर्ट को इस मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है।
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