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संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sun, 19 Apr 2026 12:13 AM IST
कुरुक्षेत्र। गडग में संबोधित करते कुवि कुलसचिव प्रो विरेंदर । संस्थान
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल ने कहा कि औपनिवेशिक प्रभाव ने उत्तर भारत की जीवनशैली को काफी हद तक प्रभावित किया है जबकि दक्षिण भारत में पारंपरिक मूल्यों और रीति-रिवाजों का संरक्षण अधिक देखने को मिलता है। वे केएलई सोसाइटी के जगद्गुरु तोंटदार्य कॉलेज, गडग में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। यह संगोष्ठी समकालीन भारतीय साहित्य में नवीन प्रवृत्तियां विषय पर भाषा विभाग द्वारा आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन विभिन्न गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर किया गया। अपने संबोधन में प्रो. वीरेंद्र पाल ने विज्ञान और साहित्य के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि जहां विज्ञान अनुभवजन्य तथ्यों पर आधारित होता है, वहीं साहित्य मानवीय भावनाओं और संवेदनाओं से गहराई से जुड़ा होता है। संवाद
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औपनिवेशिक प्रभाव ने बदली उत्तर भारत की जीवनशैली, दक्षिण ने सहेजी परंपराएं : प्रो. वीरेंद्र पाल