एन. रघुरामन का कॉलम: हर जीत के पीछे रहे उन अज्ञात कॉन्ट्रिब्यूटर्स की भी सराहना करें Politics & News

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क्या आप बता सकते हैं कि इस रविवार ईडन गार्डन मैदान पर जब इंडिया और वेस्ट इंडीज के बीच क्वार्टर फाइनल खेला गया, तब किसने किसको यह कहा कि ‘शांत रहो और काम पूरा होने तक क्रीज पर टिके रहो’? जब तक जोशीले क्रिकेट प्रशंसक जवाब सोचें, मैं आपको और अनजान कॉन्ट्रिब्यूटर्स की ओर ले चलता हूं। हममें से अधिकतर ने देखा है कि नई गेंद से, खासकर टी20 मैचों में, जसप्रीत बुमराह शुरू में उनके तयशुदा चार में से कम से कम दो ओवर तो गेंदबाजी करते ही हैं। लेकिन इस मैच में 11वें ओवर तक उन्होंने एक ही ओवर डाला। मतलब, कप्तान सूर्य कुमार यादव ने उन्हें ट्रंप कार्ड की तरह बचाकर रखा और तय किया कि जब मैच का रुख मोड़ना होगा, तब इस्तेमाल करेंगे। वेस्ट इंडीज की ताबड़तोड़ बल्लेबाजी पर लगाम कसने के लिए भारत को तत्काल विकेट की जरूरत थी। फॉर्मेट चाहे कोई हो, जरूरत पड़ने पर किसी भी कप्तान की सर्वाधिक सहायता बुमराह ने ही की है। वेस्ट इंडीज की ओर से रनों की बौछार देख कर खिलाड़ियों के साथ प्रशंसकों का उत्साह भी टूटने लगा था। लेकिन 12वें ओवर में जैसे ही बुमराह ने रन-अप लिया, अचानक स्टैंड्स से ऊर्जा हिलोरें लेने लगी। शिमरोन हेटमायर हिटिंग कर रहे थे और चेस रन बटोर रहे थे। हेटमायर के हाथ बहुत तेज चलते हैं और उन्हें बाउंस का भी भय नहीं। लेकिन बुमराह की सटीक गेंदबाजी उन्हें बांधे रख सकती थी। उन्होंने शुरुआती दो गेंदें स्लोअर डालीं और तीसरी ही हार्ड लेंथ गेंद पर हेटमायर को आउट कर दिया। फिर उसी ओवर में बुमराह ने गुड लेंथ से थोड़ी छोटी गेंद फेंकी, जिसने क्रीज पर जमे चेस की पारी भी खत्म कर दी। अब मैं आपको दूसरी पारी में ले चलता हूं। एक तरफ संजू सैमसन दीवार की तरह खड़े थे, लेकिन दूसरा छोर डगमगा रहा था। तीसरे ओवर में अभिषेक शर्मा, 5वें में ईशान किशन और 11वें ओवर में सूर्य कुमार यादव का विकेट चला गया। जब सैमसन ने अर्द्धशतक पूरा किया, तब भारत का स्कोर 98/2 था। उनके अर्धशतक के साथ पूरा स्टेडियम गूंज उठा और गौतम गंभीर कुर्सी से उठकर सैमसन का उत्साह बढ़ाने लगे। उन्होंने कप्तान यादव की प्रशंसा स्वीकार की और गंभीर की ओर देखा, जैसे धन्यवाद देते हुए कह रहे हों कि मैंने अपना काम पूरा किया। इसी वक्त गंभीर ने इशारे से कहा, धीरे खेलो और टिके रहो। सैमसन ने भी पलकों के इशारे से जवाब दिया, ‘मैं टिका रहूंगा।’ और उन्होंने वादा निभाया। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि एक रन बाद ही, 99 पर यादव भी आउट हो जाएंगे। संजू में अर्द्धशतक पूरा करने का उत्साह भी नहीं दिखा। जिस खिलाड़ी ने 26 गेंदों में 53 रन बनाए, उसी ने अगली 24 गेंदों में 44 रन भी ठोके, जबकि वो जानते थे कि उस वक्त सिर्फ वही क्रीज पर जमे इकलौते बल्लेबाज हैं। बाकी दो आए, थोड़ा रुके और चले गए। संजू धीरे, टिक कर और सतर्कता से खेल रहे थे, लेकिन इच्छित लक्ष्य की ओर बढ़ रहे थे। यकीनन, संजू के 97 रनों ने भारत को सेमीफाइनल में पहुंचाया। लेकिन याद रखें कि टीम के अन्य सदस्यों के छोटे-बड़े योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह वैसा ही है, जैसे आपके एसएससी और एचएससी के रिजल्ट आने वाले हों और सफलता का जश्न मनाएं तो उस मां को ना भूलें, जो देर रात तक आपके साथ जागती रहीं। उन ग्रैंड पैरेंट्स को मत भूलिए, जिन्होंने कई बार मंदिर जाकर आपके लिए प्रार्थना की और उस पिता को भी मत भूलिए, जो आपको परीक्षा केंद्र तक छोड़ने गए और आपको गुड लक कहा। निस्संदेह आपने पढ़ाई की और अंक हासिल किए। हीरो तो आप ही हैं, लेकिन अन्य फैक्टर्स को अनदेखा नहीं कर सकते। फंडा यह है कि उन अज्ञात फैक्टर्स और नायकों की प्रशंसा करने की आदत डालें, जिन्होंने आपको जिताने में मदद की। ऐसे जज्बे ही होली की तरह जीत को रंगीन बना देते हैं।

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एन. रघुरामन का कॉलम: हर जीत के पीछे रहे उन अज्ञात कॉन्ट्रिब्यूटर्स की भी सराहना करें