एन. रघुरामन का कॉलम: सलीके की ड्रेसिंग छात्र से नौकरीपेशा बनने की प्रक्रिया आसान बनाती है Politics & News

[ad_1]

  • Hindi News
  • Opinion
  • N. Raghuraman’s Column Dressing Well Eases The Transition From Student To Working Professional

9 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

‘फैमिली मैन’ सीजन-3 में जयदीप अहलावत द्वारा निभाया गया रुक्मा का किरदार- एक ऐसा विलेन, जिसके लंबे बाल हैं, हाथ में गन है और वह ड्रग डीलर है। पैसों के लिए किसी को भी मार सकता है।

सोचिए, वही रुक्मा तिरुपति की पहाड़ियों पर टहलता दिख जाए तो मैं आश्वस्त हूं कि वहां मुंडे हुए सिर का हर व्यक्ति उसे दुबारा जरूर देखेगा। इसलिए नहीं कि लोग उन्हें एक्टर के तौर पर पहचानते हैं, बल्कि इसलिए कि उनके बाल तो लंबे हैं और वह मुंडे हुए सिर वालों के बीच चल रहे हैं। इसे ‘काउंटरकल्चर’ कहा जा सकता है।

यह शब्द ऐसे समूह या हरकतों के लिए इस्तेमाल होता है, जो मूल्यों, मापदंडों और व्यवहार में मुख्यधारा के समाज से अलग या बिल्कुल विपरीत हों। संक्षेप में, अमेरिका में युवाओं के बीच अपियरेंस से प्रभावित करने की कोशिश को ‘काउंटरकल्चर’ कहा जा रहा है। इसी तरह पिछले हफ्ते अमेरिका की सिलिकॉन वैली में भी युवाओं की भीड़ उन 40 लोगों को देखकर हैरत में पड़ गई, जो ‘काउंटरकल्चर’ को प्रमोट कर रहे थे।

सोच रहे हैं कि वे क्या कर रहे थे? वे बिल्कुल पारंपरिक बिजनेस एग्जीक्यूटिव जैसे दिख रहे थे- थ्री-पीस सूट, टाई, चमकते जूते और हाथ में ब्रीफकेस, कुछ पेपर्स और लैपटॉप। सिलिकॉन वैली ऐसी जगह है, जहां टेक इंडस्ट्री में लोग अकसर सुस्त टेक ब्रो की तरह दिखते हैं। कपड़ों में शार्प टेलरिंग नहीं होती। अधिकांश समय हुडी-जींस में रहते हैं, लेकिन अरबों डॉलर की कंपनियां बना रहे होते हैं।

पिछले बुधवार यही 40 स्टार्टअप फाउंडर्स एक एटीकेट वर्कशॉप के लिए फोर-सीजन होटल की लॉबी में आए, जहां उन्हें बताया गया कि कपड़े कैसे पहनें, परफ्यूम कैसा हो, कैसे छोटी-छोटी बातें करें और कैसे ‘कैवियार लिक’ करें। यह खाने की किसी चीज को अंगूठे और तर्जनी के बीच सलीके से पकड़ने, चखने और बाद में उंगलियों को टिश्यू से पोंछकर कोट की जेब में रखने का स्टाइल है।

इस चलन पर बिहेवियरल ऑब्जर्वेशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि टेक ब्रेन धीर-धीरे अपनी तकनीक की ताकत के प्रदर्शन से आगे बढ़ कर निवेशकों को अपने सोशल एटीकेट से प्रभावित करने लगे हैं। आज के इन्वेस्टर्स एक ‘कम्प्लीट पैकेज’ चाहते हैं। यानी, वे ऐसे तकनीकी दक्ष लोग चाहते हैं, जिनमें सामंजस्य, बेहतर संवाद और सोच के साथ सम्मानजनक तरीके से ड्रेसिंग का गुण भी हो।

एटीकेट फिनिशिंग स्कूल चलाने वालों ने वहां आए प्रतिभागियों से कहा कि ‘दस साल पहले काेई अनाड़ी लेकिन उम्दा आंत्रप्रेन्योर सफल हो सकता था, लेकिन आज बड़े मंचों पर प्रभावी होने के लिए उसे अपना सामाजिक कौशल भी बढ़ाना होगा। ऐसे मौके आएंगे, जब अच्छा पहनावा आपको अतिरिक्त इन्वेस्टर दिला देगा। क्योंकि उसे लगेगा कि आप भरोसेमंद हैं और आप कॉन्फिडेंस दिखा रहे हैं।’

जाहिर तौर पर आज के निवेशकों को पसंद नहीं कि टेक-ड्रिवन युवा पैसे की बातचीत करने ऐसे आए, जैसे सीधे जिम से आ रहा हो। अगर आप कॉलेज में हैं और एआई के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, क्योंकि यह तेजी से बढ़ रहा है- तो मेरी सलाह है कि ड्रेसिंग सेंस को जल्द समझना शुरू कर दें। कैजुअल एटीट्यूड के साथ कॉलेज न जाएं। वह भले ‘अराइव्ड’ जैसा लगता हो, लेकिन भरोसा कीजिए कि सिलिकॉन वैली जैसा ट्रेंड यहां भी असर दिखाने लगा तो यह इमेज ज्यादा दिन नहीं चलेगी। किसी के कपड़े पहनने का तरीका उसके मूड और आत्मविश्वास पर बड़ा असर डालता है।

अच्छा पहनावा अकसर ‘एन-क्लोथ्ड कॉग्निशन’ की ओर ले जाता है- जहां कपड़े किसी के सोचने, महसूस करने और परफॉर्म करने का तरीका बदल देते हैं। अपियरेंस के आधार पर लोग अकसर पहली मुलाकात में ही दूसरों के बारे में राय बना लेते हैं। अच्छा पहनावा आपको ज्यादा सक्षम, भरोसेमंद और सम्मानजनक दिखा सकता है, जो आपके आइडियाज या स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग मांगते समय बहुत महत्वपूर्ण है।

फंडा यह है कि सलीके से कपड़े पहनना एक हद तक पहले इंटर्नशिप, फिर नौकरी और बाद में स्टार्ट-अप्स की दुनिया में आपके प्रवेश को सहज बना देगा।

खबरें और भी हैं…

[ad_2]
एन. रघुरामन का कॉलम: सलीके की ड्रेसिंग छात्र से नौकरीपेशा बनने की प्रक्रिया आसान बनाती है