एन. रघुरामन का कॉलम: विनर माइंडसेट वाले लोग ‘करो या मरो’ के कॉन्सेप्ट को बदलते हैं! Politics & News

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बचपन में टिम लिली ने अपने बेडरूम की दीवारों पर फ्लाइट मैग्जीनों से काटी गई तस्वीरें चिपका रखी थीं। 13 की आयु में उन्होंने अपना पहला फ्लाइट लेसन सीखा और 16 की आयु में उन्होंने अपनी पहली एकल उड़ान भरी। उन्होंने सेना में, कॉम्बैट मिशन पायलट-इन-कमांड के रूप में सेवा दी। उन्होंने एक विशेष रूट पर सैकड़ों मर्तबा ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर उड़ाया था, यह जाने बिना कि उनके पुत्र सैम की उसी हेलीकॉप्टर से जुड़े एक हादसे में मृत्यु हो जाएगी और सैम को हादसे में हुई तमाम मौतों के लिए दोषी ठहराया जाएगा। सैम (28)- जिनकी शादी 4 अक्टूबर 2025 को होने वाली थी- अमेरिकन एयरलाइंस 5342 के फर्स्ट ऑफिसर थे, जब 29 जनवरी 2025 को रोनाल्ड रीगन वॉशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट के निकट हवा में ही उसकी टक्कर एक ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर से हो गई। दोनों एयरक्राफ्ट्स में सवार सभी 67 लोगों की मृत्यु हो गई। यह दो दशकों में अमेरिका की सबसे घातक एविएशन दुर्घटना थी। उस दिन के बाद से टिम और उनकी पत्नी शेरी संभवतः कई बार वह वीडियो देख चुके होंगे, जिसमें उनके पुत्र के जीवन के अंतिम क्षण प्रदर्शित थे। इस दम्पती ने सैम को उसके तीन भाई-बहनों के साथ पाला-पोसा था। उड़ान से सैम का परिचय तब हुआ था, जब 10 वर्ष की आयु में वह अपने पिता के साथ दोपहर के भोजन के लिए बाहर गया था। टिम को लगता था कि सैम अपने काम में परफेक्ट था। दुर्घटना के बाद टिम जांचकर्ता और एक्टिविस्ट की भूमिका में आ गए और दुर्घटना के संभावित कारणों पर सवाल उठाने लगे। कॉकपिट रिकॉर्डिंग की ट्रांसस्क्रिप्ट्स के आधार पर टिम और शेरी ने मीडिया को कई इंटरव्यू दिए। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, सैम ठीक उसी तरह उड़ान भर रहा था, जैसे उसे करना चाहिए था। दम्पती और यात्रियों के परिजनों के वॉट्सएप ग्रुप ने मुकदमों, बीमा संबंधी मुद्दों सहित कई विषयों पर संवाद शुरू किया। तब अचानक उन्हें 115 पृष्ठों का एक लॉ-स्यूट प्राप्त हुआ, जिसमें सैम और उनके सह-पायलट पर गंभीर गलतियां करने का आरोप लगाया गया था, जिनके चलते हादसा हुआ। दम्पती ने स्वयं को असहाय महसूस किया, क्योंकि ताकतवर लोग एक मृत व्यक्ति पर जिम्मेदारी डालकर बचने की कोशिश कर रहे थे। टिम ने सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखते हुए लिखा, यह दावा बेबुनियाद है कि पायलट्स ने अपनी जिम्मेदारियां ठीक से नहीं निभाईं। मामले में दायर एक दस्तावेज में अमेरिकी सरकार ने हादसे के लिए अपनी गलती स्वीकार की और कहा कि हेलीकॉप्टर पायलट जेट से बचने में नाकाम रहे थे, किंतु साथ ही यह भी कहा कि अमेरिकन एयरलाइंस के पायलट भी सतर्कता ​दिखने में असफल रहे और सेना के हेलीकॉप्टर से बचाव नहीं कर सके। इसके बाद उन्हें एक ईमेल मिला, जिसमें कहा गया कि कुछ परिजन उन्हें ग्रुप चैट से हटाना चाहते हैं। किंतु दम्पती ने हर मोर्चे पर संघर्ष किया। मामला नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (एनटीएसबी) के समक्ष पहुंचा, जो गंभीर दुर्घटनाओं की जांच करता है। नौ घंटे की रिपोर्टों और विचार-विमर्श के बाद एनटीएसबी ने निष्कर्ष निकाला कि दुर्घटना प्रणालीगत विफलताओं के कारण हुई, जिनके लिए फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) और सेना जिम्मेदार थे, न कि विमान पायलट। एनटीएसबी ने कहा, फ्लाइट 5342 के क्रू ने हेलीकॉप्टर को तब तक नहीं देखा, जब तक टक्कर से बचना असंभव नहीं हो गया था। और साथ ही 50 अनुशंसित बदलावों की सूची जारी की, जिनमें एयर ट्रैफिक कंट्रोल प्रक्रियाओं में संशोधन से लेकर सेना के लिए नए प्रशिक्षण प्रोटोकॉल लागू करने तक के उपाय शामिल थे। कुछ लोगों के लिए शोक की प्रक्रिया निजी होती है, लेकिन टिम और शेरी जैसे विनर माइंडसेट वाले लोगों के लिए उनका शोक संवाद का माध्यम बना और अंततः अपने पुत्र को उस आरोप से मुक्त कराना उनका लक्ष्य बन गया, जिसे उस पर थोपना अधिकारियों के लिए आसान था। फंडा यह है कि हम सभी एक साहसपूर्ण कॉन्सेप्ट को सुनते हुए बड़े हुए हैं- ‘करो या मरो।’ फिर एक व्यावहारिक पीढ़ी आई, जिसने इसे नए मायने दिए- ‘मरने से पहले करो।’ किंतु विनर माइंडसेट वाले लोगों ने इसे और निखारकर यह कर दिया है- ‘जब तक करो नहीं, तब तक मरो नहीं।’

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एन. रघुरामन का कॉलम: विनर माइंडसेट वाले लोग ‘करो या मरो’ के कॉन्सेप्ट को बदलते हैं!