[ad_1]
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते सोमवार को लोकसभा में चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया के संघर्ष से पनपे वैश्विक व्यवधान जारी रह सकते हैं। उन्होंने अपील की कि देशवासी कोविड काल के जैसे ही अब भी तैयार और एकजुट रहें। अगले दिन उन्होंने यही राज्यसभा में दोहराया और राज्यों से गरीबों, मजदूरों, प्रवासियों और अन्य जरूरतमंदों तक राहत और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई सुनिश्चित करने में सहयोग मांगा। उन्होंने याद किया कि कैसे कोविड संकट में देश ने एकजुट होकर चुनौती का सामना किया था। उन्होंने कहा कि आज फिर वैसे ही प्रयासों की जरूरत है। और बुधवार को सरकार धीरे-धीरे नियम कड़े करने लगी। सरकार ने घोषणा की कि यदि आपके घर तक पाइप्ड नेचरल गैस (पीएनजी) की लाइन हो, तब भी आप कनेक्शन नहीं लेते तो सरकार तीन माह बाद आपकी एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) सप्लाई बंद कर सकती है। सरकार का यह कदम तब सामने आया, जब युद्ध के कारण आयात प्रभावित होने से एलपीजी की किल्लत हो रही है। ऐसा करके सरकार ने संकेत दिया है कि इस दौर से निकलने के लिए सोच बदलनी जरूरी है। ‘बिजनेस एज यूजुअल चलता रहेगा’ वाला नजरिया काम नहीं करेगा। आंत्रप्रेन्योर और आर्थिक गतिविधियों को चलाने वाले शीर्ष लोगों ने इस संकेत को सबसे पहले समझा है। बीते तीन दिनों में मैं आंत्रप्रेन्योर्स के साथ कुछ बैठकों में शामिल हुआ, जहां सभी का कहना था कि कुछ महीने काफी उथल-पुथल भरे रहेंगे।’ वे पहले ही अपने एचआर प्रमुखों को संकेत दे चुके हैं कि कमर कस लें। नए वित्तीय वर्ष में अप्रैल में होने वाली वेतन वृद्धि के मद्देनजर एचआर को निर्देश दिए गए हैं कि इन्क्रीमेंट के नाम भेजने से पहले वह प्रदर्शन का आकलन करे और ‘नॉन परफॉर्मिंग’ व ‘अवांछित’ पदों को हटा दे। मौजूदा माहौल वर्कफोर्स को साफ संदेश दे रहा है। हम जैसे ज्यादातर मिड-लेवल कर्मचारियों के लिए यह महज एक और व्यस्त सीजन नहीं है, बल्कि खुद का महत्व साबित करने और संगठन में अपनी जगह मजबूत करने का अहम मौका है। इसके कुछ सुझाव यहां पेश हैं। 1. अपने आउटपुट और फोकस को दोगुना करें : अतिरिक्त जिम्मेदारियां लेकर और उच्च गुणवत्ता के परिणाम देकर कर्मचारी महज दस में से एक बने रहने के बजाय उस दस में से महत्वपूर्ण बनकर संगठन के लिए जरूरी एसेट में बदल सकता है। 2. वर्क फ्रॉम होम के लिए न कहें : भले वर्क फ्रॉम होम अब मानक व्यवस्था है, लेकिन मौजूदा हालात में रणनीतिक तौर पर ऑफिस में मौजूद रहने की जरूरत है। जहां फैसले लिए जाते हैं और चुनौतियों का सामना किया जाता है, वहां फिजिकली मौजूद रहना आपके कमिटमेंट और एकजुटता को दिखाता है। वीडियो कॉल पर इसे दर्शा पाना कठिन है। यह नेतृत्व को बताता है कि आप मुश्किल समय में कंपनी के सर्वाइवल और ग्रोथ के लिए समर्पित हैं। 3. दिखाएं कि आप त्याग कर सकते हैं : आप लंबे वीकेंड कनेक्ट कर परिवार के साथ ब्रेक प्लान कर सकते हैं, जैसे आज राम नवमी, फिर चौथा शनिवार-रविवार और सोमवार को महावीर जयंती का ऑप्शनल हॉलिडे। कई लोग ऐसे लंबा ब्रेक ले सकते हैं। लेकिन इसमें एक और कैजुअल या मेडिकल लीव जोड़ना न सिर्फ आपके बॉस, बल्कि टॉप मैनेजमेंट को भी गलत महसूस करा सकता है। 4. अपनी प्रोडक्टिविटी दिखाएं : जरूरत से ज्यादा प्रचार न करते हुए कुशलता के साथ अपना वास्तविक काम संगठन में सही लोगों को बताएं। फंडा यह है कि जब हम ‘कठिन दौर’ में जा रहे हैं तो अपनी जॉब डिस्क्रिप्शन से आगे बढ़िए और कंपनी के लिए यह नामुमकिन कर दीजिए कि वह आपके बिना काम की कल्पना तक कर सके।
[ad_2]
एन. रघुरामन का कॉलम: ये दोगुनी क्षमता से काम करने और बॉसेस को दिखाने का समय है


