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3 घंटे पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु
एफिल टॉवर को संचालित करने वाली कंपनी (फ्रेंच में SETE) के एमडी पैट्रिक ब्रैंको रुइवो अपनी जिंदगी में पहली बार इस हफ्ते की शुरुआत में मुंबई में थे और उनके हाथों में बहुत बड़ा काम था। उन्हें दुनिया के सात अजूबों में से एक एफिल टॉवर के लिए भारत से आगंतुकों की संख्या साल 2026 तक दोगुनी करनी है, जो कि अभी यहां रोजाना आने वाले 25 हजार लोगों का 4 फीसदी है।
बांग्लादेश के फ्रांसीसी दूतावास में तीन साल तक राजनयिक रहे पैट्रिक नवंबर 2018 में SETE के एमडी बने। इस दौरान जब उन्होंने गौर किया कि भारत से लोगों के यात्रा का तरीका बदला है, बड़े समूहों के बजाय अब लोग जोड़ों में और नए-नेवेले परिवार एकल यात्रा पर आ रहे हैं, तब उन्हें अहसास हुआ कि भारत से संख्या काफी हद तक कम हो गई है।
उन्होंने यह समझने पर ध्यान केंद्रित किया कि भारतीय पर्यटक क्या चाहते हैं और उन्हें एक के बाद एक वह सुविधा देनी शुरू की। उन्होंने समझा कि अभी तक जिन नक्शे-कदम पर वह चल रहे थे, वो इन एकल भारतीय परिवारों को आकृष्ट करने में कारगर नहीं होगा।
पहली चीज उन्हें ये समझ में आई कि भारतीय लोग एफिल टॉवर घूमने के लिए कतार में खड़े होकर टिकट लेने या टॉवर के पहले माले पर बने लाउंज या दो रेस्तरां में जाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसलिए उन्होंने टिकट के लिए कतार में इंतजार करने की व्यवस्था से दूर यूपीआई की शुरुआत की।
उन्होंने आधिकारिक एफिल टॉवर तोहफों के लिए एक ऑनलाइन दुकान की भी शुरुआत करवाई, जहां सिर्फ फ्रांस में बने गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिलें। उन्होंने उन रेस्तरां में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया और रेस्तरां का समय रात में 11.45 तक बढ़ा दिया क्योंकि अधिकांश भारतीय रात में टॉवर पर जाना चाहते हैं।
उनका मिशन हर आगंतुक की खुशी का स्तर बढ़ाना है। मुझे आश्चर्य नहीं होगा, अगर पैट्रिक भारतीय शादियों के बड़े-भारी मार्केट को समझने की हद तक जाकर, एफिल टॉवर को हर महंगी शादी के वेन्यू के लिए हनीमून डेस्टिनेशन के तौर पर पेश करें! वो इसलिए क्योंकि वह भारतीय पर्यटक बाजार में गहरा उतरना चाहते हैं उन्हें रिझाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
भारतीय बाजार को देखने के उनके नजरिए से मुझे मार्क लोरे याद आए, जिन्होंने कई कंपनियां बनाईं और लगभग 4 अरब डॉलर में अमेजॉन, वॉलमार्ट जैसे बड़े खिलाड़ियों को बेच दीं। उनमें गैप को पहचानने की एक काबिलियत थी और उसके आसपास कंपनी खड़ी करके उसे बेच देते थे। हाल ही में उनका बोया बीज ‘जंप’ नाम की कंपनी है। ये बड़ी खामोशी से साल 2021 में पूर्व बेसबॉल सितारे एलेक्स रोड्रिगेज के साथ शुरू की गई थी।
‘जंप’ स्टेडियम में लाइव गेम देखने वाले प्रशंसक के नजदीक से गेम देखने के अनुभव पर केंद्रित है। इसके पीछे मुख्य आइडिया उन सीटों को बेचना है जो लोगों के बीच मैच से बाहर जाने से खाली हो जाती हैं, ताकि वहां बचे लोगों के पास उपलब्ध सीट को अपग्रेड करने का विकल्प हो।
लोरे इस सुविधा को गतिशील रीयल-टाइम ट्रैकिंग कहते हैं। इसे आगे इस तरह समझें कि आप खेल के बीच में हैं और कोई किसी कारण से वहां से चला जाता है। जैसे ही वह व्यक्ति जाता है, वो सीटें जंप की वेबसाइट पर बोली लगाने के लिए खाली हो जाती हैं।`
कोई भी वाकई उलटी बोली लगाते हुए वे प्रीमियम सीटें पा सकता है, जो उनकी वर्तमान सीट के लिए भुगतान की गई कीमत से भी सस्ती होती हैं। और इसलिए, आइडिया यह है कि स्टेडियम में कोई भी महंगी सीट खाली न हो और उन लोगों से भर जाए, तो आगे की कतार में आकर बैठना चाहते हैं और जब तक सीटें भर नहीं जातीं, कीमतें गिरती जाती हैं। खेल आयोजन का बाजार आज के समय में 15 अरब डॉलर का है। जंप की वेबसाइट पर भारी मुनाफे को देखते हुए, हाल ही में इसकी फंडिंग भी जंप लगाते हुए 30 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई है।
फंडा यह है कि अगर आप मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो बाजार में अंतर को समझें, काम करने का दायरा बदलें और असल बाजार के हालात में गहरे तक उतरें और सही उत्पाद पेश करें।
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एन. रघुरामन का कॉलम: मुनाफे के लिए बाजार में अंतर को समझते हुए काम का दायरा बदलें

