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इस देश के पास 1.99 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 188 लाख करोड़ रुपए) का सॉवरेन वेल्थ फंड है, जो दुनिया के सबसे बड़े ऐसे फंड्स में से एक है। यहां गत वर्ष बिकने वाली कारों में से 96% इलेक्ट्रिक थीं। लेकिन इसकी 56 लाख की आबादी में करीब 5 लाख लोग एक टेक्स्ट मैसेज या सामान्य दिशानिर्देश भी नहीं पढ़ सकते। पर्ल्स (प्रोग्रेस इन इंटरनेशनल रीडिंग लिटरेसी स्टडी) द्वारा रीडिंग के दौरान बच्चों के एन्जॉयमेंट को मापने के लिए 65 देशों में हुए अध्ययन में यह देश सबसे नीचे आता है। यहां के पूर्व शिक्षा मंत्री ट्राइन ग्रांडे ने कहा था कि ‘हम बहुत अमीर हो गए हैं, इसलिए हम पैसों से बेवकूफी भरे काम करते हैं।’ वे 2016 की घटना का जिक्र कर रहे थे, जब सरकार ने स्कूल जाने वाले हर पांच साल के बच्चे को आईपैड दे दिया था। इससे पैरेंट्स अपने बच्चों पर कंट्रोल खोने लगे। जब उन्होंने शिकायत की तो उन्हें ‘डायनासोर’ कहा गया। 2023 तक कक्षाओं से किताबें गायब हो गईं और 2024 तक बच्चों ने पढ़ना बंद कर दिया। आईपैड आने से पहले वे रीडिंग में दूसरे देशों से काफी आगे थे। फिर इस समस्या से जंग शुरू हुई। वहां के प्रधानमंत्री जोनास स्टोर ने अपने देश को रीडिंग में दुनिया में सबसे बेहतर बनाने का वादा किया। रीडिंग में आई इस त्रासद गिरावट को पलटने के लिए नॉर्वे की कोशिशों के नए चैप्टर में आपका स्वागत है। वहां अब ऐसी रणनीतियों में पैसा खर्च किया जा रहा है, जो लगातार स्क्रीन देख रहे बच्चों और वयस्कों को पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकें। करीब 30 कंपनियों ने बुक क्लब्स शुरू किए हैं। इसके पीछे कॉन्सेप्ट है कि जब पैरेंट्स पढ़ते हैं, तो बच्चे भी फॉलो करते हैं। नॉर्वे के सबसे बड़े शहर और राजधानी ओस्लो की एक लाइब्रेरी में 1000 से अधिक प्रकार की कुर्सियां हैं- रॉकिंग चेयर, आर्म चेयर और 360 डिग्री घूमने वाली बॉल चेयर। इसमें शाम को फ्री पिज्जा मिलता है, लोग रैप लिरिक्स लिख सकते हैं, पार्टियां कर सकते हैं और किताबों के बीच स्केटिंग बोट पर घूम सकते हैं। यहां तक कि हफ्ते में दो घंटे काउंसिल में बैठने और अपने फ्रेंड्स को बुलाने के लिए उन्हें 187 नॉर्वेजियन क्रोन (1808 रुपए) प्रति घंटा दिए जाते हैं। राजधानी में 23 लाइब्रेरियों ने पिछले साल करीब 1000 इवेंट्स किए, जिससे किताबों की लेंडिंग 22 लाख तक पहुंच गई। इनमें से आधी किताबें बच्चों के लिए इश्यू कराई गईं। एक समर रीडिंग कॉम्पीटिशन भी होता है। दिलचस्प यह है कि कुछ लाइब्रेरियों में अब बच्चों की किताब बची ही नहीं हैं। यहां रीडिंग साइलेंट नहीं, बल्कि ‘बोकलेक’ यानी ‘बुक प्ले’ जैसी एक्टिविटीज के साथ होती है। केजी के बच्चों को सबसे पहले लाइब्रेरी लाकर किताबों से जुड़े गेम्स खिलाए जाते हैं। जैसे तस्वीर में सॉक्स गिनना या किताब में बहुत से पशुओं में से एक के रंग पर बात करना। इसने मुझे भारत के जाने-माने नॉलेज इवैंजेलिस्ट्स में से एक गिरी बालासुब्रमण्यम की याद दिला दी, जिन्हें इनोवेशन, जिज्ञासा और क्रिटिकल थिंकिंग के जरिए युवाओं को जोड़ने का दशकों का अनुभव है। मैं तब हैरान रह गया, जब भोपाल के 10वीं के छात्र श्रेयांश मिश्रा ने बताया कि कैसे इस महीने हुए ‘गुजकॉस्ट नेशनल एसटीईएम क्विज 4.0’ के फाइनल में गिरी ने टाई-ब्रेकर बजर राउंड में तीन सवाल पूछे और उनका जवाब देकर वह जीत गया। ये सवाल आसान नहीं थे। ये इस तरह थे– 1. बच्चों को यह किरदार पसंद है, जो गरजने वाला रोल निभाता है और जिसका नाम एक एलीमेंट से लिया गया है। उस किरदार और एलीमेंट का नाम बताइए? 2. केले में थोड़ी मात्रा में रेडियोएक्टिव पोटेशियम होता है– यह तथ्य है या कल्पना? 3. विजुअल बजर सवाल : यह एक कार का एलॉय व्हील है। बताइए, इसे किस एलीमेंट से कोट किया गया है? क्या आप इन सवालों के जवाब दे सकते हैं? श्रेयांश ने तीनों के दे दिए– 1. थॉर वह किरदार और एलीमेंट थोरियम है। 2. यह तथ्य है। 3. क्रोमियम। फंडा यह है कि हमें ऐसी एंगेजमेंट स्ट्रैटेजीज़ ढूंढनी होंगी, जो रटकर सीखने से कहीं आगे का विचार दें। आइडियाज ऐसे होने चाहिए, जो बच्चों को जिज्ञासा, रियल-वर्ल्ड एप्लिकेशन और लाइफ लॉन्ग लर्निंग की ओर ले जाएं। पुलिस की कार्रवाई के अनुसार सभी के हितो को ध्यान में रखकर अवलोकन करने पर ही उसका एलिमेंट का नाम बताए। दशको का अनुभव श्रेयांश मिश्रा ने बताया कि कैसे इ
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एन. रघुरामन का कॉलम: बच्चों को किताबों की ओर आकर्षित करने के लिए नए-नए आइडिया की जरूरत है

