एन. रघुरामन का कॉलम: क्यों शिक्षा किसी भी करियर की ‘सबसे अहम बीज’ है? Politics & News

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नागेश एक स्थानीय कॉलेज में लेक्चरर थे। उन्हें खुशी थी कि अपने खेतीबाड़ी के पारिवारिक पेशे की तुलना में उन्हें यहां विद्यार्थियों से खूब सम्मान मिलता था। उनका परिवार पूरी तरह खेती पर निर्भर था और परिजनों को भरोसा था कि उनकी एक एकड़ जमीन हमेशा परिवार का पेट भरती रहेगी। इसी पारिवारिक दबाव के चलते 31 साल के इस लेक्चरर ने नौकरी छोड़ कर बेंगलुरु के निकट परिवार की जमीन पर खेती करने का फैसला किया। खीरे की अच्छी फसल की उम्मीद में उन्होंने श्रीगंगाधरेश्वर ट्रेडर्स से संपर्क किया, जिसने उसे सुवर्णा हाइब्रिड सीड्स प्राइवेट लिमिटेड के एफ-1 हाइब्रिड ‘शांति कुकंबर’ के बीज लेने का सुझाव दिया। नागेश ने 19 जुलाई, 2023 को 1750 रुपए में बीज के पांच पैकेट खरीदे और उसी दिन बो दिए। इसी दौरान उन्हें आईविज सीड्स के ‘चित्रा कुकंबर’ के दो पैकेट भी मिले और उन्होंने वो भी बो दिए। नागेश ने जमीन तैयार करने, खाद, मजदूरी, ट्रैक्टर किराया, क्यारी बनाने, बांस लगाने, सिंचाई का सामान लेने, उर्वरक और कीटनाशकों सहित खेती पर करीब 1.1 लाख रुपए खर्च किए। लेकिन शुरुआत में ही समस्या आ गई। खराब अंकुरण के कारण ‘शांति कुकंबर’ वाले पौधों की बढ़ोतरी रुक गई। यह फसल रंग और आकार में कमजोर रही। नागेश ने आपत्ति जताई तो डीलर ने उन्हें निर्माता के पास भेजा। कंपनी के प्रतिनिधि खेत पर आए, फसल देखी, फोटो ली और मामला आगे भेजने का भरोसा दिया। फिर एक और प्रतिनिधि एक अन्य व्यक्ति के साथ आया, जिसे वह वैज्ञानिक बता रहा था। उन्होंने भी आश्वासन दिया कि मुआवजे पर विचार करेंगे। 9 नवंबर, 2023 को कंपनी के एक प्रतिनिधि ने नागेश को 15 हजार रुपए के 50 पैकेट बीज बतौर मुआवजा देने का प्रस्ताव दिया। उसी दिन नागेश ने बेंगलुरु साउथ के बागवानी विभाग के वरिष्ठ सहायक निदेशक के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई। फिर खेत का आधिकारिक निरीक्षण हुआ। सामान्य स्थिति में इस फसल से करीब 3.2 लाख रुपए की उपज होनी चाहिए थी। चूंकि नुकसान भारी था, तो नागेश ने 29 नवंबर, 2023 को अतिरिक्त जिला उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग- बैंगलोर शहर-2 में शिकायत देकर खराब बीज तथा सेवा दोष का आरोप लगाया। अपने बचाव में कंपनी ने कहा कि खेती के खराब तरीकों की वजह से उपज कम हुई। बीज के नमूने वैज्ञानिक जांच के लिए नहीं दिए गए और महज कम उपज होने से बीज खराब साबित नहीं होते। कंपनी ने कहा कि रिपोर्ट के निष्कर्ष से भी साबित नहीं होता कि बीज खराब थे और 70 दिनों बाद हुए निरीक्षण का निष्कर्ष भरोसेमंद नहीं है। लेकिन आयोग ने हॉर्टिकल्चर विभाग की रिपोर्ट पर भरोसा किया। इसमें बताया गया कि ‘शांति’ और ‘चित्रा’, दोनों किस्में खाद-सिंचाई की एक ही जैसी परिस्थितियों में उगाई गई थीं। ‘चित्रा’ की उपज अच्छी रही, वहीं ‘शांति’ की किस्म में खराब अंकुरण, अनियमित आकार, गहरा रंग और कम उपज हुई। आयोग ने माना कि निरीक्षण में देरी हुई, लेकिन फोटो और रिकॉर्ड जैसे सबूत किसान के दावे का समर्थन करते हैं। यह भी सामने आया कि खुद कंपनी बीजों के बैच के नमूने पेश नहीं कर पाई। 3 मार्च, 2026 को अध्यक्ष विजयकुमार एम. पावले और सदस्य अनुराधा वी. की पीठ ने व्यापारी और निर्माता दोनों को सेवा में कमी का दोषी ठहराया। उन्हें 2 लाख रुपए मुआवजा, मानसिक पीड़ा की भरपाई के लिए 10 हजार रुपए और 5 हजार रुपए मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया गया। नागेश को जब अन्याय महसूस हुआ तो अपने अनुमानित 3.2 लाख रुपए के नुकसान के बदले वह 2.2 लाख रुपए इसलिए ले पाया, क्योंकि वह शिक्षित था और जानता था कि ऐसे समय में कहां जाना है। फंडा यह है कि भले आप व्यापार, खेती, प्लंबिंग या कोई भी पेशा चुने, लेकिन खुद को कम से कम इतना शिक्षित तो करें कि आपके साथ कोई अन्याय हो तो अपना बचाव कर सकें। शिक्षा सच में हर कॅरिअर की ‘सबसे महत्वपूर्ण बीज’ है।

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एन. रघुरामन का कॉलम: क्यों शिक्षा किसी भी करियर की ‘सबसे अहम बीज’ है?