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3 घंटे पहले
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एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु
वह हॉलीवुड में कोई बॉक्स ऑफिस एनालिस्ट नहीं, बस हाई स्कूल का एक सीनियर छात्र है। लेकिन उसे अच्छे से पता है कि वह बड़ा होकर क्या बनना चाहता है। वह फिल्म इंडस्ट्री में जाना चाहता है। अभिनय, निर्देशन या संगीत नहीं, उसकी रुचि फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन में है। अबदी बूटान को लगता है कि इस क्षेत्र में पैसा जल्दी कमाया जा सकता है। तो अभी अबदी क्या कर रहा है?
खाली समय में अबदी अपने बॉक्स ऑफिस अनुमानों की स्प्रेडशीट बनाता है। उसके अनुमान एडवांस टिकट बिक्री और ऐसे कई फैक्टर्स पर आधारित होते हैं, जिनके बारे में जेन-जी के तौर पर वह सोचता है कि उसकी उम्र के लोगों को कोई फिल्म कितनी आकर्षक लगेगी। बॉक्स ऑफिस को लेकर यह चार्टिंग उसे इंडस्ट्री, आबादी के फैलाव, जियोग्राफी, दुनिया की पसंद, तकनीकी विशेषज्ञता, स्टोरी लिखने के विचार और फिल्म के संगीत की समझ देती है।
ऐसा नहीं कि पहले दिन से ही उसके अनुमान सही रहे। उसने भी गलतियां की, लेकिन स्प्रेडशीट पर काम जारी रखा। नवंबर, 2025 में हॉलीवुड में दो फिल्में रिलीज हुईं- ‘विकेड : फॉर गुड’ और ‘जूटोपिया 2’। पहली फिल्म के लिए उसने टिकट बिक्री के जरूरत से अधिक अनुमान लगाने की गलती की। लेकिन दूसरी के बारे में उसने कहा कि यह दुनिया भर में 1.8 बिलियन डॉलर कमाएगी और फिल्म ने 1.9 बिलियन डॉलर कमाए।
फिल्म प्रेमी जेन-जी युवा अब बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर ज्यादा ध्यान देने लगे हैं और यह जानना चाहते हैं कि उनकी पसंदीदा फिल्में पैसे कमाने में सफल होंगी या नहीं। जब उन्हें पता चलता है कि फिल्म बढ़िया कमाई कर रही है तो कहीं न कहीं उनके मन में यह भी आता है कि उस पर किया खर्च सफल रहा।
हैरत नहीं कि इस बिजनेस में आंकड़ों की पड़ताल करने वाले अनुभवी लोगों के साथ आज के युवा भी अबदी के कैलकुलेशन पर नजर रखते हैं। मुझे अबदी के बारे में पढ़ी हुई ये बातें तब याद आईं, जब मैं एक युवा पोस्ट ग्रेजुएट का रेज्यूमे देख रहा था। उसने पांच साल में तीन अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया और अब चौथे ऐसे क्षेत्र में करियर तलाश रहा था, जिसका उसकी पढ़ाई से कोई नाता नहीं था। जब उससे पूछा गया कि इन तीन क्षेत्रों से उसने क्या सीखा, तो उसके पास कोई ठोस जवाब नहीं था।
अपने कामों को लेकर वह एक भी साझा कड़ी नहीं ढूंढ पाया, क्योंकि ऐसा कुछ था ही नहीं। वह करियर नहीं बना रहा था, बल्कि संयोगवश हो रही घटनाओं में बस गुजारा कर रहा था। किसी दीर्घकालीन लक्ष्य के बिना करियर चुनना ऐसा ही है, जैसे बिना मकसद युद्ध छेड़ देना। जैसे कोई आक्रमणकारी देश किसी भी वक्त खुद को विजेता घोषित कर सकता है, वैसे ही कोई युवा भी अपने रेज्यूमे में लिख सकता है कि उसे ‘ए, बी, सी जैसी कई जगहों का अनुभव है।’
लेकिन यह नहीं समझा पाता कि इतने वर्ष उसने इन क्षेत्रों में क्यों बिताए? स्कूली दिनों में ही ‘स्प्रेडशीट्स’ पर काम करना बताता है कि इसे आप हॉबी के तौर पर नहीं, बल्कि भविष्य की सफलता के डेटा प्वाइंट्स के तौर पर मान रहे हैं। आपका पहले दिन से सही होना जरूरी नहीं। आप गलतियां कर सकते हैं, जो आपके लिए सीख बन सकती है। सफलता में समय लग सकता है।
आपके जीवन का ‘बॉक्स ऑफिस’ पहले ही साल में बिलियन डॉलर तक भले ना पहुंचे, लेकिन अगर आप जल्दी शुरुआत करते हैं और उसे बनाए रखते हैं तो खुद को हायरिंग मैनेजर के सामने कभी ऐसे खड़ा नहीं पाएंगे, जहां यह न समझा पाओ कि यहां तक कैसे पहुंचे। आपको कभी कामचलाऊ नौकरी से समझौता नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि आप खुद इंडस्ट्री चलाने में व्यस्त होंगे।
फंडा यह है कि अबदी की तरह जल्दी करियर चुनिए और स्कूली दिनों से ही उस पर काम शुरू कीजिए। बिना साफ उद्देश्य के रास्ते में आए हर करियर में भटकते रहना आपको अनुभवी नहीं, बल्कि हालात का मारा बना देता है।
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