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3 मिनट पहले
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एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु
वे 70 वर्ष के रहे होंगे। उस दिन वे एक साधारण-से कैफे में आए। बहुत से लोग उस जगह को इसलिए पसंद करते थे क्योंकि वह एक V आकार में स्थित थी, जहां से ग्राहक एक साथ दो सड़कों को देख सकते थे। वे दोपहर 2:30 बजे आए और 4:30 बजे तक वहीं बैठे रहे। मालिक ने इसकी खास परवाह नहीं की, क्योंकि उस समय कम ही ग्राहक आते थे।
उन्होंने मेन्यू का सबसे सस्ता आइटम- एक ब्लैक कॉफी मंगवाई और दो घंटे तक उसी के साथ बैठे रहे। फिर वे रोज उसी समय आने लगे; वे वही ऑर्डर देते और रोज उसी समय जाते। वे न फोन चलाते थे, न किताब पढ़ते थे, बस राह चलते लोगों को देखते थे।
चूंकि वे बेघर नहीं लगते थे, इसलिए कैफे मालिक ने उनसे बातचीत की और जाना कि उनका नाम वॉल्टर है और हाल ही में उन्होंने अपनी पत्नी को खोया है। एक महीने की नियमित विजिट्स के बाद एक दिन मालिक ने उन्हें केक का एक टुकड़ा दिया।
वॉल्टर ने कहा, मैंने तो यह ऑर्डर नहीं किया था। मालिक ने जवाब दिया, यह हमारी ओर से है। वे चुपचाप बैठे रहे और लोगों को गुजरते हुए देखते रहे। एक दिन उन्होंने कहा, मैं यहां चंद आवाजों के लिए आता हूं- थोड़ी गर्माहट के लिए, अकेला न होने के एहसास के लिए। मालिक उनको लेकर अभ्यस्त हो गए, क्योंकि वे छह महीने तक नियमित रूप से आते रहे थे।
और फिर एक दिन वे नहीं आए। उस दिन मालिक ने पाया कि 2:30 बजे उनकी नजरें बार-बार दरवाजे की ओर चली जा रही थीं। अगले दिन भी वे नहीं आए। फिर एक सप्ताह बीत गया और वॉल्टर का कुछ अता-पता नहीं था। एक महीने बाद, एक प्रौढ़ महिला कैफे में आईं। वे इधर-उधर ऐसे देख रही थीं, मानो कुछ खोज रही हों। उन्होंने काउंटर पर पूछा, क्या आप ही इस कैफे के मालिक हैं?
मालिक ने हां कहा। महिला ने कहा, मेरे पिता यहां आया करते थे- वॉल्टर। मालिक का दिल बैठ गया। उन्होंने धीमे से कहा, हां, वे कुछ समय से नहीं आए हैं। महिला ने हल्की उदासी से कहा, उनका पिछले महीने निधन हो गया। ये शब्द कैफे मालिक को गहराई से चुभे, लेकिन उनके मुंह से बस इतना ही निकला- यह सुनकर बहुत दु:ख हुआ। तब महिला ने फीकी मुस्कान के साथ कहा, मेरे पिता इस जगह के बारे में हमेशा बात करते थे। यह उनका दूसरा लिविंग-रूम था।
फिर उन्होंने अपने पर्स से एक लिफाफा निकाला और कहा, उन्होंने यह आपके लिए छोड़ा है। उसे खोलते समय मालिक के हाथ हल्के-से कांप उठे। लिफाफे में एक हस्तलिखित पत्र था। उसमें लिखा था : दयालु कैफे मालिक के नाम, शायद आपको इसका एहसास न हो, लेकिन आपने मुझे कॉफी से कहीं अधिक दिया है। पत्नी के जाने के बाद मेरे दिन बहुत लंबे हो गए थे। मैं अपनी बेटी पर बोझ नहीं बनना चाहता था।
मैं नहीं चाहता था कि वह मेरे अकेलेपन को देखे। आपके कैफे ने मुझे अपने जीवन को चलाए रखने का एक कारण दिया। वह अतिरिक्त केक और आपकी अतिरिक्त विनम्रता मेरे लिए किसी भी चीज से ज्यादा मायने रखती थी। धन्यवाद, कि आपने एक बूढ़े आदमी को उस कोने में बैठने दिया। -वॉल्टर।
लिफाफे में एक छोटा-सा चेक भी था। उसमें बहुत बड़ी राशि नहीं थी, लेकिन वॉल्टर ने अब तक उस कैफे में जितनी रकम खर्च की थी, वह उससे अधिक ही थी। उनकी बेटी ने कहा, यह काइंडनेस-फंड के लिए है। वे चाहते थे कि आप इसे किसी ऐसे व्यक्ति की मदद के लिए इस्तेमाल करें, जिसे शायद बैठने के लिए एक जगह की जरूरत हो। तब कैफे मालिक को आंसू छिपाने के लिए अपना चेहरा दूसरी तरफ करना पड़ा।
महिला के जाने के बाद वे उस मेज तक गए- वॉल्टर की मेज। कुर्सी खाली थी, लेकिन मालिक ने तय किया कि वे उसे खाली नहीं रहने देंगे। उन्होंने वहां एक बोर्ड लगा दिया: यदि आपको बैठने के लिए एक गर्माहट भरी जगह चाहिए, तो आपका यहां स्वागत है। उस दिन के बाद, कभी कोई कॉलेज छात्र वहां बैठकर पढ़ाई करता, कभी कोई विधवा वहां बुनाई करती, या कोई व्यक्ति वहां चुपचाप बैठा रहता। हर बार जब वे किसी को कॉफी देते, तो साथ में वॉल्टर के नाम पर एक केक भी देते।
फंडा यह है कि किसी को सबसे मूल्यवान चीज जो हम दे सकते हैं, वह अतिरिक्त फूड नहीं, बल्कि यह सुकून है कि वे अकेले नहीं हैं।
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