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एंड्रॉयड स्मार्टफोन में आप किसी ऐप को पूरी तरह क्लोज किए बिना भी दूसरी ऐप पर स्विच कर सकते हैं. इस तरह पहली ऐप बैकग्राउंड में चली जाती है और जब आप दोबारा उस पर स्विच करते हैं तो सब कुछ वहीं मिल जाता है, जहां आपने छोड़ा था. लेकिन कुछ यूजर्स की आदत होती है कि वो बैकग्राउंड ऐप्स को पूरी तरह बंद कर देते हैं और केवल एक ही ऐप को एक्टिव रखते हैं. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो बता दें कि ऐसा करने से फोन पर लोड बढ़ता है और इसका कोई फायदा भी नहीं होता.
क्यों बंद नहीं करनी चाहिए बैकग्राउंड ऐप्स?
बैकग्राउंड ऐप्स वो होती हैं, जो स्क्रीन पर विजिबल न होने के बाद भी एक्टिव रहती हैं और बैकग्राउंड में ही कंटेट को रिफ्रेश करती रहती हैं. जब आप इन्हें फोर्स-क्लोज करते हैं तो अगली बार ऐप खोलने के लिए फोन को ज्यादा काम करना पड़ेगा और ऐप बिल्कुल शुरुआत से ओपन होगी. इससे ऐप को डेटा फैच करने में कुछ समय भी लग सकता है और आपकी पुरानी प्रोग्रेस भी उड़ जाएगी. इससे ज्यादा बैटरी की भी खपत होती है और रैम समेत फोन के दूसरे रिसोर्सेस पर ज्यादा असर पड़ता है.
एंड्रॉयड कर देगा आपकी चिंता दूर
पुराने फोन्स में बैकग्राउंड ऐप्स बंद करना एक समझदारी भरा कदम माना जाता था, लेकिन अब टेक्नोलॉजी एडवांस हो गई है और एंड्रॉयड सिस्टम ये सारी चीजें हैंडल कर लेता है. आजकल एंड्रॉयड में एआई-पावर्ड एडेप्टिव बैटरी का फीचर मिलता है, जो आपकी आपकी फोन करने की आदतों को लगातार सीखता रहता है. यह देख लेता है कि आप किन ऐप्स को ज्यादा यूज करते हैं और फिर उन्हीं को प्रायोरिटी देता है. यह बैकग्राउंड एक्टिविटी को मैनेज करते हुए दूसरी ऐप्स को डीप स्लीप मोड में डाल देता है, जिससे ये बैटरी की खपत नहीं कर पातीं.
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