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हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने अहम कदम उठाया है। राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव को लेकर एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी पंडित भगवत दयाल शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज रोहतक के निदेशक की अध्यक्षता में काम करेगी।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से कमेटी में पीजीआईएमएस रोहतक के सर्जरी विभाग के प्रमुख के अलावा कल्पना चावला गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, करनाल, भगत फूल सिंह गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, खानपुर कलां (सोनीपत) और शहीद हसन खान मेवाती गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, नूंह के निदेशक को भी शामिल किया गया है। कमेटी को राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चरणबद्ध तरीके से लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की संभावनाओं और कार्यप्रणाली का आकलन करने का जिम्मा सौंपा गया है। साथ ही, इसे 10 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें सरकार को सौंपनी होंगी।
सड़क दुर्घटनाओं में अस्पताल पहुंचने से पहले लगभग 30% से 39% घायलों की मौत हो जाती है। इसका मुख्य कारण गोल्डन ऑवर (दुर्घटना के बाद का पहला घंटा) में सही प्राथमिक उपचार न मिलना और अस्पताल पहुंचाने में देरी है। यदि मरीज को ट्रामा सेंटर में समय पर पहुंचा दिया जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस पहल से सड़क दुर्घटनाओं और आपातकालीन मामलों में मरीजों को त्वरित और बेहतर उपचार मिल सकेगा। ट्रॉमा केयर सुविधाओं के विस्तार से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
लेवल थ्री ट्रामा सेंटर में क्या सुविधाएं होती हैं
लेवल 3 ट्रॉमा सेंटर का मुख्य काम दुर्घटना या गंभीर चोट के मरीजों को तुरंत प्राथमिक इलाज देना, उनकी हालत स्थिर करना और जरूरत पड़ने पर बड़े अस्पताल (लेवल 1 या 2) में रेफर करना होता है। इसमें 24 घंटे इमरजेंसी डॉक्टर उपलब्ध रहते हैं। सामान्य सर्जन और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ ऑन-कॉल रहते हैं। जरूरत पड़ने पर तुरंत बुलाए जाते हैं। हड्डी रोग (ऑर्थोपेडिक) का इलाज, आईसीयू, एक्स-रे और लैब की आधुनिक सुविधाएं होती हैं। आवश्यकता होने पर मरीज को उच्च स्तरीय ट्रॉमा सेंटर में भेजने की व्यवस्था होती है।
11 साल में हरियाणा में सड़क दुर्घटनाओं में 57 हजार से ज्यादा लोगों की जान गई
हरियाणा में 2014 से लेकर अब तक सड़क दुर्घटनाओं में 57,901 लोगों की जान गई है। इन 11 साल में लगभग 1.15 लाख सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। हाल ही में आई हरियाणा यातायात पुलिस की ओर से सूचना के अधिकार के तहत दी गई जानकारी के मुताबिक साल 2024 में एक्सीडेंट में 4,689 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2025 में 4,885 लोगों की मौत हुई। दुर्घटनाओं की संख्या 9,806 से बढ़कर 10,352 हो गई।
पिछले 11 वर्षों में सबसे कम मौतें (4,429) 2015 में दर्ज की गईं। हरियाणा में सड़क दुर्घटनाओं की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2020 में जब देश में लॉकडाउन लगा हुआ था और सड़कें सुनसान थीं, तब भी राज्य भर में 9,431 दुर्घटनाएं हुईं। सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा मौतें गुरुग्राम में 4,988 दर्ज की गई है। इसके बाद सोनीपत में 4,521, करनाल में 4,113, पानीपत में 3,432 और झज्जर में 2,944 मौतें हुईं। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि अधिकांश दुर्घटनाएं तेज गति, लापरवाही से गाड़ी चलाने और गलत दिशा में गाड़ी चलाने के कारण होती हैं।
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उच्च स्तरीय कमेटी का गठन: रोहतक PGI निदेशक को जिम्मेदारी, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बनेंगे लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर



