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फरीदाबाद में आंधी और बारिश के कारण गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है. कटाई पूरी होने के बाद अब किसान भूसे के अच्छे दाम मिलने से कुछ हद तक नुकसान की भरपाई की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं हाथ से कटाई और मशीन के बीच का अंतर भी सामने आया है.
फरीदाबाद: फरीदाबाद के किसानों के लिए इस बार गेहूं की फसल उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. कटाई से ठीक पहले आई तेज आंधी और बारिश ने कई खेतों में खड़ी फसल को गिरा दिया जिससे पैदावार पर सीधा असर पड़ा. 6 महीने की मेहनत के बाद जब फसल तैयार हुई उसी समय मौसम ने साथ छोड़ दिया और किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा. हालांकि, अब कटाई का काम लगभग पूरा हो चुका है ऐसे में किसान नुकसान की भरपाई के लिए भूसे से कुछ कमाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
गेहूं की कटाई हाथ से करने के फायदे
Local18 से बातचीत में डीग गांव के किसान सुंदर सिंह ने बताया इस बार मैंने गेहूं की कटाई मजदूरों से हाथों से करवाई है. हाथ की कटाई में फसल जड़ के करीब से काटी जाती है जिससे भूसा भी बढ़िया क्वालिटी का निकलता है. वहीं कंबाइन मशीन से कटाई करने पर अनाज में नमी रहने का खतरा रहता है और भूसे में धूल-मिट्टी ज्यादा मिल जाती है. हाथ से कटाई में भले ही एक एकड़ में 2 से 3 दिन लगते हैं, लेकिन फसल अच्छे से सूख जाती है और बाद में जब कटर से निकलवाते हैं, तो दाना साफ और सूखा मिलता है.
क्या होता है भूसे का दाम
सुंदर सिंह ने बताया भूसे के दाम तय नहीं होते यह रोज के हिसाब से बदलते रहते हैं. फिलहाल हाथ की कटाई से निकला भूसा 350 से 400 रुपये प्रति मन बिक रहा है, जबकि मशीन से निकला भूसा 200 से 250 रुपये प्रति मन ही जाता है. इसका कारण यह है कि हाथ से कटाई के बाद भूसा साफ और मुलायम होता है जिसे जानवर भी आसानी से खा लेते हैं. वहीं मशीन से कटे भूसे में लंबाई ज्यादा होती है और उसमें मिट्टी भी मिली होती है जिससे पशुओं को चबाने में दिक्कत होती है.
मशीन से कटाई करवाना मजबूरी
सुंदर सिंह ने बताया मशीन से कटाई करवाना मजबूरी बनती जा रही है. एक तो मजदूर आसानी से मिलते नहीं हैं और अगर मिलते भी हैं तो अपनी मर्जी के दाम मांगते हैं. तो वहीं कोई 8 मन तो कोई 10 मन अनाज लेने की बात करता है. वहीं कंबाइन मशीन करीब 2500 रुपये प्रति एकड़ में कटाई कर देती है जिससे समय की बचत होती है. खासकर जब मौसम खराब हो तो किसान जल्दी फसल घर लाने के लिए मशीन का सहारा लेते हैं.
भूसे के अच्छे दाम मिल जाएं तो कुछ हद तक भरपाई हो जाती है
सुंदर सिंह ने बताया इस बार एक एकड़ में करीब 60 से 65 मन भूसा निकला है, जिससे किसानों को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. भले ही गेहूं में नुकसान हुआ हो, लेकिन अगर भूसे के अच्छे दाम मिल जाएं तो कुछ हद तक भरपाई हो सकती है. हाथ की कटाई आज भी फायदे का सौदा है लेकिन मजदूरों की कमी और मौसम की मार के चलते किसान कई बार मशीन का ही सहारा लेने को मजबूर हो जाते हैं.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें
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