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अमेरिका में ट्रंप-मस्क के विरोध में निकली 1,200 रैलियां: 150 से ज्यादा समूह जुड़े; नौकरियों में कटौती और सामाजिक नीतियों के खिलाफ हैंड्स ऑफ प्रोटेस्ट Today World News

अमेरिका में ट्रंप-मस्क के विरोध में निकली 1,200 रैलियां:  150 से ज्यादा समूह जुड़े; नौकरियों में कटौती और सामाजिक नीतियों के खिलाफ हैंड्स ऑफ प्रोटेस्ट Today World News

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वाशिंगटन9 मिनट पहले

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ट्रंप, इलॉन मस्क और स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के पुतले बनाकर पूरे अमेरिका में विरोध प्रदर्शन हुआ।

अमेरिका में शनिवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उद्योगपति इलॉन मस्क की पॉलिसी के विरोध में 1200 से अधिक रैलियां निकाली गई। इन रैलियों का मकसद सरकारी नौकरी में कटौती, अर्थव्यवस्था, और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर सरकार के फैसलों का विरोध करना था।

इस विरोध प्रदर्शन को हैंड्स ऑफ नाम दिया गया है। हैंड्स ऑफ मतलब होता है- ‘हमारे अधिकारों से दूर रहो’। इस नारे का मकसद यह जताना है कि प्रदर्शनकारी नहीं चाहते कि उनके अधिकारों पर किसी का नियंत्रण हो।

इस विरोध प्रदर्शन में 150 से अधिक संगठनों ने भाग लिया। इसमें सिविल राइट ऑर्गनाइजेशन, मजदूर संघ, LGBTQ+ वॉलंटियर्स, पूर्व सैनिक और चुनावी कार्यकर्ता शामिल थे। यह प्रोटेस्ट वाशिंगटन DC में नेशनल मॉल, स्टेट कैपिटल और सभी 50 राज्यों में आयोजित किया गया था।

हैंड्स ऑफ प्रोटेस्ट की दो तस्वीरें…

इस विरोध प्रदर्शन में सिविल राइट ऑर्गनाइजेशन और मजदूर संघ जैसे 150 से अधिक संगठनों ने भाग लिया।

इस विरोध प्रदर्शन में सिविल राइट ऑर्गनाइजेशन और मजदूर संघ जैसे 150 से अधिक संगठनों ने भाग लिया।

प्रोटेस्टर्स ने स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के अवतार में मुंह पर सांकेतिक पट्टी बांधकर प्रोटेस्ट किया।

प्रोटेस्टर्स ने स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के अवतार में मुंह पर सांकेतिक पट्टी बांधकर प्रोटेस्ट किया।

इलॉन मस्क का दावा- टैक्सपेयर्स के पैसे बचाने के लिए सरकारी नौकरियों में कटौती

इलॉन मस्क अमेरिका की ट्रंप सरकार में डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी के प्रमुख हैं। उनका दावा है कि सरकारी तंत्र को छोटा करने से टैक्सपेयर्स के अरबों डॉलर बचेंगे। वहीं व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप सोशल सिक्योरिटी, मेडिकेयर योजनाओं के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। लेकिन डेमोक्रेट्स इन योजनाओं का लाभ अवैध अप्रवासियों को दिलाना चाहते हैं।

अमेरिका में प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैक्स लगाया

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल को दूसरे देशों पर लगाया जाने वाला रेसिप्रोकल टैक्स का ऐलान किया था। इसमें भारत पर 26% टैरिफ लगाए जाने की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत बहुत सख्त है। मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन हमारे साथ सही व्यवहार नहीं कर रहे हैं।

भारत के अलावा चीन पर 34%, यूरोपीय यूनियन पर 20%, साउथ कोरिया पर 25%, जापान पर 24%, वियतनाम पर 46% और ताइवान पर 32% टैरिफ लगेगा। अमेरिका ने करीब 60 देशों पर उनके टैरिफ की तुलना में आधा टैरिफ लगाने का फैसला किया है।

ट्रम्प ने व्यापारिक साझेदार देशों पर नए टैरिफ लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर किए।

ट्रम्प ने व्यापारिक साझेदार देशों पर नए टैरिफ लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर किए।

भारत बोला- हमारी इकोनॉमी इस टैरिफ को झेल सकती है ट्रम्प के जैसे को तैसा टैरिफ की घोषणा के बाद भारत की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है। भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि वह 26% टैरिफ के प्रभाव का आकलन कर रहा है। एक अधिकारी ने कहा कि इस टैरिफ का कुछ क्षेत्रों पर असर होगा, लेकिन भारत की इकोनॉमी इसे झेल सकती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक एक अधिकारी ने बताया कि ट्रम्प प्रशासन में ऐसे प्रावधान हैं कि अगर भारत अमेरिका की चिंताओं को दूर करता है, तो टैरिफ में कुछ छूट मिल सकती है। भारत इस दिशा में कदम उठाने पर विचार कर रहा है। रेसिप्रोकल टैक्स से जुड़ी पूरी खबर पढ़ें…

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