अभिमन्यु की संघर्ष गाथा: जाट आंदोलन की आग में जला घर, चुनावी हार से टूटा सियासी सफर; और खाली हाथ रह गए कैप्टन Latest Haryana News

[ad_1]


जिस घर से संवेदनाएं और यादें जुड़ी थीं वो जला दिया गया। 10 तक कानूनी लड़ाई और सियासत में पिछड़ते कदम… आखिर में कैप्टन अभिमन्यु के हाथ खाली ही रह गए। कैप्टन अभिमन्यु 2014 में नारनौंद हलके से चुनाव जीतने के बाद सियासत में अपने चरम पर पहुंच गए थे। 

मनोहर सरकार के वित्त मंत्री का ओहदा मिला था लेकिन जाट आंदोलन के दौरान 19 व 20 फरवरी 2016 को उनकी कोठी जला दी गई थी। इस घर और वहां रखे एक-एक सामान से उनकी यादें जुड़ी थीं।

 




Trending Videos

Abhimanyus struggle story House burned in fire of Jat andolan political journey ended due to electoral defeat

जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा का दृश्य
– फोटो : फाइल फोटो


उनके पिता, मां, पत्नी, बच्चों और परिवार की यादें। कोठी की आग की तपिश ने अभिमन्यु के दिल को झुलसा दिया। कोठी जलाने के मामले में वे जैसे-जैसे कानूनी लड़ाई में आगे बढ़ रहे थे राजनीति में उनके कदम पीछे होते जा रहे थे। 

 


Abhimanyus struggle story House burned in fire of Jat andolan political journey ended due to electoral defeat

जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा में फूंकीं पूर्व वित्त मंत्री की कोठी
– फोटो : फाइल फोटो


आंदोलन के बाद हुए किसी भी चुनाव में कैप्टन अभिमन्यु को जीत नहीं मिली। सामाजिक रूप से अभिमन्यु पर समझौते दबाव बढ़ रहा था तो लंबी अदालती लड़ाई से परिवार भी थक चुका था। आखिरकार खापों के कहने पर उन्होंने समझौता कर लिया।


Abhimanyus struggle story House burned in fire of Jat andolan political journey ended due to electoral defeat

पंचकूला में सीबीआई कोर्ट के फैसले के बाद बाहर आते सर्वखाप प्रतिनिधि व अन्य
– फोटो : सर्वखाप पंचायत


राजनीतिक मोर्चे पर भी नहीं मिली सफलता

कैप्टन अभिमन्यु को भाजपा में मंझा हुआ रणनीतिकार माना जाता है। एक समय में न सिर्फ प्रदेश बल्कि उनकी राष्ट्रीय राजनीति में भी पहचान थी। वह दो बार भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं। 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले कैप्टन अभिमन्यु को भाजपा का राष्ट्रीय प्रवक्ता भी बनाया गया था। 

 


Abhimanyus struggle story House burned in fire of Jat andolan political journey ended due to electoral defeat

पंचकूला में सीबीआई कोर्ट के फैसले के बाद बाहर आते सर्वखाप प्रतिनिधि व अन्य
– फोटो : सर्वखाप पंचायत


2014 के लोकसभा चुनाव में कैप्टन अभिमन्यु उत्तर प्रदेश के सहप्रभारी थे। 1998 और 2004 में रोहतक से कैप्टन अभिमन्यु ने लोकसभा का चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। 2009 में उन्होंने नारनौंद से विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन इसमें भी उनके हिस्से हार ही आई। 

 


[ad_2]
अभिमन्यु की संघर्ष गाथा: जाट आंदोलन की आग में जला घर, चुनावी हार से टूटा सियासी सफर; और खाली हाथ रह गए कैप्टन