अंबाला का श्री शिव मन्दिर वकीलां, जहां संतान प्राप्ति की कामना लेकर आते हैं श्रद्धालु, रोचक है इसकी कहानी Haryana News & Updates

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अंबाला. भारत में आज भी कई ऐसे शादीशुदा जोड़े हैं, जो साल तक संतान सुख से वंचित रह जाते हैं. संतान की चाह में वे बड़े-बड़े अस्पतालों के चक्कर लगाते हैं और कई बार धार्मिक स्थानों पर मन्नतें भी मांगते हैं. ऐसा ही एक दंपत्ति करीब 150 साल पहले अंबाला में भी था, जो लंबे समय तक नि:संतान रहने के कारण काफी दुखी रहता था. कहा जाता है कि एक दिन अंबाला शहर के खत्तरवाड़ा इलाके में एक साधु संत आए और उन्होंने उस दंपत्ति को भगवान शिव का मंदिर बनवाने की सलाह दी. इसके बाद दंपत्ति ने पीपल के पेड़ के नीचे श्री शिव मंदिर पीपल वाला की स्थापना की.

स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर बनने के बाद उस दंपत्ति को दो पुत्रों की प्राप्ति हुई. तभी से यह मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने पर संतान सुख मिलता है. यह मंदिर करीब 150 से 200 साल पुराना बताया जाता है. आज भी मंदिर में पुराना पीपल का विशाल पेड़ और उस समय की कला देखने को मिलती है. मंदिर छोटी ईंटों, मिट्टी और चूने से बना है और आज भी मजबूती से खड़ा है.

लोकल 18 को मंदिर के सेवादार सुरेंद्र मल्होत्रा ने बताया कि श्री शिव मंदिर पीपल वाले किस्थापना लगभग 150 – 200 साल पहले ओम प्रकाश चोपड़ा के पूर्वजों ने की थी. उन्होंने बताया कि उस समय उनके पूर्वज के घर में शादी के कई साल बाद भी संतान प्राप्ति नहीं हुई थी,जिसके बाद बहुत दूर से आए एक साधु संत ने उन्हें भगवान भोलेनाथ का मंदिर बनाने के लिए कहा था. उन्होंने कहा कि उस समय छोटी ईंट और चुना,मिट्टी की सहायता से इस मंदिर का निर्माण किया गया था. मंदिर में पीपल के पेड़ के पास एक शिवलिंग की स्थापना की गई थी.

पुजारी ने बताया कि उस समय मंदिर बनने के बाद उनके घर में दो बेटों ने जन्म लिया था. फिर दूर-दूर से श्रद्धालु उसे मंदिर में माथा टेकने के लिए आने लगे. उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले इस मंदिर का जीर्णोद्धार स्थानीय लोगों ने किया था. पुरानी दीवारों के ऊपर टाइल्स लगवाई गई हैं.

पुजारी बताते हैं कि कुछ समय पहले एक श्रद्धालु ने अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर इस मंदिर के शिवालय के आसपास 5 किलो चांदी लगवाई गई थी. आज भी लोग संतान प्राप्ति का आशीर्वाद लेने के लिए इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं. सावन माह में श्रद्धालु हर साल हरिद्वार से 251 लीटर जल लेकर आते हैं और इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया जाता है.

उन्होंने बताया कि शिवरात्रि पर हर साल इस मंदिर में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है,ओर इस बार भी मंदिर में 12 फरवरी से धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो जाएगी. उन्होंने कहा कि 12 फरवरी को हल्दी मेहंदी के कार्यक्रम के साथ मंदिर के शिवालय में 51 किलो ड्राई फ्रूट से भगवान शिव का श्रृंगार और 112 किलो छप्पन भोग लगाया जाएगा. उन्होंने बताया कि 13 फरवरी को शिवालय में जलाभिषेक के बाद शिव बारात शोभा यात्रा निकाली जाएगी,जिसमें 11 बैंड शामिल होंगे ओर शिव पालकी मेरठ से आ रही है. उन्होंने कहा कि शिव बारात पंजाब से आ रही है जिसमें भगवान बाला जी के 11 स्वरूप जालंधर से शामिल होंगे ओर शहनाई पार्टी मथुरा से आ रही है. उन्होंने बताया कि 15 फरवरी को शिव जागरण एवं संकीर्तन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बहुत से कलाकार भक्ति गीत गाएंगे और 16 फरवरी को मंदिर में हवन यज्ञ के बाद भंडारे का आयोजन किया जाएगा.

स्थानीय निवासी श्रेयांश कुमार जैन ने बताया कि यह मंदिर का रखरखाव वर्तमान समय में श्री शिव मंदिर पीपल वाला सेवा मंडल (रजि) कर रहा है. मंदिर में जो भी मनोकामनाएं भक्त सच्चे मन से मांगता है, वह जरूर पूरी होती है. इस मंदिर में शिवरात्रि के दिन कई बार भगवान भोलेनाथ के प्रिय नागराज के दर्शन भक्तों को हो चुके हैं. आज से 11 साल पहले काले रंग का सांप मंदिर की शिवलिंग पर आकर बैठ गया था. तब से लेकर आज तक इस मंदिर भी शिवरात्रि के दिन दूर-दूर से लोग जलाभिषेक करने के लिए आते हैं. उन्होंने बताया कि यह मंदिर श्री शिव मन्दिर (वकीलां) वाले नाम से भी प्रसिद्ध है, क्योंकि उस पुराने समय में मंदिर के संस्थापक वकील परिवार था.

श्रद्धालु प्रिया शर्मा ने बताया कि इस मंदिर से उनकी बहुत पुरानी आस्था जुड़ी हुई है, क्योंकि कई साल पहले उनकी पुत्र वधू का वीजा नहीं लग रहा था और इस मंदिर उसने आकर अपनी मनोकामना मांगी थी. इसके बाद कुछ समय बाद ही उसका वीजा लग गया और आज वह परिवार सहित इस मंदिर में रोजाना माथा टेकने के लिए जरूर आते हैं. उन्होंने कहा कि इस मंदिर में उन्होंने जो भी कुछ मांगा है, वह जरूर पूरा हुआ है.

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